इस वर्ष विमान हादसे, आग और भगदड़ से लेकर बाढ़ व चक्रवात तक मानवीय चूक और जलवायु संकट से जुड़ी घटनाओं ने व्यवस्था की कमजोरियों, आधी-अधूरी तैयारियों की तरफ ध्यान खींचा।
एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ने अहमदाबाद से 12 जून को लंदन के लिए उड़ान भरी, लेकिन कुछ सेकंड बाद ही यह विमान एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास की इमारत पर आ गिरा। इस दुर्घटना में विमान में सवार 241 यात्री और चालक दल के सदस्यों समेत 260 लोग मारे गए। एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। छह महीने बाद भी दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
यह एक और वर्ष था जब जहरीली हवा से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली बेदम सी हो गई। जैसे ही सर्दियां शुरू हुईं, दिल्ली की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई और एक्यूआई पहले 300, फिर 400 और उससे ऊपर पहुंच गया। हर साल की तरह, ग्रैप के तहत निर्माण गतिविधियों और कुछ वाहनों पर पाबंदियां लागू की गईं। सरकार ने बारिश कराने के लिए क्लाउड सीडिंग का भी प्रयास किया। मुंबई में भी वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी गई।
गोवा के नाइट क्लब बर्च बाय रोमियो लेन में 6 दिसंबर को उस समय भीषण आग लग गई जब लोग मस्ती में सराबोर होकर नाच-गा रहे थे। इस दुर्घटना में 25 लोग मारे गए।
26 नवंबर को हॉन्ग कॉन्ग के ताई पो जिले में आठ इमारतों वाले आवासीय परिसर में भीषण आग लग गई, जिसमें 160 से अधिक लोग मारे गए। कहा जाता है कि सभी आठ ब्लॉकों में आग के अलार्म विफल हो गए क्योंकि धुएं ने सभी टावरों को घेर लिया था।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से उठा चक्रवात ‘दित्वा’ 26 नवंबर को श्रीलंका तट से टकराया। इससे 640 लोग मारे गए तथा हजारों विस्थापित हो गए। इससे तमिलनाडु में भी चार लोगों की जान चली गई। भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत मदद के तौर पर श्रीलंका के लिए 45 करोड़ डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का ऐलान किया।
28 मार्च को 7.7-तीव्रता वाला शक्तिशाली भूकंप मध्य म्यांमार में आया, जिसमें 3,700 लोग मारे गए। अफगानिस्तान में अगस्त में 6.0 तीव्रता के भूकंप में 2,200 लोगों की जान गई। बीते नवंबर माह में ढाका के पास 5.4 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 10 लोग मारे गए।
दुबई में 21 नवंबर को एयरशो के दौरान भारतीय वायु सेना का तेजस लड़ाकू जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई। इससे पहले 12 मार्च, 2024 को सेना के तीनों अंगों के संयुक्त युद्धाभ्यास, भारत शक्ति से लौटते समय जैसलमेर में तेजस दुर्घटना का शिकार हो गया था।
इथियोपिया में हेली गुब्बी ज्वालामुखी लगभग 12,000 वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद इस वर्ष 24 नवंबर को फट गया। इसकी राख और गैसें 14 किलोमीटर तक वायुमंडल में फैल गईं और यमन, ओमान के ऊपर लाल सागर को पार करते हुए दिल्ली तक आ पहुंचीं। इससे विमान संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ और अनेक उड़ानें रद्द की गईं।
जून से ही लगातार बारिश के कारण असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और केरल आदि में बाढ़ और भूस्खलन हुआ, जिससे कई मौतें हुईं और व्यापक स्तर पर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। अगस्त में उत्तराखंड में पर्यटन के केंद्र गांव धराली में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन में चार लोगों की जान चली गई और कई लापता हो गए।
बेंगलूरु में 4 जून को आईपीएल में आरसीबी की पहली खिताबी जीत का जश्न मनाने जुटे प्रशंसकों में भगदड़ से 11 लोगों की मृत्यु हुई। 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय की रैली में 41 लोग कुचलकर मारे गए।
इस वर्ष भगदड़ की चार भयावह घटनाएं हुईं। सबसे पहले प्रयागराज में 29 जनवरी को महा कुंभ मेले में भगदड़ से 30 लोगों की मौत हो गई। 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी 18 जानें चली गई।
साल शुरू होते ही लॉस एंजलिस महानगर क्षेत्र के जंगलों में आग भड़क गई। इससे बड़ी संख्या में इमारतें जल गईं और दर्जनों लोगों की मृत्यु हो गई। तेज हवाओं और शुष्क परिस्थितियों से फैली इस आग पर बड़ी मशक्कत से 31 जनवरी को काबू पाया गया, लेकिन इससे पहले इसने अनेक घरों और वाणिज्यिक परिसरों को खाक में तब्दील कर दिया।