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ग्लोबल उठापटक के बीच घरेलू फंडामेंटल देंगे बाजार को सपोर्ट; शेयर, सोना-चांदी में कैसे बनाएं स्ट्रैटेजी?

PL वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत मीडियम से लॉन्ग टर्म में ग्लोबल बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है।

Last Updated- January 25, 2026 | 1:22 PM IST
stock market
Representational Image

Indian market outlook 2026: दुनियाभर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था ने दमदार फंडामेंटल्स के साथ नए साल में एंट्री की है। ग्लोबल बाजार धीमी ग्रोथ, नीतिगत अनि​​श्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव से जूझ रहे हैं। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का आउटलुक मजबूत बना हुआ है। PL कैपिटल की वेल्थ मैनेजमेंट इकाई PL वेल्थ ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘मार्केट आउटलुक- जनवरी 2026’ में कहा है कि आने वाले महीनों में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन भारत मीडियम से लॉन्ग टर्म में ग्लोबल बाजारों से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है। निवेशकों को निवेश बनाए रखने, चुनिंदा गुणवत्ता वाले एसेट्स में निवेश करने और बाजार की कमजोरी को अवसर के रूप में देखने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू विकास की ग्रोथ नियर टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार को स्थिरता देगी। नियर टर्म ग्रोथ को स्थिर खपत, कैपेक्स और मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट से सपोर्ट मिल रहा है।

रिपोर्ट का कहना है कि 2025 भारतीय शेयर बाजारों के लिए कंसॉलिडेशन का साल रहा। कई वर्षों की तेज बढ़त के बाद यह स्वाभाविक था। हालांकि ग्लोबल शेयर बाजारों ने अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न दिया। भारतीय बाजार थोड़ा कमजोर रहा क्योंकि वैल्यूएशन सामान्य हुए, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) नेट सेलर बने रहे और प्राथमिक बाजार (आईपीओ) में हलचल रही। पूरे साल FPI की निकासी जारी रही, जिसके चलते अमेरिका में हाई बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता रही। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों का इनफ्लो स्थिर बना रहा। SIP के जरिए लगातार निवेश ने बाजार को बड़े नुकसान से बचाए रखा।

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कैसी रहेगी ग्लोबल ग्रोथ

पीएल वेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 2026 में इकॉनमिक ग्रोथ मध्यम लेकिन असमान रहने की उम्मीद है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ रही है और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के कारण GDP ग्रोथ और कम हो सकती है। मेरिका में महंगाई घटकर करीब 3% आई है, लेकिन अभी भी लक्ष्य से ऊपर है। डरल रिजर्व की ब्याज दर फिलहाल 3.75-4.25% के दायरे में है और आगे के फैसले डेटा पर निर्भर होंगे।

यूरोप में GDP ग्रोथ 1.0-1.2% के आसपास रहने का अनुमान है। चीन की ग्रोथ 2025 में 4.7-4.8% तक धीमी हो सकती है। वहीं, जापान की मौद्रिक नीति में बदलाव वैश्विक जोखिम बना हुआ है।

कैसी रहेगी भारत की ग्रोथ

रिपोर्ट बताती है कि इन वैश्विक हालातों के बीच भारत की स्थिति कहीं अधिक मजबूत दिखाई देती है। FY26 में भारत की GDP ग्रोथ 6.5-6.8% रहने की उम्मीद है। कुछ ग्लोबल एजेंसियां इसे 7% से भी अधिक मान रही हैं। महंगाई में तेज गिरावट आई है और FY26 में औसत CPI 2.0-2.3% रहने का अनुमान है।

इस कम महंगाई के माहौल ने RBI को ग्रोथ ओरिएंटेड पॉलिसी अपनाने का अवसर दिया है। 2025 में RBI ने कुल मिलाकर करीब 125 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर कटौती की है और रेपो रेट अब 5.25% पर है। इसके साथ ही ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO), CRR कटौती और अन्य उपायों के जरिए ₹15.7 लाख करोड़ से अधिक की लि​क्विडिटी सिस्टम में डाली गई है।

