facebookmetapixel
42% चढ़ सकता है महारत्न कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट; Q3 में ₹4011 करोड़ का हुआ मुनाफाईरान की ओर बढ़ रहा है ‘विशाल सैन्य बेड़ा’, ट्रंप ने तेहरान को फिर दी चेतावनीदुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के क्या हाल हैं? रिपोर्ट में बड़ा संकेत30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पार

Russian Oil: भारत में रूसी तेल का दबदबा; इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट

Russian Oil: इराक की हिस्सेदारी 25% से घटकर 20% हो गई है, सऊदी अरब की 18% से 15% हो गई है, यूएई की 8% से 6% हो गई है, और अमेरिका की 4% से 3.5% हो गई है।

Last Updated- April 09, 2024 | 4:02 PM IST
Crude Oil

यूक्रेन में रूस के एक्शन, G7 देशों के प्रतिबंधों और हाल ही में अपने तेल पर छूट कम करने के बावजूद, रूस 2023-24 में भारत के तेल आयात में सबसे आगे रहा है। ऊर्जा कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्सा के अनुसार, रूसी तेल अब भारत के कुल तेल आयात का 35% हिस्सा है, जो पिछले साल 23% से ज्यादा है। इस बीच, इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे अन्य प्रमुख सप्लायर की बाजार हिस्सेदारी में कमी देखी गई है।

घटी इराक, UAE, सऊदी अरब और अमेरिका की हिस्सेदारी

इराक की हिस्सेदारी 25% से घटकर 20% हो गई है, सऊदी अरब की 18% से 15% हो गई है, यूएई की 8% से 6% हो गई है, और अमेरिका की 4% से 3.5% हो गई है। इसी बीच रूस ने FY24 में अपनी तेल सप्लाई 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 1.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दी है।

वहीं, दूसरी तरफ इराक की सप्लाई 0.95 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 0.89 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गई है, और सऊदी अरब की सप्लाई 0.78 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर 0.69 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गई है।

Also Read: इजराइल-हमास संघर्ष के कारण पैदा हुआ मानवीय संकट अमानवीय है: भारत

शिपिंग में चुनौतियों के बावजूद, भारतीय रिफाइनर बड़ी छूट के कारण रूसी कच्चे तेल को प्राथमिकता दे रहे हैं। तेल उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, “जिस वजह से भारतीय बाज़ार में रूसी तेल का सिक्का चल रहा है उसकी वजह भारी छूट है। अन्यथा, भारतीय रिफाइनर रूस से क्यों खरीदेंगे? रूस से भारत तक तेल पहुंचाने में बहुत अधिक समय लगता है और लागत भी अधिक आती है।”

पहले के मुकाबले रूसी तेल पर छूट हुई कम

यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूसी तेल पर मिलने वाली छूट में काफी कमी आई है। पहले, रूसी क्रूड (यूराल) को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट के मुकाबले 30 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर बेचा जा रहा था। लेकिन अब यह छूट घटकर 2-3 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।

पिछले कुछ सालों में, भारतीय रिफाइनरों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोतरी की है। शुरुआत में, शिपिंग और बीमा की जटिलताओं से बचने के लिए यह रणनीति अपनाई गई थी। इस दौरान उन्हें प्रति बैरल 12-13 डॉलर की औसत छूट का लाभ भी मिल रहा था। हालांकि, समय के साथ, छूट में गिरावट देखी गई है।

कुछ ही महीनों में यह 5-7 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो गई, और हाल के महीनों में यह और भी घटकर 2-3 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसके बावजूद, भारतीय रिफाइनर रूसी तेल खरीदना जारी रखे हुए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि यह अन्य विकल्पों की तुलना में अभी भी यह सस्ता है।

First Published - April 9, 2024 | 4:02 PM IST

संबंधित पोस्ट