देश में ज्यादातर वेंचर कैपिटल (वीसी) निवेशक जोखिम से काफी ज्यादा बचने वाले हो गए हैं और वे बड़े नवाचार का समर्थन करने के बजाय लघु अवधि के राजस्व और तुरंत नकदी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने आज यह जानकारी दी।
चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर भारतीय वीसी समुदाय जोखिम से काफी ज्यादा बचता है। वे हर बातचीत को इस बात में तब्दील कर देते हैं कि आपकी राजस्व योजना क्या है? आप दो से तीन साल में तरलता या लाभ में कैसे हो सकते हैं? खैर, आपको भविष्य में निवेश करना होगा। अगर आप बड़े जोखिम नहीं लेंगे, तो आप बड़े नवाचार नहीं कर पाएंगे।’
खोसला ने कहा कि अगर कोई वीसी फर्म निवेश करने से पहले आंतरिक रेट ऑफ रिटर्न (आईआरआर) की गणना करती है, तो वह गलत रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि पिछले 200 निवेशों में मैंने कभी आईआरआर की गणना नहीं की। यह असल में गुमराह करने वाली बात है, ऐसे क्षेत्र में जहां आप नए बाजार में कुछ नया काम शुरू कर रहे हैं, जिसका शायद वजूद ही न हो। क्या जोमैटो या फ्लिपकार्ट तब थे, जब ये कंपनियां शुरू हुई थीं? क्या ट्विटर के पास तब बाजार था, जब उन्होंने शुरुआत की थी? अगर कोई वीसी आईआरआर कर रहा है, तो वह गलत रास्ते पर है।