Ola Electric Share Price: इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। एक महीने में 17 प्रतिशत से ज्यादा गिरने के बाद शेयर शुक्रवार के कारोबार में 5 प्रतिशत फिर गया। कंपनी के शेयरों में यह ताजा गिरावट शोरूम की संख्या कम करने के चलते आई है।
ओला इलेक्ट्रिक कथित तौर पर घटती मांग और गिरते बाजार हिस्सेदारी के मद्देनजर अपने रिटेल स्टोर्स की संख्या में एक और बड़ा बदलाव करने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य मार्च के अंत तक अपने स्टोर नेटवर्क को लगभग 550 आउटलेट तक सीमित करना है।
यह कटौती की योजना ऐसे समय में आई है, जब भाविश अग्रवाल की कंपनी ने पहले देशभर में अपना ऑफलाइन नेटवर्क बढ़ाकर करीब 4,000 आउटलेट तक कर लिया था। कंपनी ने अपनी हाल की तिमाही रिपोर्ट में बताया कि वह अपनी नई रणनीति के तहत पहले ही काम कर रहे स्टोर्स की संख्या घटाकर करीब 700 कर चुकी है।
एमके ग्लोबल का कहना है कि ओला इलेक्ट्रिक का तीसरी तिमाही का प्रदर्शन कमजोर रहा। हालांकि, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का लंबी अवधि का थीम अभी भी मजबूत है। ब्रोकरेज के मुताबिक, इलेक्ट्रिक दोपहिया उद्योग में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। हाल ही में जीएसटी में कटौती के कारण जो गिरावट आई थी, उसके बाद बाजार में फिर से सुधार और मांग बढ़ रही है। लेकिन ओला के मामले में तस्वीर अलग है। कंपनी की बिक्री लगातार घटकर तीसरी तिमाही में करीब 32,000 यूनिट रह गई। साथ ही, कंपनी का बाजार हिस्सेदारी भी कम हुई है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक अब कर्ज वाली स्थिति में आ गई है। वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों तक कंपनी पर करीब 670 करोड़ रुपये का नेट कर्ज हो गया है। जबकि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी के पास करीब 160 करोड़ रुपये का नेट कैश था।
ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी के लिए पॉजिटिव बात यह हो सकती है कि अगर ओला अपने बैटरी बिजनेस में किसी रणनीतिक निवेशक को हिस्सेदारी बेचती है, तो कंपनी को अच्छा-खासा कैश मिल सकता है।
एमके ग्लोबल ने ओला इलेक्ट्रिक पर अपनी रेटिंग को डाउनग्रेड कर ‘Sell’ कर दिया है। साथ ही स्टॉक पर अपने टारगेट प्राइस 60 प्रतिशत घटाकर 20 रुपये कर दिया है। जबकि पहले यह 50 रुपये था। इस तरह, शेयर 30 रुपये के मौजूदा लेवल से अभी 33 प्रतिशत और गिर सकता है।
हाल ही में गोवा में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंपनी के सीईओ भाविश अग्रवाल के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी। यह वारंट दक्षिण गोवा की जिला उपभोक्ता आयोग ने जारी किया था। नोटिस मिलने के बावजूद कंपनी के सीईओ आयोग के सामने पेश नहीं हुए थे।
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प्रीतेश चंद्रकांत घाडी ने ओला एस1 प्रो सेकेंड जनरेशन स्कूटर में आई दिक्कतों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि मरम्मत के बाद भी समस्या बनी रही। शिकायतकर्ता ने 1.47 लाख रुपये की वापसी और 50,000 रुपये मानसिक परेशानियों और उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग की थी।
कंपनी के नतीजे बताते हैं कि उसे इस समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 31 दिसंबर 2025 को खत्म तिमाही में कंपनी को 487 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में घाटा 564 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी की कामकाज से होने वाली कमाई साल-दर-साल आधार पर 55 फीसदी घटकर 470 करोड़ रुपये रह गई। इस तिमाही में कंपनी ने 32,680 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे। यह पिछले साल के मुकाबले 61 फीसदी कम है।
वाहन पोर्टल के रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट आई है। जनवरी में कंपनी की हिस्सेदारी घटकर करीब 6.3 फीसदी रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 26 फीसदी थी। फरवरी के पहले 18 दिनों में कंपनी की बिक्री और गिरकर 2,575 यूनिट रह गई, जिससे हिस्सेदारी घटकर करीब 4.2 फीसदी रह गई।
ओला इलेक्ट्रिक कभी इस बाजार की सबसे बड़ी कंपनी थी, वह अब टीवीएस मोटर, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसी बड़ी कंपनियों के पीछे चली गई है। साथ ही एथर एनर्जी जैसी नई कंपनियां भी इसे कड़ी टक्कर दे रही हैं।