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बाघ, पक्षी और जंगल सफारी: धार्मिक स्थलों से आगे बढ़ा पर्यटन, उत्तर प्रदेश के जंगल भी बने सैलानियों की पसंद

जंगल सफारी, वन्य जीव अभयारण्यों और ईको टूरिज्म सुविधाओं के विस्तार के चलते उत्तर प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है

Last Updated- December 29, 2025 | 10:06 PM IST
Uttar Pradesh eco tourism
फोटो क्रेडिट: Uttar Pradesh eco tourism

धार्मिक स्थलों के अलावा उत्तर प्रदेश के जंगल भी देसी और विदेशी पर्यटकों को लुभा रहे हैं। लोगों में जंगलों की सैर करने का चाव इस कदर बढ़ा है कि बीते चार सालों में ही राज्य में वन्य जीव अभयारण्यों में आने वालों की तादाद तीन गुना तक बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह कहना है कि यहां का प्राकृतिक सौदर्य लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। ईको टूरिज्म बढ़ाने के लिए यहां खाने-पीने, ठहरने और आवाजाही की सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

बीते कुछ सालों के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि ईको टूरिज्म के लिए लोगों की ललक बढ़ती जा रही है। प्रदेश के सबसे पुराने दुधवा टाइगर रिजर्व में साल 2021-22 में नवंबर से जून तक 23,000 से ज्यादा पर्यटक आए थे। यह संख्या 2024-25 में बढ़कर 64,000 के पार पहुंच चुकी है। इस साल यह संख्या और बढ़ कर एक लाख तक पहुंच जाने का अनुमान है। प्रदेश में जंगलों के लिए पर्यटकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए योगी सरकार ने इस क्षेत्र को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से ईको टूरिज्म विकास बोर्ड का गठन किया है।

उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने विद्यार्थियों और युवाओं को प्रकृति और पर्यटन से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं। बोर्ड ने ईजमाईट्रिप के साथ समझौता कर उन्नाव के नवाबगंज पक्षी विहार और कन्नौज के लाख बहोसी पक्षी विहार जैसे स्थलों पर विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक भ्रमण की शुरुआत की है। छात्रों को विस्टाडोम कोच में दुधवा से कतर्नियाघाट तक जंगल सफारी करवाई जा रही है। इससे भी लोगों की जंगलों और वन्य जीवों में रुचि बढ़ी है और इको टूरिज्म का विकास हुआ है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि ईको बोर्ड ने 11 स्थलों की पहचान की है, जिन्हें जैव विविधता वाले विशेष क्षेत्रों के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके तहत अयोध्या में फ्लोटिंग रेस्तरां और उथेला झील, बलिया में नेरितार गांव-सुरहा ताल बर्ड सेचुरी, बाराबंकी की बगहर झील, सीतापुर की अजयपुर झील, कुशीनगर का सोहरौना ताल, चित्रकूट की रामनगर झील एवं महफा किला, जालौन का पांच नदियों का संगम पचनदा, ललितपुर में ककरावल जलप्रपात, बांदा में कालिंजर किला और महाराजगंज के देवदह में ईको टूरिज्म के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सिंह ने कहा कि प्रदेश में वन्य पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। पर्यटन विभाग का पूरा ध्यान युवाओं पर है, ताकि वे पर्यटन से जुड़कर इसमें मौजूद तमाम अवसरों का लाभ उठा सकें और पर्यटन के विकास में योगदान दें। गौरतलब है कि उत्तर भारत में दुधवा नैशनल पार्क इकलौता ऐसा जंगल है, जहां गैंडा और बाघ दोनों एक साथ प्राकृतिक वास करते पाए जाते हैं। यहां चीता, गैंडा, हाथी,  हिरन, घड़ियाल जैसे तमाम जानवर पाए जाते हैं। पर्यटक इनके साथ-साथ अन्य वन्यजीव और प्रवासी व अप्रवासी पक्षियों को देख सकते हैं।

बोर्ड ने ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से टूर ऑपरेटरों और पर्यटन व्यवसायियों को उत्तर प्रदेश की फैन ट्रिप भी करवाई है। यहां सबसे ज्यादा बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दिख रहे हैं। प्रदेश का इकलौता बीच पीलीभीत के चूका में है जहां पर्यटकों के लिए तमाम सुविधाओं का विकास किया गया है।

First Published - December 29, 2025 | 10:06 PM IST

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