सॉफ्टबैंक की समर्थित डिजिटल कॉमर्स कंपनी AceVector Ltd ने अपने आईपीओ के लिए अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर सेबी के पास जमा किए हैं। कंपनी इस आईपीओ में 300 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी, जबकि मौजूदा निवेशक 6.38 करोड़ शेयरों की बिक्री (OFS) के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। यह जानकारी अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के आधार पर सामने आई है।
आईपीओ के ऑफर फॉर सेल हिस्से में कई निवेशक अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे। इनमें Starfish I Pte Ltd, Nexus, Wonderful Star Pte Ltd, Kenneth Stuart Glass, Jason Ashok Kothari, Priyanka Shreevar Kheruka, Rupen Investment and Industries और Centaurus Trading and Investments शामिल हैं। हालांकि, कंपनी के प्रमोटर और फाउंडर कुनाल बहल और रोहित बंसल अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।
दोनों मिलकर कंपनी में लगभग 34.63 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जिसमें बहल की 12.42 प्रतिशत, बंसल की 11.14 प्रतिशत और दोनों की संयुक्त फर्म B2 Professional Services LLP की 11.07 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। दूसरी ओर, प्रमोटर समूह की एक इकाई Starfish अपने 30.68 प्रतिशत हिस्से में से कुछ हिस्सेदारी बेच रही है।
कंपनी आईपीओ से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने में करेगी। इसके अलावा यह पैसे स्नैपडील की मार्केटिंग बढ़ाने, बिजनेस को आगे बढ़ाने में लगाए जाएंगे। कंपनी आम खर्चों के लिए भी इस पैसे का उपयोग करेगी। गुरुग्राम की यह कंपनी स्नैपडील, यूनिकॉमर्स और स्टेलारो ब्रांड्स जैसे कारोबार चलाती है। स्नैपडील एक सस्ता और उपयोगी सामान बेचने वाला ऑनलाइन मार्केट है। यूनिकॉमर्स वह प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन बेचने वालों को मदद देता है। वहीं स्टेलारो ब्रांड्स अलग-अलग ग्राहकों के लिए कई तरह के उत्पाद बेचने का काम करता है।
पैसों के मामले में भी कंपनी की हालत पहले से बेहतर हुई है। वित्त वर्ष 26 के पहले छह महीनों में AceVector की कमाई बढ़कर 244 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 181 करोड़ रुपये थी। यानी कंपनी की कमाई में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान कंपनी का नुकसान भी काफी कम हो गया है। पहले 28 करोड़ रुपये का नुकसान था, जो घटकर 9.2 करोड़ रुपये रह गया। यह दिखाता है कि कंपनी का कामकाज अब बेहतर चल रहा है।
कंपनी ने इस साल जुलाई में सेबी के पास गोपनीय तरीके से अपने आईपीओ के कागज जमा किए थे। इसके बाद नवंबर में सेबी ने इसे मंजूरी दे दी। गोपनीय तरीके से पेपर जमा करने का फायदा यह होता है कि कंपनी यह खुद तय कर सकती है कि आईपीओ की जानकारी कब लोगों को बताई जाए। अब AceVector ने फिर से ड्राफ्ट दस्तावेज जमा किए हैं, जिससे लगता है कि कंपनी जल्दी ही अपने आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ाने वाली है।