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अमेरिकी अदालत ने खत्म किया ट्रंप टैरिफ, जवाबी शुल्क के आदेशों को किया रद्द

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इस फैसले से अमेरिका की ब्रिटेन, जापान, यूरोपीय संघ, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और भारत के साथ हाल ही में शुरू या पूरे हुए व्यापार करार असल में एकतरफा और बेकार हो गए हैं

Last Updated- February 20, 2026 | 10:46 PM IST
Donald Trump

अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को आज रद्द कर दिया। इससे ट्रंप प्रशासन के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लग सकता है। यह निर्णय आपातकालीन शक्तियों से संबंधित कानून के तहत लगाए गए शुल्कों पर केंद्रित है, जिसमें लगभग हर देश पर लगाए गए व्यापक जवाबी शुल्क भी शामिल हैं। न्यायाधीशों ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया।

यह ट्रंप के व्यापक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है, जिसे उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में तीन रूढ़िवादी न्यायविदों की नियुक्तियों के साथ आकार देने में मदद की थी। ट्रंप के एजेंडे का यह पहला मामला है जो सीधे तौर पर देश की शीर्ष अदालत के सामने आया है। राष्ट्रपति इस मामले में मुखर रहे हैं और कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनके खिलाफ फैसला आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। ट्रंप ने अदालत के फैसले पर नाखुशी जताई है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले से अमेरिका की ब्रिटेन, जापान, यूरोपीय संघ, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और भारत के साथ हाल ही में शुरू या पूरे हुए व्यापार करार असल में एकतरफा और बेकार हो गए हैं। भागीदार देश अब इन करार को खत्म करने के बहाने ढूंढ़ सकते हैं।

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न्यायाधीशों ने कहा कि संविधान इस बारे में स्पष्ट है कि संसद को कर लगाने का अ​धिकार है, जिसमें शुल्क भी शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, ‘संविधान बनाने वालों ने कर लगाने के अ​धिकार का कोई भी हिस्सा कार्यकारी इकाई को नहीं दिया था।’ न्यायाधीश सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने फैसले पर असहमति जताई।

हालांकि इस पर कोई चर्चा नहीं की गई कि कंपनियों द्वारा शुल्क के तौर पर चुकाए गए अरबों डॉलर उन्हें वापस मिलेंगे या नहीं। कई कंपनियां जिनमें बड़ी वेयरहाउस श्रृंखला भी शामिल हैं, पहले ही रिफंड के लिए अदालत जा चुकी हैं।

ताजा फैसला ट्रंप को दूसरे कानूनों के तहत शुल्क लगाने से नहीं रोकता है। मगर ट्रंप के कामों की रफ्तार धीमी हो सकती है। शीर्ष अदालत का यह फैसला ट्रंप के कई फैसलों को अदालत से मंजूरी मिलने के बाद आया है।

अदालत का फैसला आने के बाद अमेरिका और यूरोप के शेयर बाजार में तेजी देखी गई। दूसरी ओर अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 2 आधार अंक बढ़कर 4.09 हो गई। डॉलर सूचकांक में भी थोड़ी कमजोरी देखी गई।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनी​शिएटिव ने कहा कि अमेरिकी शीर्ष अदालत द्वारा ट्रंप शुल्क को खारिज करने के फैसले के बाद भारत को अमेरिका के साथ किए गए व्यापार करार की नए सिरे से समीक्षा करनी चा​हिए।

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पारस्परिक शुल्क हटाने से अमेरिका को भारत से होने वाले करीब 55 फीसदी निर्यात पर 18 फीसदी शुल्क नहीं देना होगा और वै​श्विक व्यापार नियमों के मुताबिक उन पर केवल मानक सर्वाधिक तरजीही देश के शुल्क लागू होंगे।

यह फैसला भारत और अमेरिका के 7 फरवरी को अंतरिम व्यापार करार के लिए संयुक्त बयान के कुछ हफ्ते बाद आया। समझौते के पहले कदम के तौर पर अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क हटा दिए और इस महीने जवाबी शुल्क 25 फीसदी से घटकर 18 फीसदी होने की उम्मीद है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन की अगुआई में अधिकारियों का एक दल रविवार को अमेरिका जा सकता है।

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First Published - February 20, 2026 | 10:35 PM IST

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