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US visa, green card: अमेरिका जाने वाले भारतीय हो जाएं सावधान! ग्रीन कार्ड पाने के लिए देनी पड़ सकती है सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में Executive Order 14161 पर साइन किया, जिसके तहत DHS (Department of Homeland Security) इमिग्रेशन स्क्रीनिंग प्रोसेस को और मजबूत करेगा।

Last Updated- March 07, 2025 | 1:47 PM IST
US Visa
Representative image

अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने वाले भारतीयों को अब अपने सोशल मीडिया हैंडल्स की जानकारी देनी पड़ सकती है। 5 मार्च 2025 को जारी नोटिस में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने बताया कि हर साल 3.5 मिलियन से ज्यादा इमिग्रेंट्स से यह डिटेल्स मांगी जा सकती हैं। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल होंगे, जो ग्रीन कार्ड, सिटिजनशिप और अन्य इमिग्रेशन बेनेफिट्स के लिए अप्लाई करते हैं।

STEM फील्ड के प्रोफेशनल्स, H-1B वीजा के इच्छुक और EB-5 या बिजनेस वीजा अप्लाई करने वाले भारतीयों पर इसका असर पड़ सकता है। ऑनलाइन इंटरैक्शन को अब इमिग्रेशन अथॉरिटी कैसे देखेगी, यह महत्वपूर्ण होगा। यहां तक कि कैजुअल पोस्ट्स या प्राइवेट कन्वर्सेशन भी वीजा अप्रूवल पर प्रभाव डाल सकते हैं।

सरकार ने इस प्रस्ताव पर पब्लिक की राय मांगते हुए 60 दिन का समय दिया है। DHS लोगों की फीडबैक को रिव्यू करने के बाद तय करेगा कि इस नियम को लागू किया जाए, संशोधित किया जाए या वापस लिया जाए।

अमेरिका में इमिग्रेशन नियम होंगे सख्त

अमेरिका में इमिग्रेशन से जुड़े नियम अब और सख्त होने वाले हैं। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में Executive Order 14161 पर साइन किया, जिसके तहत DHS (Department of Homeland Security) इमिग्रेशन स्क्रीनिंग प्रोसेस को और मजबूत करेगा।

इस नए ऑर्डर के तहत, अमेरिकी एजेंसियों को वीजा और इमिग्रेशन प्रक्रियाओं की रिव्यू करने का निर्देश दिया गया है ताकि सुरक्षा से जुड़े रिस्क को कम किया जा सके। इसके तहत USCIS (US Citizenship and Immigration Services) अब इमिग्रेशन एप्लिकेंट्स से 9 प्रमुख फॉर्म्स पर उनके सोशल मीडिया हैंडल्स की जानकारी मांगेगा। हालांकि, पासवर्ड शेयर करने की जरूरत नहीं होगी।

इस कदम का मकसद आवेदकों की पहचान को वेरिफाई करना और नेशनल सिक्योरिटी व पब्लिक सेफ्टी से जुड़े संभावित रिस्क को कम करना है।

भारतीय अप्रवासियों को रहना होगा सतर्क

अगर यह नियम लागू होता है, तो भारत समेत सभी देशों के अप्रवासियों को अपने सोशल मीडिया डिटेल्स देना अनिवार्य होगा। Business Standard से बातचीत में Burgeon Law के सीनियर पार्टनर केतन मुखीजा ने चेतावनी दी कि इससे वीज़ा एप्लिकेंट्स की ऑनलाइन एक्टिविटी पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

XIPHIAS Immigration के एमडी वरुण सिंह ने कहा कि ऑनलाइन बिहेवियर अब जांच के दायरे में रहेगा। अधिकारी पोस्ट, कमेंट्स और इंटरैक्शन को रिव्यू कर सकते हैं, जो आम तौर पर सामान्य लग सकते हैं लेकिन कड़े अमेरिकी नियमों के तहत चिंता का विषय बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि पुराने या आम तौर पर कही गई बातें भी गलत तरीके से इंटरप्रेट की जा सकती हैं, जिससे वीज़ा अप्रूवल में दिक्कतें आ सकती हैं।

केतन मुखीजा ने अप्रवासियों को सलाह दी कि वे अपने डिजिटल प्रेजेंस को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने कहा, “लीगल प्रॉब्लम्स से बचने के लिए अप्रवासियों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स टाइट रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी प्रोफाइल में दी गई जानकारी वीज़ा एप्लिकेशन से मेल खाती हो।”

अमेरिका वीजा एप्लिकेशन में दिक्कत से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

अमेरिका वीजा एप्लिकेशन के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ जरूरी टिप्स दे रहे हैं। इमिग्रेशन एक्सपर्ट वरुण सिंह के मुताबिक, सोशल मीडिया को लेकर खास सतर्कता बरतनी चाहिए। पुराने पोस्ट, कमेंट्स और शेयर किए गए कंटेंट को एक बार जरूर रिव्यू करें और ऐसा कुछ भी हटा दें जो विवादित हो सकता है या अमेरिकी पॉलिसी के खिलाफ दिख सकता है।

