बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAF), जो बाजार की स्थिति के अनुसार इक्विटी और डेट में निवेश को बदलते रहते हैं, उनमें पिछले डेढ़ साल में इक्विटी निवेश थोड़ा बढ़ा है। इसका मुख्य कारण इक्विटी के ‘प्राइस और टाइम करेक्शन’ से वैल्युएशन में आई कुछ राहत है। इस कैटेगरी का सबसे बड़ा फंड HDFC BAF है। फंड की फैक्टशीट डेटा के मुताबिक, जनवरी 2026 में इसके पोर्टफोलियो का 68 फीसदी हिस्सा इक्विटी में था। सितंबर 2024 में यह हिस्सा 50 फीसदी था। इसी अवधि में ज्यादातर अन्य फंडों ने भी अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाई है। फंड मैनेजरों का कहना है कि यह बढ़ोतरी वैल्यूएशन में नरमी आने की वजह से हुई है।
SBI म्युचुअल फंड के इन्वेस्टमेंट हेड दिनेश बालाचंद्रन ने कहा, “हम साल 2025 के दौरान शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन और कम होती कमाई को ध्यान में रख रहे थे। इसी वजह से हमने अपने एसेट अलोकेशन में संतुलित रुख अपनाया। पिछले कुछ तिमाहियों में कीमतों में गिरावट और बाजार में ठहराव के कारण वैल्यूएशन अब ज्यादा उचित स्तर पर आ गए हैं।”
हालांकि, बढ़ोतरी के बावजूद ज्यादातर योजनाओं में इक्विटी निवेश अभी भी संतुलित या सावधानी भरे स्तर पर है। जनवरी 2026 के अंत तक HDFC BAF को छोड़कर पांच सबसे बड़ी योजनाओं में नेट इक्विटी एक्सपोजर 60 फीसदी से कम था।
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इस कैटेगरी की दूसरी सबसे बड़ी स्कीम आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बीएएफ (ICICI Prudential BAF) में जनवरी में नेट इक्विटी एक्सपोजर 53 फीसदी था। सितंबर 2024 में यह 32 फीसदी था। एसबीआई बीएएफ (SBI BAF) में 48 फीसदी निवेश इक्विटी में था, जबकि कोटक बीएएफ (Kotak BAF) का नेट एक्सपोजर 58 फीसदी था।
हालांकि BAF अपने एसेट एलोकेशन तय करने के लिए अलग-अलग मॉडल अपनाते हैं, लेकिन ज्यादातर योजनाओं में इक्विटी एक्सपोजर काफी हद तक बाजार के वैल्यूएशन से जुड़ा होता है। आम तौर पर जब वैल्यूएशन बढ़ते हैं तो इक्विटी आवंटन घटाया जाता है और जब वैल्यूएशन कम होते हैं तो इसे बढ़ाया जाता है। नेट एक्सपोजर हर स्कीम की अपनी स्ट्रैटेजी भी दिखाता है– कुछ फंड मैनेजर सावधानी भरा रुख अपनाते हैं, जबकि कुछ आवंटन के मामले में अपेक्षाकृत ज्यादा आक्रामक होते हैं।
कुछ योजनाएं, जैसे Edelweiss BAF, बिल्कुल अलग स्ट्रैटेजी अपनाती हैं। यह योजना प्रोसाइक्लिकल मॉडल पर चलती है- यानी बाजार के चढ़ने पर इक्विटी निवेश बढ़ाया जाता है और बाजार कमजोर होने पर इसे घटाया जाता है। जनवरी में इस योजना का नेट इक्विटी एक्सपोजर 47 फीसदी था, जो सितंबर 2024 में 67 फीसदी था।
ब्लूमबर्ग डेटा के मुताबिक, फिलहाल इक्विटी वैल्यूएशन लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बने हुए हैं। 17 फरवरी तक, Nifty 50 का पिछले 12 महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 23.5 गुना है, जो इसके पांच साल के औसत 23.8 गुना के करीब है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का वैल्यूएशन इससे ज्यादा है। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इस समय क्रमशः 34.5 गुना और 29.6 गुना PE पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि इनका पांच साल का औसत क्रमशः 35.6 गुना और 27.5 गुना है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड ने अपने लेटेस्ट इक्विटी आउटलुक में कहा कि हाल की गिरावट के बाद भी बाजार का कुल वैल्यूएशन अभी तटस्थ स्तर पर बना हुआ है। भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ कहानी अब भी मजबूत दिखती है। लेकिन बीच-बीच में कुछ छोटी दिक्कतें आ सकती हैं। इसकी वजह भू-राजनीतिक और व्यापार तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के उतार-चढ़ाव वाले निवेश, वैश्विक बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन और अस्थिर आर्थिक हालात हो सकते हैं।