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RBI ने बैंक और ग्रुप कंपनियों के ओवरलैपिंग बिजनेस पर प्रस्तावित प्रतिबंध हटाकर नियमों में दी ढील

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ड्राफ्ट सर्कुलर में यह प्रस्ताव था कि बैंक समूह के अंदर केवल एक ही इकाई (बैंक और उसकी सहयोगी संस्थाएं) ही किसी विशेष प्रकार का स्वीकार्य व्यवसाय कर सकती है

Last Updated- October 01, 2025 | 10:56 PM IST
Reserve Bank of India

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि उसने ‘फॉर्म्स ऑफ बिजनेस ऐंड प्रूडें​शियल रेग्युलेशन फॉर इन्वेस्टमेंट्स’ पर अंतिम दिशानिर्देशों से बैंकों और उनकी सहयोगी कंपनियों के बीच व्यावसायिक गतिविधियों में संभावित टकराव पर प्रस्तावित प्रतिबंध को हटा दिया है।

पिछले साल जारी किए गए मसौदा दिशानिर्देशों में इस तरह के ओवरलैप पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया था। इससे देश के कुछ सबसे बड़े बैंकों, जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐ​क्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की चिंताएं दूर हो जाएंगी, क्योंकि इन बैंकों के साथ ऐसे गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफसी) भी काम करते हैं जो इसी तरह का कारोबार करते हैं।

मैक्वेरी कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं फाइनैंशियल सर्विसेज रिसर्च के प्रमुख सुरेश गणपति ने कहा, ‘बैंकों और एनबीएफसी को ओवरलैपिंग बिजनेस करने से रोकने वाले नियमों को हटाना एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐ​क्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे सभी बैंकों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इन बैंकों के पास भी ओवरलैपिंग बिजनेस करने वाले एनबीएफसी हैं।’

इस घोषणा के बाद एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.48 फीसदी, ऐ​क्सिस बैंक 2.43 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 1.77 फीसदी और कोटक महिंद्रा बैंक 3.45 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।

बुधवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि ‘फॉर्म्स ऑफ बिजनेस ऐंड प्रूडें​शियल रेग्युलेशन फॉर इन्वेस्टमेंट्स’ पर अंतिम दिशानिर्देशों से बैंक और उसकी समूह कंपनियों के व्यवसायों के बीच ओवरलैपिंग पर प्रस्तावित नियामकीय प्रतिबंध को हटा दिया गया है। ये दिशानिर्देश पिछले साल अक्टूबर में मसौदा के रूप में जारी किए गए थे।

मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘समूह संस्थाओं के बीच व्यावसायिक धाराओं का रणनीतिक आवंटन बैंक बोर्डों के विवेक पर छोड़ दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि आरबीआई माइक्रोमैनेजमेंट नहीं करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि बैंक अपनी जरूरतों के अनुसार सोच-समझकर और संतुलित तरीके से फैसला लेंगे कि वे अपना कारोबार कैसे करना चाहते हैं, इसलिए हमने यह फैसला उन पर ही छोड़ दिया है।’

ड्राफ्ट सर्कुलर में यह प्रस्ताव था कि बैंक समूह के अंदर केवल एक ही इकाई (बैंक और उसकी सहयोगी संस्थाएं) ही किसी विशेष प्रकार का स्वीकार्य व्यवसाय कर सकती है।

इसके अलावा, इसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि बैंक समूह के अंतर्गत आने वाली कई संस्थाएं एक ही प्रकार का व्यवसाय नहीं कर सकतीं या किसी भी वित्तीय क्षेत्र के नियामक से एक ही श्रेणी का लाइसेंस/अधिकार या पंजीकरण प्राप्त नहीं कर सकतीं। साथ ही, यह भी कहा गया था कि बैंक और उसके समूह की संस्थाओं द्वारा की जाने वाली ऋण गतिविधियों में कोई ओवरलैप नहीं होना चाहिए।

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First Published - October 1, 2025 | 10:48 PM IST

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