इसके अलावा, वीजा एप्लिकेशन और सोशल मीडिया प्रोफाइल में दी गई जानकारी एक-दूसरे से मेल खानी चाहिए। अगर इनमें कोई भी अंतर पाया गया तो संदेह की स्थिति बन सकती है। साथ ही, ऑनलाइन एक्टिविटी और जुड़ाव को लेकर भी सावधानी बरतनी जरूरी है। किसी भी पॉलिटिकली सेंसेटिव ग्रुप से जुड़ने या विवादित मुद्दों पर चर्चा करने से गलतफहमी हो सकती है।

सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले सोच-समझकर कदम उठाएं, क्योंकि यह आपके वीज़ा अप्लिकेशन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, इमिग्रेशन प्रोसेस के दौरान किसी भी संभावित दिक्कत से बचने के लिए इमिग्रेशन लॉयर से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

USCIS सोशल मीडिया पर रखेगा कड़ी नजर, वीजा और इमिग्रेशन फ्रॉड पकड़ने की तैयारी

अमेरिका की USCIS (यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) अब सोशल मीडिया पर ज्यादा सख्ती से नजर रखेगी। अब तक अफसर सोशल मीडिया का इस्तेमाल फ्रॉड डिटेक्शन के लिए करते थे, लेकिन नए प्लान के तहत इसकी स्कोप बढ़ा दी गई है।

अब USCIS फ्रॉड डिटेक्शन के लिए सोशल मीडिया और इमिग्रेशन एप्लिकेशन के बीच किसी भी तरह की गड़बड़ी खोजेगी। इसके अलावा, सिक्योरिटी थ्रेट्स की पहचान भी की जाएगी, यानी किसी का नाम एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स से जुड़ा है या नहीं, यह चेक किया जाएगा।

रिलेशनशिप वेरिफिकेशन के लिए अफसर सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को जांचेंगे, जिससे यह पता चल सके कि फैमिली-बेस्ड इमिग्रेशन क्लेम सही है या नहीं। इसी तरह, एम्प्लॉयमेंट वेरिफिकेशन के तहत LinkedIn जैसी प्रोफाइल्स को भी चेक किया जाएगा ताकि काम के अनुभव और इमिग्रेशन एप्लिकेशन की जानकारी मिलाई जा सके।

इसके अलावा, USCIS आइडेंटिटी वेरिफिकेशन करेगा ताकि सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और आधिकारिक दस्तावेजों में समानता बनी रहे। कैरेक्टर असेसमेंट के लिए उन पोस्ट्स की जांच होगी जो गैरकानूनी गतिविधियों या अवैध आचरण को दर्शा सकती हैं। अगर किसी ने बिना इजाजत काम किया हो या वीजा नियमों का उल्लंघन किया हो, तो उसे भी पकड़ा जाएगा।

अगर USCIS को सोशल मीडिया पर कोई संभावित संदिग्ध जानकारी मिलती है, तो आवेदक को इंटरव्यू में इसके बारे में पूछा जा सकता है या फिर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। अगर गड़बड़ी पाई गई, तो Notice of Intent to Deny (NOID) जारी किया जा सकता है या अन्य कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

नई इमिग्रेशन नियम: इन फॉर्म्स पर होगा असर, सोशल मीडिया डाटा भी होगा शामिल

अमेरिका में इमिग्रेशन से जुड़े नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर कई इमिग्रेशन फॉर्म्स पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत अब कुछ खास इमिग्रेशन एप्लिकेशन प्रोसेस में सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी भी जोड़ी जाएगी।

ये नियम निम्नलिखित फॉर्म्स पर लागू होंगे:

  • N-400 (नैचुरलाइजेशन के लिए आवेदन)
  • I-131 (ट्रैवल डॉक्युमेंट के लिए आवेदन)
  • I-192 (गैर-प्रवासी के रूप में एंट्री की अनुमति का आवेदन)
  • I-485 (स्टेटस एडजस्टमेंट का आवेदन)
  • I-589 (असाइलम के लिए आवेदन)
  • I-590 (शरणार्थी वर्गीकरण के लिए रजिस्ट्रेशन)
  • I-730 (शरणार्थी/असाइलम संबंधी रिश्तेदार याचिका)
  • I-751 (रेजिडेंस पर शर्तें हटाने की याचिका)
  • I-829 (इन्वेस्टर द्वारा परमानेंट रेजिडेंट स्टेटस से शर्तें हटाने की याचिका)

हालांकि, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस सोशल मीडिया डाटा को कैसे स्टोर और प्रोसेस किया जाएगा। लेकिन यह तय है कि एप्लिकेंट की फाइल में उनके सोशल मीडिया हैंडल्स, उपनाम (aliases) और अन्य संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी।

First Published - March 7, 2025 | 1:47 PM IST

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