भारत ने चीनी पेशेवरों के लिए व्यवसाय वीजा देने की प्रक्रिया तेज करने के लिए लालफीताशाही की अड़चनों को कम कर दिया है। एशिया के दोनों बड़े देशों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में यह बड़ा कदम है। इससे देश में तकनीशियनों की कमी दूर होगी, जिसके कारण कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान होता है।
मामले से वाकिफ अधिकारियों ने इस संबंध में रॉयटर्स को बताया कि भारत ने वीजा जांच प्रक्रिया को छोटा कर दिया है जिससे अब अनुमोदन समय एक महीना कम हो गया। अमेरिकी टैरिफ से उपजे हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ संबंधों को सावधानीपूर्वक दोबारा मजबूत कर रहे हैं।
परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसियों की सेनाओं के बीच 2020 में सीमा पर संघर्ष के बाद भारत ने चीनी यात्रियों के लिए वीजा जारी करना बंद कर दिया था। इससे गृह और विदेश मंत्रालयों को छोड़ बिजनेस वीजा की जांच का दायरा बढ़ गया था। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों में से एक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वीजा का मुद्दा अब पूरी तरह सुलझा लिया गया है। अधिकारी ने कहा, ‘हमने प्रशासनिक जांच को छोटा कर दिया है और अब चार सप्ताह के भीतर व्यवसाय वीजा मिल रहे हैं।’
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगाने के बाद भारत और चीन के साथ संबंधों में गर्मजोशी आई है। अमेरिकी शुल्क के कारण बने हालात में भारत ने अपने राजनयिक समीकरणों को दुरुस्त करना शुरू कर दिया था। इस कड़ी में न केवल चीन के साथ संबंधों में सुधार हुआ बल्कि रूस के साथ भी रिश्ते और बेहतर हुए हैं।