शेयर बाजार का आउटलुक

भारतीय शेयर बाजार नियर टर्म में सीमित दायरे में रह सकते हैं। जनवरी 2026 में व्यापक तेजी के बजाय चुनिंदा शेयरों में अवसर मिलेंगे। बड़े शेयर, जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है और नकदी प्रवाह स्थिर है, अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

PL वेल्थ मैनेजमेंट के CEO इंदरबीर सिंह जॉली का कहना है कि भारत 2026 में मजबूत विकास, कम महंगाई और बेहतर कॉरपोरेट फंडामेंटल्स के साथ दस्तक दे रहा है। वैश्विक अनिश्चितता के चलते शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में भारत का निवेश मामला बेहद आकर्षक बना हुआ है।”

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किस सेक्टर में बनेंगे मौके?

पीएल वेल्थ ने अलग-अलग सेक्टर्स को लेकर अपना नजरिया बताया है। इसमें फाइनैंशयल सेक्टर, कैपिटल गुड्स, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हेल्थकेयर, आईटी में बेहतर निकवरी का आउटलुक दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनैंशयल सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी, एसेट क्वालिटी स्थिर है। कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल्स सेक्टर को सरकारी कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से लाभ मिल सकता है। ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में धीरे-धीरे डिमांड रिकवरी देखने का मिलेगी। हेल्थकेयर सेक्टर का आउटलुक स्टेबल और डिफेंसिव है। आईटी में चुनिंदा अवसर बन सकते हैं। वैश्विक मांग की रिकवरी धीमी रह सकती है।

फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी आउटलुक

फिक्स्ड इनकम (बॉन्ड) के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा माहौल कैरी-फ्रेंडली है। शॉर्ट टर्म यील्ड में काफी गिरावट आई है। एक साल की ट्रेजरी बिल पर यील्ड करीब 5.5% है। पांच साल की सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड लगभग 5.8% है। वहीं, लंबी अवधि की यील्ड अभी भी आकर्षक बनी हुई है। 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 6.58% है। 10 साल की स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL) पर यील्ड लगभग 7.39% है। इससे लगभग 70–75 बेसिस पॉइंट का स्प्रेड बनता है।

PL वेल्थ मैनेजमेंट का मानना है कि निवेशकों को बैलेंस्ड स्ट्रैटेजी अपनानी चाहिए, जिसमें हाई क्वॉलिटी वाले शॉर्ट से मीडियम अवधि के बॉन्ड से स्थिरता और नियमित आय और चुनिंदा लंबी अवधि के बॉन्ड में निवेश कर बेहतर यील्ड के अवसर शामिल हों। साथ ही, उतार-चढ़ाव और लिक्विडिटी जरूरतों को संभालने के लिए 7-12% कैश बफर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कमोडिटी पोर्टफोलियो में चुनिंदा रोल निभा सकती हैं। 2026 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में करीब 7% की गिरावट आ सकती है। यह रुझान मध्यम वैश्विक ग्रोथ और पर्याप्त सप्लाई के कारण जारी रह सकता है।

एनर्जी कीमतें औसतन 60-70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं। एग्री कमोडिटी पर अच्छी वैश्विक पैदावार के कारण दबाव बना रह सकता है। हालांकि, कीमती धातुएं अलग नजर आती हैं। 2025 में सोने की कीमतें 65% से अधिक बढ़कर करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस पहुंच गईं। 2026 में इनके 4,500-4,900 डॉलर के दायरे में मजबूत बने रहने की संभावना है। इसका कारण केंद्रीय बैंकों की खरीद, ETF में निवेश और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता है। वहीं, चांदी, जिसमें 2025 में 130% से ज्यादा की तेजी आई थी। 2026 में 80–100 डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकती है। इसे एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी इंड​स्ट्रियल डिमांड का सपोर्ट मिलेगा।

 

(डिस्क्लेमर: यहां निवेश संबंधी सलाह ब्रोकरेज हाउस की है। बाजार में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

First Published - January 25, 2026 | 1:22 PM IST

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