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महाराष्ट्र सरकार ने प्याज पर 20% निर्यात शुल्क रद्द करने की मांग की, प्याज के थोक और खुदरा दाम में भारी अंतर

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर प्याज के निर्यात पर लगाए गए 20 प्रतिशत शुल्क को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

Last Updated- December 20, 2024 | 8:25 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट: PTI)

खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें लोगों को रुला रही हैं, वहीं दूसरी तरफ थोक मंडियों में प्याज के दाम किसानों को रुलाने लगे हैं। मंडियों में बंपर आवक होने के कारण थोक मंडियों में प्याज के दाम पिछले आठ दिनों में हजार रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा लुढ़क गए। परेशान किसान अपनी उपज मंडियों में बेचने से इंकार कर रहे हैं। जोरदार आवक और कीमतें लागत से भी स्तर पर पहुंचने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार से प्याज निर्यात पर लगाए गए 20 फीसदी शुल्क को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

नवी मुंबई के एपीएमसी में मुंबई कांदा बटाटा मार्केट में प्याज के दाम गिरकर 500 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया जबकि औसत दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। यहां एक सप्ताह पहले औसत दाम 2500 रुपये और अधिकतम 4500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में प्याज का न्यूनतम दाम 800 रुपये और अधिकतम 2700 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया जबकि औसत दाम 2000 रुपये क्विंटल बोला गया। जबकि एक सप्ताह पहले लासलगांव में प्याज का औसत दाम 3200 रुपये, अधिकतम 4600 और न्यूनतम दाम 1700 रुपये प्रति क्विंटल बोला जा रहा था ।

नाराज किसानों ने रोकी निलामी

उचित दाम न मिलने से नाराज किसानों ने लासलगांव में प्याज की नीलामी रोक दी। किसानों की मांग है कि प्याज पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क हटाया जाए। साथ ही फसल पर 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल की मदद दी जाए। थोक बाजार में प्याज की कीमतों में लगातार गिरावट होने के बावजूद आम जनता को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। किसानों को उपज की जितनी कीमत मिल रही है, उससे दोगुनी-तिगुनी कीमत पर बाजार में उपभोक्ता कीमत चुका रहे हैं। मुंबई और आसपास के खुदरा बाजार में प्याज का भाव 50 से 60 रुपये किलो हैं, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ा हुआ है।

गौरतलब है कि नवंबर में मौसम की खराबी के चलते प्याज की कीमतें पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। बेहिसाब बारिश से खरीफ की फसल खराब होने और देरी से आने के कारण प्याज की कीमतें थोक में 60 रुपये किलो (6 हजार रुपये प्रति क्विंटल) के पार चली गई थीं।

सरकारी एजेंसी एगमार्क के आंकड़ों के मुताबिक 20 दिसंबर को महाराष्ट्र में प्याज का औसत दाम गिरकर 1717 रुपये और देशभर का औसत दाम 3160 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्र सरकार को पत्र लिख प्याज निर्यात पर लागू 20 फीसदी निर्यात शुल्क हटाने की मांग की है । उन्होंने कहा कि कम कीमतों के कारण नासिक के प्याज किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन ने भी कमाई पर असर डाला है।

पवार का गोयल को पत्र

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा प्याज निर्यात पर लगाए गए 20 प्रतिशत शुल्क को तत्काल रद्द करने की मांग की है। पवार ने पत्र में लिखा कि श्रीलंका सरकार ने प्याज पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत कम कर दिया है और अधिक प्याज आयात करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, इसलिए नासिक सहित राज्य के किसान अपने लाल प्याज को श्रीलंका सहित विदेशों में निर्यात कर सकते हैं , ताकि प्याज को अच्छी कीमत मिल सके। लागत के आधार पर कीमत, केंद्र सरकार को प्याज पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क तुरंत रद्द करने की जरूरत है।

पवार का कहना है कि राज्य में खासकर नासिक जिले में प्याज उत्पादक किसानों की संख्या बड़ी है। इन किसानों द्वारा विदेशों में बड़ी मात्रा में प्याज निर्यात किया जाता है। गर्मी का प्याज खत्म हो गया है और नया लाल प्याज बाजार में बिकने के लिए आ गया है। राज्य के किसानों ने प्राकृतिक आपदा से लड़ते हुए प्याज का उत्पादन किया है।

उन्होंने आगे कहा, “असामयिक बारिश और बदलते मौसम के कारण उनके प्याज को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। बाकी अच्छे प्याज को लागत के आधार पर अच्छी कीमत मिलनी जरूरी है, लेकिन बाजार भाव दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। फिलहाल राज्य में लाल प्याज की कीमत औसतन 2400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है। लाल प्याज टिकाऊ नहीं है, इसलिए किसानों और व्यापारियों को इसे तुरंत बेचना पड़ता है। इसलिए राज्य में किसानों को प्याज की अच्छी कीमत दिलाने के लिए, राज्य में उत्पादित लाल प्याज का अधिक से अधिक मात्रा में विदेशों में निर्यात करना आवश्यक है।”

First Published - December 20, 2024 | 8:25 PM IST

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