facebookmetapixel
Advertisement
इजराइल को जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी- ‘हर सुरक्षा चुनौती का समाधान लोगों को मारकर नहीं कर सकते’IT शेयरों में भारी बिकवाली, निफ्टी IT करीब 6% टूटा; इंफोसिस, TCS समेत सभी 10 शेयर लाल निशान मेंAccenture के कमजोर संकेत से TCS, Infosys और Wipro के निवेशकों को क्या समझना चाहिए?भारत-ब्रिटेन डील का बड़ा फायदा! भारतीय कंपनियों के बचेंगे 500 मिलियन पाउंड हर सालAI बदलेगा रियल एस्टेट का खेल! 7 साल में सेक्टर को मिलेगा 17 अरब डॉलर तक का बूस्टभारत के ब्यूटी मार्केट में बड़ा दांव, लॉरियल खरीदेगी इनोविस्ट में बहुलांश हिस्सेदारीRBI की सख्ती से थम सकती है बॉन्ड बाजार की रफ्तार, विशेषज्ञों ने जताई आशंकाStock Market Update: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट! सेंसेक्स 600 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे; Nifty IT तीन साल के निचले स्तर पर50 बड़ी कंपनियों के साथ भारत आ रही हैं जापान की प्रधानमंत्रीमोदी-ट्रंप मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को मिली नई रफ्तार

भारत-चीन संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर शांति जरूरी : जयशंकर

Advertisement

जयशंकर ने कहा कि पिछले चार वर्षों में हमारा ध्यान सबसे पहले सैनिकों को सीमा से हटाना है ताकि वे वापस उन सैन्य अड्डों पर चले जाएं, जहां से वे पारंपरिक रूप से काम करते हैं।

Last Updated- September 25, 2024 | 10:42 PM IST
Peace on the border is necessary for progress in India-China relations: Jaishankar भारत-चीन संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर शांति जरूरी : जयशंकर

भारत-चीन संबंधों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले सीमा पर शांति बहाल करने की आवश्यकता है। यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को यहां एशिया सोसायटी और एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का एक ‘कठिन इतिहास’ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो कि सीमा शांतिपूर्ण एवं स्थिर रहे।

उन्होंने ‘भारत, एशिया और विश्व’ विषयक कार्यक्रम में कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत-चीन संबंध एशिया के भविष्य के लिए अहम है। यदि दुनिया को बहु-ध्रुवीय बनाना है, तो एशिया को बहु-ध्रुवीय होना होगा। इसलिए यह रिश्ता न केवल एशिया के भविष्य, बल्कि संभवत: दुनिया के भविष्य पर भी असर डालेगा।’

उन्होंने कहा, ‘आपके पास दो ऐसे देश हैं जो आपस में पड़ोसी हैं, वे इस दृष्टि से अनोखे हैं कि वे एक अरब से अधिक आबादी वाले भी हैं, दोनों वैश्विक व्यवस्था में उभर रहे हैं और उनकी साझा सीमा भी है। इसलिए यह बहुत जटिल मुद्दा है। मुझे लगता है कि अगर आप आज वैश्विक राजनीति में देखें तो भारत और चीन का समानांतर विकास बहुत-बहुत अनोखी समस्या है।’

जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ सैनिकों की वापसी की लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं को सुलझा लिया गया है। विदेश मंत्री ने कहा, ‘जब मैं कहता हूं कि इसमें से 75 प्रतिशत समस्याओं को सुलझा लिया गया है तो यह केवल सैनिकों के पीछे हटने के संबंध में है। इसलिए यह समस्या का एक हिस्सा है। अभी मुख्य मुद्दा गश्त का है। आप जानते हैं कि हम दोनों कैसे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त लगाते हैं।’

जयशंकर ने कहा कि 2020 के बाद गश्त की व्यवस्था बाधित हुई है और इसे हल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘भारत और चीन के बीच पूरे 3,500 किलोमीटर का सीमा विवाद है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सीमा शांतिपूर्ण हो ताकि रिश्ते में अन्य बातें आगे बढ़ सकें।’

जयशंकर ने कहा कि पिछले चार वर्षों में हमारा ध्यान सबसे पहले सैनिकों को सीमा से हटाना है ताकि वे वापस उन सैन्य अड्डों पर चले जाएं, जहां से वे पारंपरिक रूप से काम करते हैं।

Advertisement
First Published - September 25, 2024 | 10:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement