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कांग्रेस का माधवी पुरी बुच पर आरोप- SEBI में रहने के दौरान मिला 16.8 करोड़ रुपये का वेतन; ICICI Bank ने किया इनकार

ICICI Bank sebi chief news: स्टॉक एक्सचेंजों को बैंक ने बताया कि 2013 के बाद बुच को वही भुगतान किए गए हैं जो उन्होंने बैंक में अ​धिकारी रहने के दौरान प्राप्त किए थे।

Last Updated- September 02, 2024 | 10:02 PM IST
ICICI Bank's statement came on Congress's allegation, said this on salary being given to SEBI chairperson Madhabi Puri Buch कांग्रेस के आरोप पर आया ICICI Bank का बयान, SEBI चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को सैलरी दिए जाने पर कही ये बात

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच पर आज आरोप लगाया कि बाजार नियामक का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त होने के बावजूद उन्होंने अपने पिछले नियोक्ता आईसीआईसीआई बैंक से ‘वेतन लेना’ जारी रखा।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान आरोप लगाया कि बाजार नियामक में अधिकारी रहते हुए बुच ने आईसीआईसीआई समूह से करीब 16.8 करोड़ रुपये कमाए। उन्होंने कहा कि इससे हितों के टकराव का भी संभावित मामला बनता है। हालांकि आईसीआईसीआई बैंक ने बुच को उनके बैंक छोड़ने के बाद की अवधि में भुगतान करने के आरोपों को खारिज किया है।

स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में निजी क्षेत्र के ऋणदाता ने कहा कि 2013 के बाद बुच को वही भुगतान किए गए हैं जो उन्होंने बैंक में अ​धिकारी रहने की अव​धि के दौरान अर्जित किए थे। बैंक के ईसॉप के जरिये सेवानिवृत्त लाभ के अलावा और कोई भुगतान नहीं किया गया है।

आईसीआईसीआई बैंक ने कहा, ‘बैंक या समूह की कंपनियों ने माधवी पुरी बुच को उनकी सेवानिवृ​त्ति के बाद सेवानिवृत्ति लाभ के अलावा कोई भी वेतन का भुगतान या ईसॉप नहीं दिए हैं। उन्होंने 31 अक्टूबर, 2013 से सेवानिवृत्ति होने का विकल्प चुना था।’

विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि बुच सेबी में अधिकारी रहते हुए आईसीआईसीआई बैंक में ‘लाभ के पद’ पर थीं। खेड़ा ने इस मामले में बुच और सेबी प्रमुख के चयन में शामिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की है।

आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि उसके कर्मचारियों के पास विकल्प था कि ईसॉप मिलने की तारीख से 10 साल की अवधि तक किसी भी समय उसका उपयोग कर सकता था। बुच मार्च 2022 में सेबी की चेयरपर्सन नियुक्त हुई थीं। इससे पहले वह अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2021 के बीच सेबी की पूर्णकालिक सदस्य थीं। सेबी में ​शामिल होने से पहले वह करीब दो दशक तक आईसीआईसीआई बैंक और इस समूह की फर्मों के साथ जुड़ी हुई थीं।

खेड़ा के इस आरोप पर कि आईसीआईसीआई बैंक टीडीएस काट रहा था, बैंक ने कहा, ‘आयकर नियमों के अनुसार बिक्री के दिन शेयर भाव और आवंटन मूल्य के बीच के अंतर विशेष आय मानी जाती है। इसे कर्मचारियों के फॉर्म 16 के भाग बी में दिखाया जाता है। सेवानिवृ​त्त कर्मचारियों के लिए भी यही प्रावधान है। बैंक के लिए ऐसी आय पर कर काटना आवश्यक है।’

खेड़ा ने कहा कि आईसीआईसीआई समूह के पक्ष में नियमों में बदलाव किया गया और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज को आसानी से सूचीबद्धता (लिस्टिंग) खत्म करने में मदद की गई।

बुच ने सोमवार को मुंबई में आयोजित सीआईआई के एक सत्र में आने ऊपर लगाए गए आरोपों से संबं​धित सवालों का जवाब नहीं दिया। मगर उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘अगर मैं रीट्स शब्द का जिक्र भी करती हूं तो मुझ पर हितों के टकराव का आरोप लगाया जाता है।’

First Published - September 2, 2024 | 9:59 PM IST

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