मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह तीसरी बार राज्य सभा में नहीं जाएंगे। सिंह का राज्य सभा का आगामी 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। राज्य सभा में यह उनका दूसरा कार्यकाल है।
सिंह ने मंगलवार को भोपाल में कहा कि वह राज्य सभा की सीट खाली करने जा रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि उनकी जगह कौन लेगा उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी को लेना है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सिंह आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश का दौरा करेंगे। उन्होंने इस विषय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि वह प्रदेश में पार्टी के कामों को वक्त देना चाहते हैं। प्रदेश विधानसभा चुनावों में अभी ढाई साल से अधिक वक्त बाकी है। उल्लेखनीय है कि सिंह ने 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले करीब छह महीने तक नर्मदा परिक्रमा की थी। 2018 के चुनावों के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी हुई थी हालांकि वह अधिक समय तक नहीं चली और ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के भाजपा में शामिल हो जाने के कारण मार्च 2020 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई थी। 2018 के चुनावों में कांग्रेस की जीत का श्रेय दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा यात्रा को भी दिया गया था।
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कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठनात्मक सुधारों को लेकर दिग्विजय पिछले महीने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रजेंटेशन दे चुके हैं। उस दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद थे।
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर ने इसे पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘जब भी कोई नेता पार्टी फोरम से बाहर इस तरह की बातें करता है तो यह समझ लेना चाहिए कि पार्टी के भीतर उसकी आवाज पहले की तरह नहीं सुनी जा रही है। कुछ समय पहले भाजपा की उमा भारती ने भी ऐसा ही किया था।’
कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की संगठनात्मक मजबूती पर एक टिप्पणी करके दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में हलचल मचा दी थी। उन्होंने एक तस्वीर ट्वीट कर लिखा था, ‘क्वोरा साइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयं सेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’
हालांकि बाद में बवाल होने पर उन्होंने सफाई में कहा था कि उनके विचार आरएसएस की संगठन क्षमता के बारे में थे उसकी विचारधारा के समर्थन में नहीं।