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अमेरिकी टैरिफ के 50% होने के बाद भारतीय खिलौना निर्यातकों पर बढ़ा दबाव, नए ऑर्डरों की थमी रफ्तार

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अप्रैल से अगस्त तक उत्सव, कार्निवल और मनोरंजन वाली चीजों का निर्यात 4 फीसदी बढ़कर 101.9 मिलियन डॉलर हो गया

Last Updated- November 15, 2025 | 6:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इस वित्त वर्ष की शुरुआत में भारतीय खिलौना निर्यात करने वालों को अच्छा कारोबार दिख रहा था। त्योहारों के लिए जल्दी शिपमेंट और अमेरिकी खरीदारों की एडवांस खरीदारी ने जोरदार शुरुआत दी। लेकिन अब नए ऑर्डर अचानक कम हो गए हैं। वजह है अमेरिका की तरफ से लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ। इससे अमेरिकी कस्टमर दूसरे देशों की तरफ मुड़ रहे हैं। भारतीय निर्यातक कीमतें घटाने और पैकेजिंग को सादा करने पर मजबूर हो गए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में ये बातें सामने आई हैं।

Also Read: अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का केस बढ़ा सकता है भारत की चिंता, व्यापार समझौते पर बड़ा खतरा

शुरुआती पांच महीनों में थोड़ी बढ़ोतरी

अप्रैल से अगस्त तक उत्सव, कार्निवल और मनोरंजन वाली चीजों का निर्यात 4 फीसदी बढ़कर 101.9 मिलियन डॉलर हो गया। कुल खिलौने, खेल और स्पोर्ट्स सामान का एक्सपोर्ट 8.9 फीसदी चढ़कर 302.6 मिलियन डॉलर पर पहुंचा। अमेरिका इन सामानों का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। अप्रैल-अगस्त में सिर्फ उत्सव और मनोरंजन आइटम्स का निर्यात 64.5 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले पूरे साल के 78 फीसदी के बराबर है।

फनस्कूल इंडिया के CEO केए शबीर बताते हैं कि अमेरिका के त्योहार सीजन के लिए शिपमेंट अप्रैल से शुरू होते हैं। इस बार खरीदारों ने चीन के खिलौनों पर ऊंचे टैरिफ की वजह से पहले ही ऑर्डर दे दिए। इससे पहले हाफ में अच्छा वॉल्यूम आया। लेकिन 1 अगस्त से भारत पर 25 फीसदी ड्यूटी लगी, फिर 27 अगस्त से इसे 50 फीसदी कर दिया गया। ये फैसला भारत के रूसी क्रूड खरीदने से जुड़ा था। इसके बाद नए ऑर्डर रुक-से गए। शबीर को उम्मीद है कि साल छोटे सिंगल डिजिट ग्रोथ के साथ खत्म होगा।

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के गवर्निंग बॉडी मेंबर अमिताभ खरबंदा कहते हैं कि अक्टूबर-नवंबर में आने वाले अगले त्योहार साइकिल के बुकिंग इस बार आधे रह गए। इंडस्ट्री वाले बताते हैं कि कॉस्ट बढ़ने से फीचर्स कम करने पड़ रहे हैं, खिलौनों का साइज छोटा किया जा रहा है और पैकेजिंग बेसिक हो गई है। दिल्ली का एक निर्यातक बोला कि कस्टमर ज्यादा डिस्काउंट मांग रहे हैं, वरना बिजनेस वियतनाम की तरफ चला जाएगा।

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First Published - November 15, 2025 | 6:48 PM IST

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