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रीपो दर 3 साल के निचले स्तर पर, RBI गवर्नर ने बैंकों को मध्यवर्ती लागत कम करने का दिया निर्देश

उन्होंने फरवरी से अब तक नीतिगत दर में की गई 125 आधार अंकों की कटौती का हवाला देते हुए मध्यवर्ती लागत को कम करने के लिए कहा

Last Updated- December 09, 2025 | 10:57 PM IST
Sanjay Malhotra, Governor, Reserve Bank of India
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के मुख्य कार्या​धिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने फरवरी से अब तक नीतिगत दर में की गई 125 आधार अंकों की कटौती का हवाला देते हुए मध्यवर्ती लागत को कम करने के लिए कहा।

बैठक के बाद आरबीआई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘उन्होंने (मल्होत्रा ने) कहा कि 125 आधार अंकों की कटौती और तकनीक के व्यापक उपयोग के साथ मध्यवर्ती लागत को कम करने और दक्षता को बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि सतत वृद्धि और व्यापक वित्तीय समावेशन को बल मिले।’

यह बैठक विनियमित संस्थाओं के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ रिजर्व बैंक की बातचीत का हिस्सा है। पिछले साल दिसंबर में आरबीआई गवर्नर के रूप में पदभार संभालने के बाद मल्होत्रा की यह दूसरी ऐसी बैठक है। ऐसी पहली बातचीत इसी साल जनवरी में हुई थी।

रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय दर निर्धारण समिति ने पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति की समीक्षा के तहत रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करने की घोषणा थी। रीपो दर फिलहाल 5.25 फीसदी पर और पिछले 3 साल के निचले स्तर पर है। इस साल फरवरी से अब तक रीपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती की गई है।

आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि रीपो दर में फरवरी से सितंबर के बीच 100 आधार अंकों की कटौती की गई थी। उसके बाद वा​णि​ज्यिक बैंकों की भारित औसत घरेलू सावधि जमा दर में 102 आधार अंकों की कमी आई। मगर रुपये में लिए गए नए ऋण पर  ब्याज प्रभाव नकारात्मक (-73 आधार अंकों का) था।

आरबीआई के बयान के अनुसार, मल्होत्रा ने बेहतर ग्राहक सेवा पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने बैंकों से शिकायतों को कम करने और आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में यह भी प्रस्ताव दिया गया कि अगले साल 1 जनवरी से आरबीआई लोकपाल के साथ दो महीने का अ​भियान चलाया जाए ताकि एक महीने से अ​धिक समय से लंबित सभी ​शिकायतों का निपटारा किया जा सके।

आज की बैठक में मल्होत्रा ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिम पर भी प्रकाश डाला और अ​धिक दमदार सुरक्षा उपाय करने का आह्वान किया।

बयान में कहा गया है, ‘री-केवाईसी और बिना दावे वाली जमा रकम पर बैंकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने सक्रिय पहुंच

और निरंतर जागरूकता अभियानों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने रिजर्व बैंक के परामर्श दृष्टिकोण की पुष्टि की जिसमें विनियमों को सरल बनाने संबंधी हालिया पहल का भी उल्लेख किया गया।’

बयान में कहा गया है कि प्रतिभागियों ने न केवल नीतिगत मामलों ब​ल्कि पर्यवेक्षी एवं परिचालन संबंधी मुद्दों पर भी अपने दृ​ष्टिकोण साझा किए। बैठकों में डिप्टी गवर्नर टी रविशंकर, स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता और एससी मुर्मू के अलावा पर्यवेक्षण, विनियमन, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिक्षा एवं वित्तीय समावेशन के प्रभारी कार्यकारी निदेशक भी शामिल थे।

First Published - December 9, 2025 | 10:45 PM IST

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