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H-1B वीजा पर सख्ती के बाद अब चीनी वर्कस यूरोप में तलाश रहें विकल्प

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कई चीनी कामगार अब यूरोप को विकल्प के रूप में देख रहे हैं, और महाद्वीप में जीवन और नौकरी के अवसरों पर चर्चा चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ रही है

Last Updated- October 02, 2025 | 4:54 PM IST
H-1B Visa

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की घोषणा के बाद अमेरिका में H-1B वीजा आवेदन पर 1,00,000 डॉलर की फीस लगाने की खबर ने विदेशी कामगारों में चिंता पैदा कर दी है। कई आवेदक स्थिति को समझने की उलझन में हैं और कुछ ने अमेरिका के बाहर विकल्प तलाशने पर विचार शुरू कर दिया है। हालांकि व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि यह फीस केवल नए आवेदनों पर लागू होगी। लेकिन, तब तक यह खबर कामगारों के बीच भय और अनिश्चितता पैदा कर चुकी थी।

चीनी वर्कस की नजर यूरोप पर

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कई चीनी कामगार अब यूरोप को विकल्प के रूप में देख रहे हैं, और महाद्वीप में जीवन और नौकरी के अवसरों पर चर्चा चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ रही है।

एलन, सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में एक सेमीकंडक्टर कंपनी में काम करने वाले एक चीनी नागरिक, ऐसे ही एक कामगार हैं। खबर आने के तुरंत बाद उन्होंने पेरिस में अपने एक दोस्त से यूरोप की नौकरी और इमिग्रेशन नीतियों के बारे में जानकारी ली। एलन ने अपना लगभग पूरा जीवन अमेरिका में बिताया है, जहां उन्होंने कॉलेज किया, रसायन विज्ञान में पीएचडी पूरी की और एक चिप कंपनी में नौकरी शुरू की।

पिछले दो साल से एलन H-1B वीजा पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका के वीजा प्रोग्राम में लॉटरी सिस्टम की वजह से उन्हें सफलता नहीं मिली। अब हाल ही में घोषित की गई वीजा फीस उनके लिए एक और बाधा बन गई, जिसके चलते उन्होंने कहा, “ऐसी नीतियां मेरी सहनशक्ति की परीक्षा ले रही हैं, इसलिए मैंने अन्य विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।”

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एलन के हवाले से लिखा कि, “मैं अब और सहन नहीं कर सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बस एक सामान्य नौकरी और शांति चाहिए, लेकिन ट्रंप की नीतियां उन्हें यह विकल्प नहीं दे रही हैं।

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यूरोप जाना अभी जल्दी होगा

इसी तरह, H-1B वीजा रखने वाली एक और चीनी नागरिक साचा ने हालिया आदेश को लेकर अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि उन्होंने यूरोप जाने पर विचार किया। हालांकि, उन्हें लगता है कि यूरोप जाना अभी जल्दी होगा, क्योंकि वहां तनख्वाह कम है और भाषा की बाधा भी है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के हवाले से साचा ने कहा, “अगर पैसे की चिंता न होती, तो अभी कोई भी अमेरिका में नहीं रहना चाहता।”

यूरोप में कितनी हैं संभावनाएं?

इन सवालों के जवाब में, जर्मनी में रहने वाले एक चीनी नागरिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडनोट (RedNote) पर अपने अनुभव साझा किए और यूरोप में रहने के फायदे और चुनौतियों के बारे में बताया।

फायदों में ज्यादा पेड लीव दिन और कम जीवनयापन खर्च शामिल हैं। इसके अलावा, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में ज्यादा पढ़े-लिखे कामगारों के लिए आसान वीजा योजनाएं हैं। हालांकि, भाषा की बाधा और वहां तुलनात्मक रूप से कम वेतन नुकसान के रूप में देखे जाते हैं।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, 2023 में फ्रांस में दो बच्चों वाले एक दंपती की औसत टैक्स के बाद आय लगभग 63,850 अमेरिकी डॉलर थी। तुलना में, अमेरिका में विवाहित दंपती की औसत टैक्स के बाद आय 101,500 अमेरिकी डॉलर थी।

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घर वापसी की राह

सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि कई चीनी वैज्ञानिक भी अमेरिका में बढ़ती चुनौतियों के बीच चीन लौटने लगे हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसिद्ध सांख्यिकीविद और लंबे समय तक हार्वर्ड प्रोफेसर लियू जुन (Liu Jun) त्सिंगुआ विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद संभालने के लिए चीन लौट आए हैं।

डेटा साइंस, बायो स्टेटिस्टिक्स और एआई में विशेषज्ञता रखने वाले लियू ने बिग डेटा और मशीन लर्निंग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में रटगर्स विश्वविद्यालय में अपने अमेरिका अकादमिक करियर की शुरुआत की और बाद में शिकागो विश्वविद्यालय चले गए। अमेरिका में फंडिंग में कटौती और कड़े इमिग्रेशन नियम उनके लौटने के पीछे मुख्य कारण थे।

बीजिंग ने ‘K वीजा’ भी पेश किया है, जिसे विज्ञान और तकनीक क्षेत्र में काम करने वाले विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है, और इसे H-1B वीजा का एक विकल्प माना जा रहा है।

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First Published - October 2, 2025 | 4:29 PM IST

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