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NSE का बड़ा धमाका: अब नैनोसेकंड में होंगे ट्रेड, 1000 गुना बढ़ जाएगी ट्रेडिंग की रफ्तार

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फिलहाल NSE का रिस्पॉन्स टाइम लगभग 100 माइक्रोसेकंड है, जिसकी बदौलत यह एक सेकंड में 50 से 60 लाख ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर पाता है

Last Updated- February 21, 2026 | 8:19 PM IST
NSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ट्रेडिंग की दुनिया में एक बड़ा धमाका करने जा रहा है। NSE के MD और CEO आशीष कुमार चौहान शनिवार को ऐलान किया कि 11 अप्रैल से एक्सचेंज का सिस्टम रिस्पॉन्स टाइम नैनोसेकंड लेवल पर पहुंच जाएगा। फिलहाल NSE का रिस्पॉन्स टाइम लगभग 100 माइक्रोसेकंड है, जिसकी बदौलत यह एक सेकंड में 50 से 60 लाख ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर पाता है। लेकिन नया अपग्रेड आने के बाद यह क्षमता बढ़कर करीब 100 मिलियन यानी 10 करोड़ ट्रांजेक्शन प्रति सेकंड हो जाएगी।

चौहान ने कहा, “हम आपको नैनोसेकंड में रिस्पॉन्स देंगे। आपकी स्पीड मौजूदा से लगभग 1000 गुना तेज हो जाएगी। हम अब असली रियल-टाइम फाइनेंस की तरफ बढ़ रहे हैं।” चौहान एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) के एक इवेंट में बोल रहे थे।

बता दें कि एक सेकंड में 10 लाख माइक्रोसेकंड होते हैं, जबकि एक नैनोसेकंड सेकंड का सिर्फ अरबवां हिस्सा होता है। इतनी बारीक स्पीड से ऑर्डर मैचिंग और एक्जीक्यूशन में देरी लगभग खत्म हो जाएगी।

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ट्रेडिंग कैपेसिटी में जबरदस्त उछाल

बाजार में ट्रेडिंग का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अलग-अलग सेगमेंट में एक्टिविटी तेज होने से NSE को ज्यादा वॉल्यूम संभालने की जरूरत पड़ रही है। यह अपग्रेड लेटेंसी को बहुत कम करके एक्सचेंज को भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम आसानी से मैनेज करने में मदद करेगा। ट्रेडर्स को तेज एक्जीक्यूशन मिलेगा, जिससे बाजार में और ज्यादा गतिविधि देखने को मिल सकती है।

हालांकि चौहान ने एक अहम बात भी कही। इतनी हाई स्पीड के साथ साइबर रिस्क भी बहुत बढ़ जाता है। उन्होंने ब्रोकर्स और टेक्नोलॉजी वेंडर्स को चेतावनी दी कि साइबर सिक्योरिटी को सबसे पहले प्राथमिकता दें। चौहान ने कहा, “हमारा स्केल इतना बड़ा है कि लोग समझ भी नहीं पाते। लेकिन अगर साइबर सिक्योरिटी पर ध्यान नहीं दिया तो सब कुछ एकदम ठप हो सकता है। सभी को इसे सबसे जरूरी मानना होगा।”

गौरतलब है कि NSE इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर रहा है। अभी कोलोकेशन में 2000 से ज्यादा रैक्स हैं, जिन्हें बढ़ाकर 4500 तक ले जाने की क्षमता है। कोलोकेशन की वजह से ट्रेडिंग मेंबर्स अपने सर्वर एक्सचेंज के डेटा सेंटर में रख पाते हैं, जिससे मार्केट डेटा और ऑर्डर में देरी न्यूनतम रहती है। हाई-फ्रीक्वेंसी और बड़े निवेशक इसी का फायदा उठाते हैं।

चौहान ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वेंडर्स सस्ते और कारगर सॉल्यूशंस बना सकते हैं। साथ ही, NSE नए प्रोडक्ट्स ला रहा है। बिजली फ्यूचर्स और गोल्ड फ्यूचर्स शुरू हो रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस (CFD) पर भी काम चल रहा है। 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स को सेबी से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही ट्रेडिंग शुरू होगी।

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First Published - February 21, 2026 | 8:18 PM IST

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