Export Promotion Mission: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने आज एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के तहत सात नई पहलों का शुभारंभ किया। जिनका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक बाजारों में सशक्त बनाना है। इन पहलों का लक्ष्य भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के तहत वित्तीय सुविधाओं और ‘निर्यात दिशा’ के तहत व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र सहयोग को एकीकृत एवं डिजिटल रूप से मॉनिटर किए गए ढांचे में लागू करता है।
यह मिशन वाणिज्य विभाग द्वारा MSME मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, एक्ज़िम बैंक, सीजीटीएमएसई, एनसीजीटीसी, विनियमित ऋण संस्थानों, विदेश स्थित भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग संगठनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है। 11 प्रस्तावित हस्तक्षेपों में से 10 अब लागू हो चुके हैं। पहले से लागू तीन पहलें मार्केट एक्सेस सपोर्ट, प्री- और पोस्ट-शिपमेंट निर्यात ऋण पर ब्याज सबवेंशन तथा कोलेटरल सपोर्ट भी जारी हैं।
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1. वैकल्पिक व्यापार साधनों (एक्सपोर्ट फैक्टरिंग) के लिए समर्थन: यह पहल एमएसएमई के लिए निर्यात फैक्टरिंग को सुलभ और किफायती कार्यशील पूंजी समाधान के रूप में बढ़ावा देती है। आरबीआई/आईएफएससीए द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से किए गए पात्र लेन-देन पर फैक्टरिंग लागत पर 2.75% ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा। प्रति एमएसएमई वार्षिक सहायता अधिकतम ₹50 लाख तक सीमित रहेगी। पारदर्शिता और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के लिए दावों की प्रक्रिया डिजिटल तंत्र के माध्यम से की जाएगी।
2. ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता: डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वाले निर्यातकों को समर्थन देने के लिए संरचित ऋण सुविधाएं शुरू की जा रही हैं, जिनमें ब्याज अनुदान और आंशिक क्रेडिट गारंटी शामिल होगी। डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट सुविधा के तहत प्रति निर्यातक ₹50 लाख तक सहायता उपलब्ध होगी, जिसमें 90% तक गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा। ओवरसीज इन्वेंट्री क्रेडिट सुविधा के अंतर्गत ₹5 करोड़ तक की सहायता दी जाएगी, जिसमें 75% तक गारंटी कवरेज होगी। साथ ही, पात्र आवेदकों को 2.75% का ब्याज अनुदान दिया जाएगा, जो प्रति आवेदक प्रति वर्ष अधिकतम ₹15 लाख की सीमा के अधीन होगा।
3. उभरते निर्यात अवसरों के लिए समर्थन: यह पहल निर्यातकों को नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाती है। इसके तहत साझा-जोखिम (शेयर्ड रिस्क) और विभिन्न क्रेडिट साधनों के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। इन संरचित व्यवस्थाओं का उद्देश्य निर्यातकों का विश्वास बढ़ाना और उनकी तरलता (लिक्विडिटी) प्रवाह को मजबूत करना है।
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1. ट्रेड रेगुलेशंस, एक्रिडिटेशन एवं अनुपालन सक्षमता (TRACE): TRACE का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन तथा अन्य अनुरूपता (कंफॉर्मिटी) आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता देना है। पात्र परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन व्यय पर पॉजिटिव लिस्ट के तहत 60% तथा प्रायोरिटी पॉजिटिव लिस्ट के तहत 75% तक आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। यह सहायता प्रति आईईसी (IEC) प्रति वर्ष अधिकतम ₹25 लाख की सीमा के अधीन होगी।
2. लॉजिस्टिक्स, विदेशी वेयरहाउसिंग एवं फुलफिलमेंट सुविधा (FLOW): FLOW योजना निर्यातकों को विदेशी वेयरहाउसिंग और फुलफिलमेंट अवसंरचना तक पहुंच उपलब्ध कराती है, जिसमें वैश्विक वितरण नेटवर्क से जुड़े ई-कॉमर्स निर्यात हब भी शामिल हैं। स्वीकृत परियोजना लागत का अधिकतम 30% तक सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी, जो निर्धारित सीमा और एमएसएमई भागीदारी मानकों के अधीन होगी।
3. फ्रेट एवं परिवहन के लिए लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (LIFT): LIFT योजना कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों के निर्यातकों को भौगोलिक चुनौतियों से राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। पात्र मालभाड़ा व्यय पर अधिकतम 30% तक आंशिक प्रतिपूर्ति दी जाएगी, जो प्रति आईईसी प्रति वित्तीय वर्ष ₹20 लाख की सीमा के अधीन होगी।
4. ट्रेड इंटेलिजेंस एवं सुगमता के लिए समेकित समर्थन (INSIGHT): INSIGHT योजना के तहत निर्यातकों की क्षमता निर्माण, ‘डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब्स’ पहल के अंतर्गत जिला एवं क्लस्टर स्तर पर सुगमता, तथा व्यापार इंटेलिजेंस प्रणालियों के विकास को प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजना लागत का अधिकतम 50% तक वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। वहीं, केंद्र एवं राज्य सरकार की संस्थाओं तथा विदेशों में भारतीय मिशनों से प्राप्त प्रस्तावों को अधिसूचित सीमा के अधीन 100% तक सहायता दी जा सकेगी।
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निर्यातक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत शुरू किए गए सात नए हस्तक्षेपों का स्वागत किया है। फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि यह मिशन उन मूलभूत बाधाओं को संबोधित करता है, जो एमएसएमई के निर्यात विस्तार में रुकावट बनती हैं जैसे उच्च ऋण लागत, विविध व्यापार वित्त तक सीमित पहुंच, अनुपालन बोझ, लॉजिस्टिक्स अक्षमताएं और सूचना की कमी। ‘निर्यात प्रोत्साहन’ और ‘निर्यात दिशा’ के तहत शुरू की गई नई पहलें पारंपरिक प्रोत्साहनों से आगे बढ़कर प्रणालीगत प्रतिस्पर्धा सुदृढ़ करने पर केंद्रित हैं।
उन्होंने कहा कि 2.75% ब्याज अनुदान के साथ निर्यात फैक्टरिंग जैसे वैकल्पिक व्यापार साधनों को समर्थन, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए संरचित ऋण सुविधाएं और विस्तारित गारंटी तंत्र कार्यशील पूंजी के दबाव को काफी हद तक कम करेंगे। सस्ती वित्तीय लागत और बेहतर नकदी प्रवाह चक्र एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, बड़े ऑर्डर स्वीकार करने और विदेशी खरीदारों के साथ विश्वसनीयता मजबूत करने में सक्षम बनाएंगे। साझा-जोखिम आधारित क्रेडिट तंत्र नए निर्यातकों को प्रोत्साहित करेगा तथा उत्पाद और बाजार विविधीकरण को बढ़ावा देगा।