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NSEL निवेशकों के लिए ₹1,950 करोड़ के एकमुश्त निपटान को मंजूरी, 10 साल पुराना डिफॉल्ट मामला सुलझने की राह पर

एनसीएलटी ने कहा कि अधिकांश लेनदारों द्वारा समर्थित यह योजना उचित और तर्कसंगत है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं है

Last Updated- November 28, 2025 | 10:13 PM IST
NSEL settlement plan

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के मुंबई पीठ ने नैशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) की ओर से प्रस्तावित 1,950 करोड़ रुपये की एकमुश्त निपटान योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना एक दशक पुराने उस भुगतान संकट को हल करेगी जिससे 5,600 से ज्यादा निवेशक प्रभावित हुए हैं। एनसीएलटी ने कहा कि अधिकांश लेनदारों द्वारा समर्थित यह योजना उचित और तर्कसंगत है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं है।

यह आदेश 2013 के एनएसईएल डिफॉल्ट मामले को बंद करने की दिशा में एक कदम है। यह एक कमोडिटी बाजार का संकट था जिसमें 24 ट्रेडिंग सदस्यों का 5,402.71 करोड़ रुपये का डिफॉल्ट शामिल था। योजना के तहत एनएसईएल और उसकी मूल कंपनी 63 मून्स टेक्नॉलजीज तय लेनदारों (जो 10 लाख रुपये से अधिक के दावे वाले निवेशक हैं) के बीच आनुपातिक आधार पर 1,950 करोड़ रुपये वितरित करेंगी।

रिकॉर्ड बताते हैं कि 2,951.85 करोड़ रुपये (मूल्य के हिसाब से करीब 64 फीसदी) का प्रतिनिधित्व करने वाले 3,088 लेनदारों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। न्यायमूर्ति एस.सी. गुप्ते (सेवानिवृत्त) की देखरेख में भुगतान यूनिवर्सल ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड द्वारा प्रबंधित एक एस्क्रो खाते के माध्यम से किया जाएगा। निपटान पूरा होने के बाद लेनदार एनएसईएल और 63 मून्स के खिलाफ सभी दीवानी मुकदमे वापस ले लेंगे। 10 लाख रुपये से कम के दावों का निपटारा पहले ही हो चुका है और 10 से 20 लाख रुपये के बीच के दावों का आंशिक भुगतान भी पहले ही किया जा चुका है।

न्यायिक सदस्य सुशील महादेवराव कोचे और तकनीकी सदस्य प्रभात कुमार के पीठ ने पाया कि यह योजना कानून के अनुरूप है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि यह मंजूरी धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) या महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण (एमपीआईडी) अधिनियम के तहत किसी भी मौजूदा कुर्की आदेश को रद्द या प्रभावित नहीं करेगी और सक्षम न्यायालयों के समक्ष आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी।

एनएसईएल को आदेश और स्वीकृत योजना की प्रमाणित प्रति कंपनी रजिस्ट्रार और स्टांप अधीक्षक के पास वैधानिक अवधि के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय आर्थिक अपराध शाखा , और एल.जे. तन्ना एंटरप्राइजेज, पिको कैपिटल और जियोजित क्रेडिट्स जैसे निवेशक समूहों सहित कई हस्तक्षेपकर्ताओं ने इस योजना का विरोध किया।

ईडी ने तर्क दिया कि इस योजना का मकसद देनदारियों और जब्त संपत्तियों को बेदाग करना है और इससे चल रहे आपराधिक मामले कमजोर हो सकते हैं। न्यायाधिकरण ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह योजना जब्तियों या अभियोजन में हस्तक्षेप नहीं करती है और जब्त संपत्तियों के किसी भी उपयोग के लिए अलग से न्यायिक मंजूरी की आवश्यकता होगी।

पिको कैपिटल और अन्य ने 1,950 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को अपर्याप्त बताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि वह उस समझौते का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकता, जिसे लेनदारों से भारी मंजूरी मिल चुकी है।

मिहिर एच. मफतलाल बनाम मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (1997) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि उसकी भूमिका प्रक्रियात्मक अनुपालन और निष्पक्षता का आकलन करने तक सीमित थी।

First Published - November 28, 2025 | 10:13 PM IST

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