facebookmetapixel
Advertisement
आईटी सेक्टर से म्युचुअल फंड्स का भरोसा घटा, होल्डिंग 8 साल के निचले स्तर पर; AI से बढ़ी चिंता SME IPO बाजार में उछाल, मई में बढ़ी लिस्टिंग; छोटे इश्यूज ने दिखाई मजबूती SpiceJet को सुप्रीम कोर्ट से झटका, कलानिधि मारन केस में ₹144 करोड़ जमा के लिए समय बढ़ाने से इनकारBoeing के फ्यूल-कंट्रोल स्विच की जांच तेज, भारतीय अधिकारी सिएटल में करेंगे परीक्षण की निगरानीPharmEasy की पेरेंट कंपनी एपीआई होल्डिंग्स का नया फॉर्मूला: पहले मुनाफा, फिर ग्रोथरुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: लगातार सातवें दिन गिरावट के साथ 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुई भारतीय मुद्राक्विक कॉमर्स को बड़ी राहत की तैयारी: डार्क स्टोर और गोदामों के लिए आसान होंगे GST पंजीकरण के नियमवेतन बढ़ोतरी में कटौती और सस्ती ब्याज दरों से कंपनियों की बल्ले-बल्ले, Q4 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा मुनाफाPepsiCo India का बड़ा दांव: 2030 तक क्षमता विस्तार पर ₹5,700 करोड़ निवेश करेगी कंपनीसाल 2032 तक $15 अरब की होगी हर IPL टीम, NFL को मिलेगी टक्कर; हुरुन इंडिया की रिपोर्ट में दावा

RBI ने व्यापारियों के लिए आयात भुगतान अवधि बढ़ाई, वैश्विक अनिश्चितता का बोझ कम

Advertisement

आयात जैसे लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा भुगतान या व्यय की अवधि चार महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी है

Last Updated- October 02, 2025 | 11:41 PM IST
Reserve Bank of India

भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय व्यापारियों पर प्रतिकूल वैश्विक व्यापार वातावरण के प्रभाव को कम करने के लिए आयात जैसे लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा भुगतान या व्यय की अवधि चार महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी है। यह वृद्धि केवल मर्चेंटिंग ट्रेड ट्रांजैक्शंस (एमटीटी) के लिए उपलब्ध होगी।

एमटीटी व्यवस्था में एक मध्यस्थ या व्यापारी एक विदेशी आपूर्तिकर्ता से सामान खरीदता है, यह सामान मध्यस्थकर्ता के देश में वास्तविक रूप से प्रवेश किए बिना ही अलग विदेशी खरीदार को बेच दिया जाता है। रिजर्व बैंक ने विकासात्मक और नियामक नीतियों पर अपने बयान में कहा कि इस छूट से भारत के व्यापारियों को व्यापारिक लेनदेन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है और उनकी लाभप्रदता कायम रहेगी। वैश्विक अनिश्चितता के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न होती है।

इससे भारत के व्यापारियों के लिए समय पर अनुबंधों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रिजर्व बैंक ने अन्य फैसले में कम मूल्य के निर्यातकों और आयातकों के लिए अनुपालन की जरूरतों में राहत दे दी है। इसने निर्यात और आयात डेटा प्रसंस्करण और निगरानी प्रणाली (डीपीएमएस) में सामंजस्य की प्रक्रिया को सरल बना दिया है।

रिजर्व बैंक ने विकास और विनियमन नीतियों पर दिए बयान में कहा कि इस छूट से भारत के व्यापारियों को लाभप्रदता कायम रखते हुए व्यापारिक लेनदेन समुचित ढंग से पूरी करने में आ रही चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।रिजर्व बैंक ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताएं व्यापार में आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर रही है। इससे भारत के कारोबारियों को समय पर अनुबंध को पूरा करने में परेशानियों का सामना करना पड़
रहा है।

Advertisement
First Published - October 2, 2025 | 11:37 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement