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SBI के नए चेयरमैन के सामने जमा में वृद्धि और विदेशी धन जुटाने की चुनौती

स्टेट बैंक की 30 जून तक सालाना आधार पर जमा में वृद्धि 8.18 प्रतिशत थी, जो ऋण में हुई 15.39 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में कम है।

Last Updated- August 27, 2024 | 11:38 PM IST
SBI

भारत की बैंकिंग व्यवस्था स्वस्थ और पर्याप्त पूंजीकृत है। साथ ही फंसा कर्ज नियंत्रण में है। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने तेज वृद्धि दर्ज की है, जिसका 2023-24 में शुद्ध मुनाफा 61,077 करोड़ रुपये रहा, जो इसके पहले के वित्त वर्ष में 50,232 करोड़ रुपये था। सकल और शुद्ध गैर निष्पादित अनुपात 2.21 प्रतिशत और 0.57 प्रतिशत है।

देश के सबसे बड़े बैंक के चेयरमैन का पदभार संभालने वाले चेल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी को अभी भी कुछ मसलों को लेकर चिंता करनी होगी। इसमें जमा में वृद्धि पहला मसला है। इसमें चालू व बचत खाते (कासा) में जमा की हिस्सेदारी बढ़ाना प्रमुख है, जिस पर कम लागत आती है।

स्टेट बैंक की 30 जून तक सालाना आधार पर जमा में वृद्धि 8.18 प्रतिशत थी, जो ऋण में हुई 15.39 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में कम है। कासा जमा का अनुपात निराशाजनक है, जो सालाना आधार पर महज 2.6 प्रतिशत बढ़ा है। सावधि जमा में वृद्धि 12.2 प्रतिशत थी।

इसके अलावा चालू खाते में जमा बढ़ाने की समस्या से निपनटना संभवतः नए चेयरमैन की प्राथमिकता होगी। चालू खाते के जमा में सालाना आधार पर जून तक 4.64 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं बचत खाते में जमा में वृद्धि 3.76 प्रतिशत थी।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसीडेंट- रिसर्च रिकिन शाह ने कहा,‘एसबीआई जमा बाजार में अपनी हिस्सेदारी पिछले 5 साल से 23 प्रतिशत बनाए रखने में सफल रहा है, वहीं कासा जमा की हिस्सेदारी 200 आधार अंक घटी है। कासा में चालू खाते के बाजार की हिस्सेदारी ज्यादा कम, करीब 310 आधार अंक घटी है।’

शाह ने कहा, ‘एसबीआई के लिए समस्या यह है कि वे अपने कारोबार में एसएमई को शामिल करने में सक्षम नहीं हैं, वहीं निजी क्षेत्र के बैंक अपना संबंध बढ़ाने में सक्षम हैं। ऐसे में निजी बैंकों की चालू खाते की हिस्सेदारी बढ़ रही है। आज की तारीख में कोई भी बड़ी या मझोली कंपनी अपना धन चालू खाते में नहीं छोड़ती। अगर उनके पास पर्याप्त पैसा होता है तो उसे चालू खाते में रखने के बजाय लिक्विड फंड में डालना पसंद करती हैं। ऐसे में बैंक को बेहतर समाधान पेश करने और एसएमई से संबंध गहरे करने की जरूरत है।’

इस समय ज्यादातर बैंकों पर जमा आकर्षित करने को लेकर दबाव है, क्योंकि ऋण की मांग तेज बनी हुई है। वहीं निवेशक बैंकों में धन जमा करने के बजाय शेयर बाजार में लगाना पसंद कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों के ऋण में वृद्धि दर 9 अगस्त तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 13.6 प्रतिशत थी, वहीं जमा में वृद्धि 10.9 प्रतिशत रही।

विदेश से धन जुटाना एसबीआई के लिए ज्यादा बड़ी चुनौती है। एसबीआई कुछ उन भारतीय कर्जदाताओं में है, जिसकी विदेश में बड़े पैमाने पर मौजूदगी है। एसबीआई के विदेश स्थित कार्यालयों से दिया गया ऋण 30 जून तक 5.53 लाख करोड़ रुपये था, जबकि जमा सिर्फ 1.98 लाख करोड़ रुपये आया है। विदेशी शाखाओं के ऋण में 14.41 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि जमा वृद्धि 10.48 प्रतिशत थी। विदेश स्थित शाखाओं के परिचालन में ऋण जमा अनुपात करीब 280 प्रतिशत था।

First Published - August 27, 2024 | 10:52 PM IST

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