facebookmetapixel
चांदी की ऐतिहासिक छलांग: 10 दिन में 1 लाख की बढ़त के साथ 4 लाख रुपये के पार पहुंचा भावडॉलर के मुकाबले रुपया 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, वैश्विक अस्थिरता ने बढ़ाया मुद्रा पर दबावमुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन का विश्वास: हर दिन असंभव को संभव कर दिखाएंगे भारतीयइंडियन ऑयल की अफ्रीका और यूरोप के बाजारों में पेट्रोकेमिकल निर्यात बढ़ाने की तैयारी: CMD एएस साहनीUP Budget 2026: 11 फरवरी को आएगा उत्तर प्रदेश का बजट, विकास और जनकल्याण पर रहेगा फोकसEconomic Survey 2026: वै​श्विक खींचतान से निपटने के लिए स्वदेशी पर जोरसुप्रीम कोर्ट ने ट्रेड यूनियनों को फटकारा, औद्योगिक विकास में रुकावट के लिए जिम्मेदार ठहरायाEconomic Survey में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर जोर: लाइव कॉन्सर्ट और रचनात्मकता से चमकेगी देश की GDPबारामती विमान दुर्घटना: जांच जारी, ब्लैक बॉक्स बरामद; DGCA सतर्कविदेशों में पढ़ रहे 18 लाख भारतीय छात्र, प्रतिभा पलायन रोकने के लिए बड़े सुधारों की जरूरत: Economic Survey

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण में आधार कार्ड भी होगा मान्य

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण में आधार कार्ड को मान्य किया और मतदाताओं को ऑनलाइन आवेदन से नाम जोड़ने की सुविधा देने का निर्देश चुनाव आयोग को दिया।

Last Updated- August 22, 2025 | 10:45 PM IST
supreme court of india
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को बिहार में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के दौरान दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए आधार कार्ड को भी स्वीकार करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यह पूरी प्रक्रिया ‘मतदाताओं के अनुकूल’ होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले, जिन लोगों के नाम मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, वे अब मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी जमा कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें प्रत्यक्ष रूप से फॉर्म जमा करने की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जयमाल्या बागची के पीठ ने कहा, ‘हम बिहार एसआईआर के लिए हटाए गए मतदाताओं के ऑनलाइन आवेदन को आधार कार्ड या किसी अन्य मान्य दस्तावेज के साथ स्वीकार करने की अनुमति देंगे।’ शुरुआत में, निर्वाचन आयोग की 11 मान्य दस्तावेजों की सूची में, पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड शामिल नहीं था।

सुनवाई के दौरान, निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि इस संशोधन में 85,000 नए मतदाता जोड़े गए हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के बूथ स्तर एजेंटों (बीएलए) ने केवल दो आपत्ति की है। इस पर, अदालत ने उन मतदाताओं की मदद करने में राजनीतिक दलों की सीमित भूमिका पर हैरानी जताई, जिनके नाम हटा दिए गए थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि राजनीतिक दल कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके लिए राजनीतिक कार्यकर्ता सबसे बेहतर हैं। आखिर आम जनता और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता के बीच इतनी दूरी क्यों है?’

इसके बाद, अदालत ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे अपने बूथ स्तर के एजेंट को निर्देश दें कि वे मतदाताओं को उनके दावे और आपत्तियां दर्ज कराने में मदद दें और साथ ही मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन दाखिल करने में मदद करें। न्यायमूर्ति बागची ने निर्वाचन आयोग को यह सुझाव भी दिया कि ‘दावे और आपत्तियां’ दर्ज कराने की प्रक्रिया में अब आधार को एक जरूरी और प्रासंगिक दस्तावेज के रूप में शामिल करने का मतलब है कि सत्यापन के लिए अधिक समय की जरूरत होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी। अदालत, निर्वाचन आयोग के 24 जून के उस निर्देश के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रही है जिसमें बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया गया था।

इस निर्देश के अनुसार, जो मतदाता 2003 की मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके अलावा, दिसंबर 2004 के बाद पैदा हुए लोगों को अपने माता-पिता दोनों की नागरिकता के दस्तावेज भी देने होंगे और अगर किसी के अभिभावक विदेशी नागरिक हैं तब और भी अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत होगी। 

First Published - August 22, 2025 | 10:24 PM IST

संबंधित पोस्ट