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Aadhaar, PAN या Voter ID से नहीं साबित होगी नागरिकता, जानें क्यों बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार, पैन, वोटर आईडी या पासपोर्ट केवल पहचान के लिए हैं, नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं।

Last Updated- August 13, 2025 | 3:18 PM IST
Aadhaar
Representative Image

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया कि केवल आधार, पैन, वोटर आईडी या पासपोर्ट होना भारतीय नागरिक होने का सबूत नहीं है। यह फैसला एक कथित बांग्लादेशी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करने के दौरान आया, जिस पर भारत में अवैध प्रवेश और नकली दस्तावेज बनाने का आरोप था।

मामला क्या था?

पुलिस ने बबू अब्दुल रफ सर्दार को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप थे:

  • भारत में अवैध प्रवेश
  • नकली भारतीय पहचान दस्तावेज रखने का आरोप
  • संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन

जांच के दौरान आरोपी के फोन से बांग्लादेशी जन्म प्रमाण पत्र बरामद हुए। जबकि आरोपी ने भारतीय होने का दावा किया और आधार, पैन और वोटर आईडी पेश किए, कोर्ट ने इन्हें पर्याप्त प्रमाण नहीं माना।

जस्टिस अमित बोर्कर ने कहा कि नागरिकता का दावा केवल नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत ही जांचा जा सकता है और नागरिकता साबित करने का जिम्मा व्यक्ति पर होता है। उन्होंने कहा, “यह मामला साधारण नहीं है। यह केवल बिना अनुमति भारत में रहने या वीज़ा की अवधि बढ़ाने का नहीं है। इसमें नकली दस्तावेजों का निर्माण और उपयोग कर भारतीय होने का दिखावा करना शामिल है।”

इंडियालॉ एलएलपी के राहुल सुन्दरम के अनुसार, हाईकोर्ट ने आरोपी की नियमित जमानत खारिज करते हुए कहा कि उसके फोन से बरामद बांग्लादेशी जन्म प्रमाण पत्र और कॉल रिकॉर्ड ने यह स्पष्ट किया कि नागरिकता साबित करना आरोपी की जिम्मेदारी है। जब तक वह प्रमाण नहीं देता, केवल आधार, पैन या वोटर आईडी होना पर्याप्त नहीं है।

बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश: पहचान और नागरिकता अलग – कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहचान और नागरिकता एक जैसे नहीं हैं। जस्टिस अमित बोरकर ने तीन अहम बातें बताईं:

पहचान ≠ नागरिकता

आधार, पैन, वोटर आईडी और पासपोर्ट केवल आपकी पहचान और सेवाओं के लिए हैं, ये आपकी नागरिकता साबित नहीं करते।

नागरिकता साबित करने का तरीका

भारतीय नागरिक होने के लिए आपको
1955 के सिटिजनशिप एक्ट के अनुसार प्रमाण दिखाना होगा, जैसे:

  • भारत में जन्म (निश्चित तारीख से पहले)
  • भारतीय माता-पिता से जन्म
  • कानून के तहत पंजीकरण या नेचुरलाइजेशन

अथिरा साजन, एसोसिएट पार्टनर, किंग स्टब एंड कसिवा ने कहा, “भारतीय कानून के तहत आधार, पैन या वोटर आईडी केवल पहचान या निवास को प्रमाणित करते हैं। नागरिकता साबित करने के लिए सिटिजनशिप एक्ट, 1955 और कानूनी दस्तावेज जरूरी हैं।”

नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी व्यक्ति पर

यदि कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता और राज्य यह मानता है कि उस पर विदेशी होने का शक है, तो ऐसे में जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है कि वह अपने भारतीय होने को प्रमाणित करे।

संबंधित कानून

  • नागरिकता अधिनियम, 1955 — बताता है कि नागरिकता कैसे प्राप्त होती है और इसे साबित करने के लिए कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं।
  • विदेशी अधिनियम, 1946 (धारा 9) — उस व्यक्ति पर बोझ डालता है कि यदि उसे विदेशी माना जाता है, तो वह अपनी भारतीय नागरिकता साबित करे।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम — वोटर आईडी जारी करने के नियम तय करता है, लेकिन यह नागरिकता की पुष्टि के लिए उतना सख्त नहीं है जितना कि नागरिकता अधिनियम के तहत होना चाहिए।

आपका आधार या वोटर आईडी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता

हाल ही में एक न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसी सामान्य पहचान दस्तावेज़ें नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

  • आधार कार्ड पहचान और निवास प्रमाण के लिए जारी किया जाता है, नागरिकता के लिए नहीं।
  • पैन कार्ड कर उद्देश्यों के लिए है और विदेशी नागरिक भी इसे ले सकते हैं।
  • वोटर आईडी मतदाता सूची से जुड़ा होता है, जिसमें गलतियाँ या धोखाधड़ी की संभावना हो सकती है।
  • पासपोर्ट कुछ नागरिकता जांच के बाद मिलता है, लेकिन इसे धोखाधड़ी से भी प्राप्त किया जा सकता है।

संक्षेप में, ये दस्तावेज़ रोज़मर्रा के कामकाज में पहचान के लिए मान्य हैं, लेकिन अदालत में नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

निर्णय के प्रभाव:

  • नागरिकता विवाद में कानूनी जांच: यदि आपकी नागरिकता पर सवाल उठता है, तो जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता के रिकॉर्ड या आधिकारिक नागरिकता प्रमाण पत्र जैसी दस्तावेज़ी साक्ष्य की आवश्यकता होगी।
  • सीमा और अप्रवासी मामलों में कड़ाई: यह निर्णय पुलिस और इमिग्रेशन अधिकारियों को संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जांच में अधिक सतर्क बनाएगा। गंभीर मामलों में भारतीय पहचान पत्र होने पर भी गारंटी नहीं होगी कि आरोपी को जमानत मिल जाएगी।

इस फैसले से सरकार के अधिकार को भी बल मिला है कि वह केवल प्रशासनिक पहचान दस्तावेज़ों पर निर्भर न होकर नागरिकता की पुष्टि कर सके।

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First Published - August 13, 2025 | 3:18 PM IST

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