वित्तीय उत्पादों की भ्रामक बिक्री (मिस-सेलिंग) करने के मामले पर रोक लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सख्त रुख अपनाया है। बैंकिंग नियामक ने बीमा कंपनियों या म्युचुअल फंडों जैसे तीसरे पक्ष के उत्पादों और सेवाओं को बेचने के लिए बैंक कर्मचारियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया है। आरबीआई ने कहा कि बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए यूजर इंटरफेस में कोई डार्क पैटर्न इस्तेमाल न हो।
बीते सोमवार को जारी ‘विनियमित इकाइयों द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री’ के लिए संशोधित दिशानिर्देश के मसौदे में यह प्रस्ताव किया गया है कि कोई बैंक किसी भी तीसरे पक्ष के उत्पाद की बिक्री को अपने किसी उत्पाद के साथ जोड़कर नहीं करेगा। अगर बैंक अपने उत्पाद को बेचने के लिए तीसरे पक्ष के उत्पाद की खरीद पर निर्भर है तो ग्राहक को किसी दूसरी कंपनी से वही उत्पाद खरीदने का विकल्प दिया जाना चाहिए।
अगर भ्रामक तरीके से बिक्री की बात साबित होती है तो बैंकों को पूरी रकम वापस करनी होगी और ऐसे उत्पादों की बिक्री से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए बैंक ग्राहकों को हर्जाना भी देंगे।
नियामक ने कहा कि बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि उत्पादों और सेवाओं की बिक्री के लिए व्यावसायिक इकाइयों के बीच प्रतिस्पर्धा की नीतियां और कार्य न तो गलत बिक्री के लिए प्रोत्साहित करेंगे और न ही कर्मचारियों/प्रत्यक्ष बिक्री एजेंटों को उत्पाद/सेवाओं की बिक्री पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
प्रस्तावित नियम बैंकों और बीमा कंपनियों/म्युचुअल फंडों दोनों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि वे अपने उत्पादों के वितरण के लिए बैंकों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। दूसरी ओर बैंकों को ऐसे उत्पादों के वितरण के लिए फीस मिलती है। पिछले साल नवंबर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के बैंकिंग तंत्र में लोगों का भरोसा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था और ऋणदाताओं से उत्पादों की भ्रामक बिक्री पर रोक लगाने की अपील की थी। बैंकिंग नियामक ने भी कहा था कि बैंकों को अपनी मुख्य कारोबारी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
आरबीआई ने यह भी कहा कि किसी भी बैंक को अपने या थर्ड पार्टी के किसी ग्राहक को ऋण सुविधा के जरिये उनकी स्पष्ट सहमति के बिना कोई उत्पाद या सेवाओं को खरीदने के लिए पैसे नहीं देने चाहिए। अगर नियामक ने ऐसी शिकायत के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है तो ग्राहक नियम एवं शर्तों की हस्ताक्षरित प्रति मिलने के 30 दिन के अंदर भ्रामक बिक्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।
बैंक ग्राहकों के फीडबैक पर हर छह महीने में एक रिपोर्ट तैयार करें और उसके आधार पर समीक्षा की जाए। मसौदे में ऐसा प्रस्ताव किया गया था कि ग्राहकों से टेलीफोन पर बात करना या उनसे मिलना आम तौर पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच होगा। इसके लिए ग्राहकों से अनुमति लेना जरूरी होगा।