facebookmetapixel
Advertisement
हो गया ऐलान! 160 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देगी फार्मा कंपनी, जान लें रिकॉर्ड डेटप्रधानमंत्री ने अमेरिका को सौंपा भारत का भविष्य: राहुल गांधीपूंजी निवेश से प्रगति की राह, 2047 लक्ष्य की ओर सरकार का कदमनिफ्टी भले रुका, लेकिन इन 3 शेयरों में आज दिख रहा 5 से 8% तक का अपसाइड!AI की वैश्विक दौड़ में भारत की दावेदारी, दिल्ली बनेगी रणनीति का केंद्रइन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश में बड़ा कदम, केंद्र ला सकता है पहला मल्टी-सेक्टर ट्रस्टHDFC बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, ICICI ग्रुप को मिली अहम मंजूरीStock Market Today: मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआत?Stocks To Watch Today: Lenskart से Federal Bank तक कई दिग्गज स्टॉक्स पर आज रहेगी नजर; चेक करें लिस्टअब नहीं चलेगा जबरन बीमा-MF बेचने का खेल, RBI ने कसा शिकंजा

SEBI जल्द लागू करेगा F&O पर नए नियम, सर्कुलर के जरिए होंगे बदलाव

Advertisement

सेबी ने यह भी सुझाव दिया था कि इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को सीमित किया जाए

Last Updated- October 01, 2024 | 9:02 PM IST
SEBI

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियमों में बदलाव का लंबे समय से इंतजार हो रहा था लेकिन यह सेबी की ताजा बोर्ड बैठक के 17-बिंदु एजेंडा में शामिल नहीं था। बहरहाल, नियामक सूत्रों का कहना है कि ये नियम जल्द ही एक सर्कुलर के जरिए लागू हो सकते हैं। गौर करने वाली बात है कि ये नियम जुलाई में एक चर्चा पत्र के जरिए सुझाए गए थे।

सेबी ने यह भी सुझाव दिया था कि इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को सीमित किया जाए, ताकि उन्हें होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

एक सूत्र ने बताया कि यह परामर्श पत्र ड्राफ्ट सर्कुलर के रूप में पेश किया गया था, न कि ड्राफ्ट नियमों के रूप में। इसलिए सेबी की बोर्ड बैठक के बाद जारी 23 पन्नों की प्रेस रिलीज़ में इसका जिक्र नहीं हुआ।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्वनी भाटिया ने नई दिल्ली में आयोजित लोकल गवर्नेंस सिनर्जी कॉन्क्लेव के दौरान बताया कि ये बदलाव जल्द ही लागू हो सकते हैं। यह कार्यक्रम भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा मिलकर आयोजित किया गया था।

स्टॉक एक्सचेंज समेत बाजार के प्लेयर्स ने इन बदलावों पर अपने सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में उच्च प्रवेश शर्तें, हर एक्सचेंज के लिए साप्ताहिक एक्सपायरी पर एक बेंचमार्क और मार्जिन नियम शामिल हैं।

बाजार नियामक को प्रस्तावित बदलावों पर भारी प्रतिक्रिया मिली थी, और F&O ट्रेडर्स इन बदलावों के अंतिम रूप लेने को लेकर चिंतित हैं। डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडर्स के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वैश्विक व्यापार संगठन, फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (FIA), ने भी अपनी प्रतिक्रिया में “सावधानीपूर्वक और सुरक्षित तरीके” से कदम उठाने की सिफारिश की थी।

फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (FIA) ने कहा कि प्रस्तावित उपायों से अनजाने में उलटे नतीजे आ सकते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से जांचना जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर ELM (एक्सट्रीम लॉस मार्जिन) बढ़ा दिया गया तो सुरक्षित ऑप्शंस रणनीतियों (जैसे कॉल, पुट, और कैलेंडर स्प्रेड्स) पर ज्यादा भार पड़ सकता है, जिससे निवेशक जोखिम भरी रणनीतियों की ओर जा सकते हैं, जिन पर अब वही मार्जिन लागत लगेगी।

FIA ने यह भी कहा कि अगर एक्सपायरी और स्ट्राइक प्राइस कम कर दी गई, तो बाजार कुछ ही वित्तीय साधनों तक सीमित हो सकता है, जिससे निवेशकों के पास कम विकल्प रहेंगे और उनकी रणनीतियों की सटीकता और लागत-प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है।

सोमवार को सेबी की बोर्ड बैठक में, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार के सदस्य भी शामिल थे, कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें निवेश सलाहकार नियमों में बदलाव, तेज़ राइट्स इश्यू की प्रक्रिया, और वैकल्पिक निवेश फंड्स (AIF) के निवेशकों को प्रॉ-राटा और पैरी-पासू अधिकार देना शामिल है।

Advertisement
First Published - October 1, 2024 | 9:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement