अगर आपका सपना अगले पांच साल में 15 से 20 लाख रुपये की शानदार SUV घर लाने का है, तो सिर्फ सपना देखने से काम नहीं चलेगा। आपको अभी से प्लानिंग और निवेश शुरू करना होगा। सही रणनीति के साथ SIP आपके इस टारगेट को हकीकत में बदल सकती है। SUV खरीदने से पहले सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या आप पूरी रकम एकमुश्त देना चाहते हैं या लोन लेकर सिर्फ डाउन पेमेंट का इंतजाम करना चाहते हैं। इसी फैसले पर आपकी SIP की राशि तय होगी।
अगर आप एक बार में ही पूरा कैश देकर SUV घर लाना चाहते है, तो पांच साल बाद आपको 20 लाख रुपये का फंड चाहिए। अगर आप SIP के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं और औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न मानते हैं तो आपको मंथली 25,000 रुपये की SIP करनी होगी। आइए इसे कैलकुलेशन से समझते हैं…
20 लाख रुपये का लक्ष्य
सालाना रिटर्न- 12%
समय- 5 साल
SIP की राशि- 25,000
5 साल बाद SIP की वैल्यू- ₹20,27,590
15 लाख रुपये का लक्ष्य
सालाना रिटर्न- 12%
समय- 5 साल
SIP की राशि- 19,000
5 साल बाद SIP की वैल्यू- ₹15,40,969
यह अनुमान बाजार के औसत रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
अगर आप पूरी रकम कैश में नहीं देना चाहते और 40 से 50 फीसदी डाउन पेमेंट के साथ लोन लेने का सोच रहे हैं, तो आपका टारगेट काफी छोटा हो जाएगा।
मान लीजिए 20 लाख की SUV के लिए आपको 10 लाख रुपये डाउन पेमेंट के रूप में जुटाने हैं। इसके लिए आपको हर महीने करीब 13,000 रुपये की SIP करनी होगी। आइए इसे कैलकुलेशन से समझते हैं…
10 लाख रुपये का लक्ष्य
सालाना रिटर्न- 12%
समय- 5 साल
SIP की राशि- 13,000
5 साल बाद SIP की वैल्यू- ₹10,54,347
इस तरह निवेश का बोझ भी हल्का रहेगा और कार का सपना भी पूरा हो सकता है।
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SIP लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम कहते हैं कि इसका सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज का मिलना) है। समय के साथ यह फंड को धीरे-धीरे बड़ा बनाता है। लंबे समय तक SIP करने से आप बाजार की उठापटक का फायदा उठा सकते हैं। इससे निवेश की लागत भी औसतन कम हो जाती है। इसमें एक साथ बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं होती।
उनका कहना है, आप हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम लगाकर धीरे-धीरे बड़ा फंड बना सकते हैं। यह तरीका कम जोखिम वाला भी है। हालांकि, यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी फंड की पिछली परफॉर्मेंस उसके भविष्य के परफॉर्मेंस की गारंटी नहीं होता है। इसलिए निवेशकों को रिस्क उठाने की क्षमता के आधार पर फंड का चयन करना चाहिए।