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भारतीय बैंकिंग में AI अपनाने की रफ्तार अभी धीमी: इकोनॉमिक सर्वे

RBI ने क्यों बनाए AI के 7 नियम? इकोनॉमिक सर्वे ने बताया कारण

Last Updated- January 29, 2026 | 3:09 PM IST
artificial intelligence

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम की एक ऐसी तस्वीर दिखाई है, जो चौंकाने वाली है। सर्वे के मुताबिक, देश में सिर्फ 21 प्रतिशत बैंक और वित्तीय संस्थान ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अपना पाए हैं या उस पर काम कर रहे हैं। इकोनॉमिक सर्वे बताता है कि AI को अपनाने की रफ्तार अभी बहुत धीमी है। बड़े बैंक जरूर आगे बढ़े हैं, लेकिन छोटे शहरी सहकारी बैंक और कई NBFC अभी जूझ रहे हैं। इनके सामने सबसे बड़ी परेशानी है सही डेटा की कमी, प्रशिक्षित लोगों की कमी और सीमित IT बजट।

AI है, लेकिन सिर्फ नाम का

सर्वे का कहना है कि जहां AI का इस्तेमाल हो भी रहा है, वहां वह बहुत सीमित है। ज्यादातर बैंक AI का इस्तेमाल सिर्फ काम आसान करने, साधारण चैटबॉट चलाने, ग्राहकों से बातचीत और अंदरूनी फैसलों में मदद के लिए कर रहे हैं। अभी AI से अपने आप बड़े फैसले लेने की हिम्मत भारतीय बैंक नहीं जुटा पाए हैं।

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इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, RBI जानता है कि बिना भरोसे AI आगे नहीं बढ़ सकता। इसलिए उसने AI के लिए सात सूत्र तय किए हैं, जिनमें भरोसा, लोगों को प्राथमिकता, निष्पक्षता, जवाबदेही, समझने में आसान सिस्टम और सुरक्षा जैसे अहम सिद्धांत शामिल हैं।

दुनिया आगे निकल रही है

इकोनॉमिक सर्वे बताता है कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक AI को तेजी से अपना रहे हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक महंगाई और जोखिम पहचानने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक भी AI की मदद से फैसले ले रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का अनुमान है कि 2027 तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में AI पर निवेश 97 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

इकोनॉमिक सर्वे का संकेत साफ है। अगर भारतीय बैंकिंग सिस्टम ने अब रफ्तार नहीं बढ़ाई, तो आने वाले समय में तकनीक की इस दौड़ में भारत पीछे छूट सकता है।

First Published - January 29, 2026 | 3:03 PM IST

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