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₹50-80 लाख सालाना खर्च, शाखाओं की संख्या घटाएंगे सरकारी बैंक!

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डिजिटल लेनदेन बढ़ने से रणनीति बदली, ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में छोटी शाखाओं पर जोर

Last Updated- December 17, 2025 | 8:33 AM IST
PSBs

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) ग्राहकों के बदलते व्यवहार के बीच कामकाज सुव्यवस्थित करने और लागत घटाने के लिए अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम कर रहे हैं। इसका मसकद बैंक की शाखाओं की दक्षता अधिकतम करना है। इसमें ग्राहकों की कम आवाजाही वाली शाखाओं को बंद करना या नजदीकी शाखा में उनका विलय करना और छोटे केंद्रों की शाखाओं का आकार कम करना शामिल है।

बैंकिंग उद्योग के सूत्रों का कहना है कि कई सरकारी बैंकों ने कम प्रदर्शन वाली शाखाओं को चिह्नित करने के लि आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है। खासकर कस्बाई और ग्रामीण इलाकों की शाखाओं की समीक्षा हो रही है, जहां ग्राहकों की आवाजाही हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से कम हुई है।

ग्रामीण इलाकों के लिए छोटी शाखाएं स्थापित करने और बिजनेस करेस्पॉन्डेंट आउटलेट बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें से कुछ बैंकों ने क्षेत्रीय और जोनल कार्यालयों को आवाजाही, लेनदेन, मात्रा और लागत के आधार पर शाखाओं की व्यावहारिकता का मूल्कांकन शुरू करने को कहा है। बैंकरों ने कहा कि शाखाएं चलाने की लागत प्रतिवर्ष 50 से 80 लाख रुपये आती है, जो इलाके पर निर्भर है।

इंडियन बैंक के एक अधिकारी ने कहा, ‘इसके पहले हम नई शाखा स्थापित करने के लिए किराये पर 1,600 वर्गफुट जमीन लेते थे। इस समय इसे घटाकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए 1,200 वर्गफुट कर दिया गया है।’

उन्होंने कहा, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में दो शाखाओं के बीच की दूरी महत्त्वपूर्ण हैं और शाखाएं अधिक आबादी वाले क्षेत्र में स्थापित की जानी चाहिए।’अधिकारी ने आगे कहा कि वर्तमान रणनीति आसपास की शाखाओं को विलय करना या कम आवाजाही वाली शाखाओं को व्यस्त शाखा के साथ विलय करना है।

यह प्रवृत्ति डिजिटल चैनलों के साथ एक संरचनात्मक बदलाव दिखाती है। मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन सर्विस प्लेटफॉर्मों को लेकर ग्राहकों का आकर्षण बढ़ रहा है। एक अन्य सरकारी बैंक के एक अधिकारी ने कहा, ‘ग्राहकों के व्यवहार में काफी बदलाव आया है। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन बहुत बढ़ा है। कम मांग वाले स्थानों में बड़ी शाखाएं बनाए रखना अब आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया है।’

वहीं बैंक अब तकनीक और डेटा से संचालित टूल्स का इस्तेमाल स्थान के चयन में कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि आर्टीफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और एनालिटिक्स आधारित मॉडल का इस्तेमाल शाखाओं का प्रदर्शन जांचने और भविष्य की मांग जानने के लिए किया जा रहा है।

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First Published - December 17, 2025 | 8:33 AM IST

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