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US की ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हुआ भारत, चीन पर निर्भरता कम करने व AI सिक्योरिटी के लिए मिलाया हाथ

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राष्ट्रीय राजधानी में एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन का 12वां हस्ताक्षरकर्ता बन गया

Last Updated- February 20, 2026 | 11:08 PM IST
India Pax Silica
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत शुक्रवार को पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो गया, जो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर अमेरिका की पहल है। इस पहल का उद्देश्य चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला

सुरक्षित बनाने और अमेरिका के सहयोगियों और विश्वसनीय भागीदारों के बीच नई आर्थिक सुरक्षा सहमति को आगे बढ़ाने का प्रयास है। राष्ट्रीय राजधानी में एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन का 12वां हस्ताक्षरकर्ता बन गया, जिसमें अमेरिका के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, इजरायल और नीदरलैंड भी शामिल हैं। कार्यक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले कुछ महीनों में भारत का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द ही हस्ताक्षर होने वाले हैं। गोर ने क्वाड गठबंधन को अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए महत्त्वपूर्ण समूह बताया।

पैक्स सिलिका को बीते दिसंबर में दुर्लभ खनिजों और एआई के लिए सुरक्षित, लचीली और नवाचार आधारित आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए लॉन्च किया गया था। पैक्स सिलिका समिट 12 दिसंबर को वाशिंगटन में आयोजित हुआ था, जहां भागीदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत मूल हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं था।

भारत ने घोषण पत्र के द्विपक्षीय परिशिष्ट के रूप में ‘इंडिया-यूएस एआई अपॉर्च्युनिटी पार्टनरशिप’ पर संयुक्त बयान पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कहा गया है कि भारत और अमेरिका मानते हैं कि ‘21वीं सदी को दुर्लभ  खनिजों और ऊर्जा से लेकर कंप्यूट एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण तक’ आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के लिए मजबूत नींव के रूप में परिभाषित किए जाने की संभावना है। दोनों देश इस बात पर एकमत हैं कि एआई का भविष्य भरोसेमंद सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और मुक्त उद्यम की नींव पर बनाया जाना चाहिए।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष ‘मानव समृद्धि के लिए नवाचार को बढ़ावा देने और इसे आम जनजीवन में लागू करने के लिए एआई के अवसरों की गतिशीलता के पक्ष में भय को दूर कर आगे बढ़ने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं।’ भारत और अमेरिका का मानना है कि मुक्त विश्व व्यवस्था के समक्ष बड़ा जोखिम एआई की प्रगति नहीं, बल्कि इसका लाभ उठाने में विफलता है।

दोनों पक्षों ने एआई के लिए ‘उद्यमिता एवं नवाचार के लिए बिना किसी माफी के अनुकूल’ जैसा वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने का इरादा व्यक्त किया। इसके अलावा दोनों देशों ने नवाचार से संबंधित नियमों को बढ़ावा देने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए पैक्स सिलिका फ्रेमवर्क के तहत सहयोग को बढ़ाने और निजी क्षेत्र में एआई क्रांति लाने जैसी साझा प्राथमिकताओं की पहचान की है।

दस्तावेजों पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन, भारत में अमेरिकी राजदूत गोर और अमेरिकी विदेश मंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार जैकब हेलबर्ग ने हस्ताक्षर किए।

इस मौके पर मौजूद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा पर सहयोग करने के लिए भारत और अमेरिका की मजबूत क्षमता की बात की। उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका के तहत सहयोग भारत-अमेरिका कॉम्प्रिहेंसिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन पर आपसी साझेदारी को और मजबूत करेगा। पैक्स सिलिका में भारत का शामिल होना भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के बाद आया है। अभी दोनों देश अपने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि पैक्स सिलिका में भारत का आना रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है और यह बहुत जरूरी भी है। भारत के पास इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमता है। इसका फायदा इस गठबंधन को मिलेगा। हेलबर्ग ने कहा कि पैक्स सिलिका में शामिल देश एक नया ढांचा तैयार कर रहे हैं जो एआई की ताकत को लोगों के हाथों में देता है और तमाम संभावनाओं के द्वार खोलता है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पैक्स सिलिका का उद्देश्य एआई युग के लिए मूल प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षित, लचीली और नवाचार आधारित आपूर्ति श्रृंखला बनाना है। विशेष रूप से सिलिकॉन और दुर्लभ खनिज जो सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी प्रणाली को रेखांकित करते हैं।

पैक्स सिलिका के तहत भारत और अमेरिका का उद्देश्य नवाचार के लिए नियामकीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, एआई तंत्र को मजबूत करना और मुक्त उद्यमिता को आगे बढ़ाना है। यह साझेदारी एआई विकासकर्ताओं, स्टार्टअप और इस तंत्र को विकसित करने वालों को सहारा देने, संयुक्त अनुसंधानऔर विकास करने, अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर में साझेदारी एवं निवेशकों को सुविधाएं देने की कल्पना करती है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी सहयोग भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के मूल स्तंभ में से एक है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि पैक्स सिलिका पहल में भारत का शामिल होना महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने में महत्त्वपूर्ण कदम है।

दुर्लभ खनिजों और संबंधित उत्पादों पर चीन के निर्यात नियंत्रण का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए हेलबर्ग ने इन खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर ‘ओवर-कंसंट्रेटेड सप्लाई चेन्स’ और ‘इकनॉमिक कोर्सन ऐंड ब्लैकमेल’ से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को चिह्नित किया। पिछले एक साल में भारत ने दुनिया भर के देशों की तरह चीन से दुर्लभ खनिजों के आयात में बाधाओं का सामना किया है। दुर्लभ खनिजों में इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, विमानन, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र सहित एक विस्तृत श्रृंखला है।

गोर ने कहा कि भारत का साथ आना पैक्स सिलिका को ताकत देगा।  उन्होंने कहा, ‘शांति इस उम्मीद से नहीं आती है कि विरोधी निष्पक्ष खेलेंगे। शांति ताकत के जरिए आती है। भारत इसे समझता है।’

हेलबर्ग ने कहा कि बहुत लंबे समय से हमने अपनी आर्थिक सुरक्षा की नींव को जैसा है, वैसा ही चलने दिया है। हम एक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जूझ रहे हैं जो बड़े पैमाने पर एक जगह केंद्रित है।’ हम इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के हामी नहीं है और न ही धमकाने वाली रणनीति के शिकार होंगे। हमारा स्पष्ट मानना है कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।

गोर ने कहा कि पैक्स-सिलिका में भारत की एंट्री सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। यह रणनीतिक और बहुत जरूरी है। भारत एक ऐसा देश है, जिसमें प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यह चुनौतियों को टक्कर देने वाली ताकत है।

(साथ में एजेंसियां)

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First Published - February 20, 2026 | 10:45 PM IST

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