facebookmetapixel
30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पारSilver के बाद अब Copper की बारी? कमोडिटी मार्केट की अगली बड़ी कहानीAI विश्व शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे स्पेन के 80 विश्वविद्यालयों के रेक्टरभारत–कनाडा सहयोग को नई रफ्तार, शिक्षा और व्यापार पर बढ़ा फोकस

भारतीय बाजार में फिर लौट सकते हैं यूरोपीय निवेशक, मैक्वेरी ने जताई निवेश बढ़ाने की संभावना

निफ्टी में हालिया गिरावट के बाद अंडरवेट पोजीशन घटाने की योजना, एफपीआई निवेश पर बारीकी से नजर

Last Updated- March 10, 2025 | 10:19 PM IST
FPI

मैक्वेरी ने एक नोट में कहा है कि यूरोपीय निवेशक देसी इक्विटी में नया निवेश करने पर विचार कर रहे हैं और इस तरह से वे अपना अंडरवेट पोजीशन बदलना चाह रहे हैं। मैक्वेरी के रणनीतिकारों सुरेश गणपति और पुनीत बहलानी ने एक नोट में कहा, पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ के 30 निवेशकों के साथ बैठक में हमने स्पष्ट रूप से महसूस किया कि भारतीय बाजारों में हाल ही में हुई गिरावट (सितंबर 2024 में शीर्ष स्तरों से निफ्टी में करीब 15 फीसदी की गिरावट) के बाद निवेशक भारतीय बाजारों में पैसा लगाना चाह रहे हैं।

उनमें से अधिकांश ओवरवेट पोजीशन में नहीं जाना चाहते हैं, लेकिन अपने मौजूदा अंडरवेट रुख को कम करने के बारे में सोच रहे थे। भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए यूरोपीय देश प्रमुख गंतव्यों में से एक हैं। लक्जमबर्ग, आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे और नीदरलैंड 10 अग्रणी एफपीआई क्षेत्र हैं। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक एफपीआई ने देसी इक्विटी से 15 अरब डॉलर की निकासी की है। बिकवाली की वजह भारत की आय व आर्थिक वृद्धि में नरमी, महंगा मूल्यांकन और चीन की इक्विटी की ओर बढ़ता आकर्षण रही।

मैक्वेरी के इन्हीं विश्लेषकों ने कहा, कई लोगों का मानना है कि भारत एक संरचनात्मक कहानी है और चीन में संरचनात्मक मुद्दे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यह एक अल्पकालिक मामला है। कुछ निवेशकों का मानना है कि चीन मौजूदा स्तरों से एक संरचनात्मक स्तर पर दोबारा रेटिंग की कहानी है और उनका मानना है कि शी जिनपिंग शेयर बाजारों का इस्तेमाल धन के असर को बढ़ाने और इसके परिणामस्वरूप खपत को पुनर्जीवित करने के लिए एक जरिये के रूप में करेंगे।

नोट में कहा गया है कि ईयू के निवेशक देसी निवेशकों के सेंटिमेंट की परख के लिए म्युचुअल फंडों में निवेश की नजदीकी से निगरानी कर रहे हैं।

मैक्वेरी ने नोट में कहा, निवेशक चिंतित थे कि हाल ही में हुई गिरावट के बाद देसी तरलता कैसे प्रभावित हो सकती है और वे मासिक एसआईपी निवेश और समग्र एमएफ निवेश पर उत्सुकता से नजर रख रहे थे। उनके अनुसार निवेश में कोई भी गिरावट भारतीय बाजारों में सुधार को पटरी से उतारने वाला सबसे बड़ा जोखिम हो सकता है।

First Published - March 10, 2025 | 10:19 PM IST

संबंधित पोस्ट