केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास से जुड़े लगभग सभी प्रमुख देशों ने एआई इम्पैक्ट समिट में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। समिट के दौरान सरकार को एआई बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश के वादे किए गए।
वैष्णव ने कहा कि घोषणापत्र का ब्योरा शनिवार को घोषित होने की उम्मीद है क्योंकि सरकार चाहती है कि इस पर अधिक से अधिक देश हस्ताक्षर करें। वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘शनिवार को समिट के समापन तक हमारे पास घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 80 से ज्यादा लोग होंगे। घोषणा पत्र पर व्यापक आम सहमति है। हम बस इस पर हस्ताक्षर करने वालों की संख्या को अधिकतम करना चाहते हैं।’
2023 में ब्लेचली पार्क में पहले वैश्विक एआई समिट में अमेरिका, चीन और भारत समेत कई देशों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें फ्रंटियर एआई मॉडल से होने वाले जोखिम का प्रबंधन साथ मिलकर करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई गई थी। अगले दो एआई समिट सियोल और पेरिस में हुए जिसमें एआई से संबंधित सुरक्षा, नवाचार और समावेश जैसे व्यापक मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही गई।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी को शुरू हुआ इंडिया एआई समिट 5 दिन ही चलना था मगर सरकार ने इसे एक दिन के लिए बढ़ा दिया। अब यह समिट 21 फरवरी को संपन्न होगा। वैष्णव ने कहा कि समिट में अभी तक 5 लाख से ज्यादा दर्शक आ चुके हैं।
वैष्णव ने कहा कि 5 दिन के समिट के दौरान सरकार को एआई बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 250 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश के वादे किए गए। इसके साथ ही वेंचर कैपिटल उद्यमियों ने भी करीब 20 अरब डॉलर निवेश का संकल्प जताया है। एआई मॉडल के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उद्योग के प्रमुख ने इन मॉडलों से मिले नतीजों की गुणवत्ता से बहुत प्रभावित हुए, जिन्हें भारतीय स्टार्टअप फर्मों ने कम संसाधन के साथ बनाया था।
वैष्णव ने कहा कि सरकार एआई मिशन के दूसरे चरण पर भी काम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि एआई मिशन 2.0 के तहत सरकार का लक्ष्य 20 लाख लोगों को एआई का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण देना है। वैष्णव ने कहा, ‘हम पहले से ही स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में एआई को शामिल करने की जरूरत सहित अन्य पहल के बारे में उद्योग के साथ चर्चा कर रहे हैं। इसमें राज्य सरकारों से भी परामर्श किया गया है।’
पैक्स सिलिका पहल में भारत के औपचारिक रूप से शामिल होने के बारे में वैष्णव ने कहा कि यह आपूर्ति श्रृंखला के नजरिये से महत्त्वपूर्ण है।