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म्युचुअल फंड वितरकों को भुगतान निचले स्तर पर

Last Updated- December 15, 2022 | 5:11 AM IST

म्युचुअल फंड के वितरक अपनी आय में कमी का सामना कर रहे हैं और फंड हाउस की तरफ से उन्हें चुकाई गई सकल रकम 2019-20 में घटकर तीन साल के निचले स्तर 6,134 करोड़ रुपये रह गई। इससे पिछले साल उन्हें 7,938 करोड़ रुपये मिले थे, यानी उनकी आय पर करीब 22 फीसदी की चोट पड़ी।
बाजार के भागीदारों ने इसके लिए कई वजहों को जिम्मेदार ठहराया। श्रीकवि वेल्थ के मुख्य कार्याधिकारी श्रीकांत मटरूभाई ने कहा, कमीशन वाले ढांचे को उपयुक्त बनाकर फंड हाउस लागत पर नियंत्रण कर रहे हैं। चूंकि फंड हाउस सूचीबद्ध हो रहे हैं, ऐसे में कमीशन में आगे और गिरावट आ सकती है क्योंकि म्युचुअल फंड अपनी लागत को और कम करना चाहेंगे।
वैल्यू रिसर्च के संस्थापक व मुख्य कार्याधिकारी धीरेंद्र कुमार ने कहा, डायरेक्ट प्लान या चैनलों की तरफ झुकाव देखने को मिल रहा है और परिसंपत्ति की वैल्यू भी बाजार में गिरावट के बीच प्रभावित हुई है।
मई में उद्योग की कुल परिसंपत्तियों में डायरेक्ट प्लान वाली परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 47 फीसदी रही। बाजार नियामक सेबी विगत में डायरेक्ट प्लान में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर चुका है।
डायरेक्ट प्लान में निवेशकों को वितरक से कोई मतलब नहीं होता और वह अपने कुल खर्च अनुपात में बचत कर लेते हैं क्योंकि वितरकों का कमीशन कुल खर्च अनुपात में जुड़ा रहता है।
बड़े वितरकों ने भी प्राप्तियों में कटौती देखी है। ऐक्सिस बैंक के मामले में सकल भुगतान घटकर 415 करोड़ रुपये रह गया और पिछले साल के मुकाबले उसे 25 फीसदी कम रकम मिली। भारतीय स्टेट बैंक को 23 फीसदी कम (374.9 करोड़ रुपये) भुगतान मिला है। एचडीएफसी बैंक की आय पर 40 फीसदी (294 करोड़ रुपये) की चोट पड़ी है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने 47 फीसदी (185.64 करोड़ रुपये) की की दर्ज की है।
कमीशन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी वितरक एनजे इंडिया इन्वेस्ट ने वित्त वर्ष 2020 में भुगतान में तीन फीसदी की कमी देखी है। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि नियामकीय बदलाव ने भी वितरकों को प्रोत्साहित करने की म्युचुअल फंड की क्षमता पर अवरोध खड़ा किया है। मटरूभाई ने कहा, नए नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि योजनाओं से संबंधित खर्च उसी योजना को उठाए जाने की दरकार है। पहले फंड हाउस योजना से संबंधित खच4 मसलन वितरण लागत अपने खाते में दर्ज कर सकते थे, बजाय इसके कि उसकी वसूली उसी योजना से हो। साथ ही म्युचुअल फंड में अक्टूबर 2018 से अग्रिम कमीशन का भुगतान रोक दिया गया है।
इक्विटी निवेश में नरमी ने भी इस कमी में योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2020 में इक्विटी योजनाओं में 83,787 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो एक साल पहले के 1.1 लाख करोड़ रुपये से 25 फीसदी कम है।
बाजार की अवधारणा में कमजोरी से ज्यादा निवेश निकासी हुई है और मूल्यांकन को क्षति पहुंची है और अंतत: वितरकों की तरफ से संभाली जा रही परिसंपत्तियों का आकार घटा है।
वित्त वर्ष 2020 में बीएसई सेंसेक्स 20 फीसदी से ज्यादा टूटा जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसमें जोरदार उछाल आई थी।

First Published - July 7, 2020 | 12:04 AM IST

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