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नए नियम लाने पर विचार कर रही सेबी, जानें क्या होंगे फायदे और नुकसान

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डेल्टा फ्रेमवर्क, ओपन इंटरेस्ट की नई गणना और ट्रेडिंग पोजिशन लिमिट जैसे कई उपायों का प्रस्ताव, बाजार में हेरफेर रोकने और नकदी बाजार से तालमेल सुधारने पर जोर

Last Updated- February 25, 2025 | 10:38 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने इक्विटी डेरिवेटिव बाजार में जोखिम घटाने और हेरफेर की संभावना कम करने के लिए कई नए उपायों का प्रस्ताव किया है जिससे कि नकदी के बाजार के साथ डेरिवेटिव का मजबूत तालमेल सुनिश्चित हो सके।

प्रमुख प्रस्तावों में ‘डेल्टा’ फ्रेमवर्क का इस्तेमाल कर ओपन इंटरेस्ट (ओआई) की गणना के नए तरीके, बाजार पोजिशन की सीमा (एमडब्ल्यूपीएल) की समीक्षा और एकल स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव व सिंगल शेयर के लिए पोजिशन लिमिट शुरू करना शामिल है।

नया प्रस्ताव इंडेक्स डेरिवेटिव में उन्मादी उत्साह को नियंत्रित करने के लिए सेबी द्वारा किए गए छह उपायों के बाद आया है। इन उपायों ने कारोबार की मात्रा घटाकर आधी कर दी है और इन उपायों में से अधिकांश पहले से ही लागू हैं।

ताजा प्रस्तावों से ट्रेडरों पर आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन इससे प्रतिबंध की अवधि में शामिल होने वाले शेयरों की फ्रीक्वेंसी में कमी आएगी जिससे उनका ट्रेडिंग अनुभव सरल होगा। इसके अलावा इन बदलावों का मकसद बाजार की मजबूती बढ़ाना और बाजार की स्थितियों की सटीक तस्वीर सुनिश्चित करना शामिल है।

बाजार नियामक ने एक नए पैमाने का प्रस्ताव रखा है। इसे फ्यूचर इक्विलेंट या वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) के अनुबंधों की संख्या (ओपन इंटरेस्ट) की गणना के लिए डेल्टा आधारित फ्रेमवर्क नाम दिया गया है। डेल्टा का मतलब ऑप्शन की कीमतों में उस समय बदलाव से है जब नकदी बाजार में अंतर्निहित प्रतिभूति की कीमत बदलती है।

इस वक्त ओपन इंटरेस्ट (ओआई) की गणना वायदा एवं विकल्प में अनुमानित ओपन इंटरेस्ट को जोड़कर की जाती है। ट्रेडिंग करने वालों की गतिविधियों और धारणा का अंदाजा लगाने के लिए ओपन इंटरेस्ट महत्त्वपूर्ण होता है।

सेबी ने एमडब्ल्यूपीएल को नकद बाजार से जोड़ने की भी योजना बनाई है। एमडब्ल्यूपीएल किसी एक शेयर में वायदा एवं विकल्प के अनुबंधों की अधिकतम संख्या दर्शाता है। अगर एक बार शेयर एमडब्ल्यूपीएल से आगे बढ़ता है तो उसके डेरिवेटिव में आगे की ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लग जाता है।

मिसाल के तौर पर अगर ट्रेडर वायदा में खरीद पोजिशन बरकरार रखता है तो वह पुट ऑप्शन खरीद सकता है या कॉल ऑप्शन बेच सकता है ताकि उसका कुल डेल्टा निवेश कम हो। फिलहाल प्रत्येक शेयर के लिए एमडब्ल्यूपीएल उस शेयर के फ्री फ्लोट बाजार पूंजीकरण की 20 फीसदी है और यह एफऐंडओ के कुल अनुमानित ओपन इंटरेस्ट पर लागू होती है।

सेबी ने इसे घटाकर फ्री फ्लोट बाजार पूंजीकरण के 15 प्रतिशत या नकद बाजार में औसत दैनिक डिलिवरी वैल्यू (एडीडीवी) का 60 गुना जो भी कम हो, तक करने का प्रस्ताव रखा है। इस पैमाने की गणना रॉलिंग एडीडीवी के आधार पर हर तीन महीने में दोबारा की जाएगी। नए तरीके से शेयरों के प्रतिबंधित अवधि में जाने की घटनाओं में 90 फीसदी तक की कमी आएगी। नियामक बाद में इंडेक्स डेरिवेटिव के लिए एक एमडब्ल्यूपीएल की संभावनाएं भी तलाश सकता है।

नए तरीके में डेरिवेटिव में म्युचुअल फंड और वैकल्पिक निवेश फंडों के लिए निवेश सीमा पर विचार किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका लॉन्ग ऑप्शन में लाभ मिले।

सेबी ने मार्च 2020 से ही बाजार और ट्रेडिंग कारोबार में तेजी को देखते हुए इंडेक्स वायदा के लिए दिन के अंत की सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव किया है और इसे 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। वहीं इंट्राडे की सीमा 2,500 करोड़ रुपये ही बनाए रखने का प्रस्ताव है। इंडेक्स विकल्प के लिए भी इस तरह के संशोधनों का प्रस्ताव है।

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First Published - February 25, 2025 | 10:38 PM IST

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