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BFSI Summit: सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड होगा निजी क्षेत्र के लिए बेंचमार्क

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Last Updated- December 22, 2022 | 10:50 PM IST
green bond

भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने कहा है कि ईएसजी से जुड़े रुपया बॉन्ड के जरिये रकम जुटाने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए केंद्र सरकार के सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड की प्राइसिंग बेंचमार्क (कीमत तय करने के पैमाने) के तौर पर काम कर सकती है। डिप्टी गवर्नर ने बिज़नेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट में ये बातें कहीं। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि सरकार चालू वित्त वर्ष में अपने बाजार उधारी कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर ग्रीन बॉन्ड जारी करेगी।

राव ने कहा, ‘ग्रीन बॉन्ड के जरिये सरकार जो रकम जुटाएगी उसका इस्तेमाल सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं में होगा, जिससे अर्थव्यवस्था में कार्बन का हिस्सा घटाने में मदद मिलेगी। इसे किसी भी मायने में छोटा कदम नहीं माना जा सकता।’ उन्होंने कहा, ‘सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड भारत में निजी क्षेत्र की इकाइयों की रुपये वाली उधारी (ईएसजी से जुड़े ऋण) के लिए कीमत संदर्भ भी मुहैया कराएगा।’ राव के अनुसार इस तरह के बॉन्ड जारी होने से ऐसी व्यवस्था बनेगी, जिसमें ज्यादातर पूंजी हरित परियोजना में लगाए जाने को प्रोत्साहन मिलेगा।

पिछले महीने सीतारमण ने भारत के सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड के खाके को मंजूरी दी

राव ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस क्षेत्र में ठोस प्रयासों की आवश्यकता समझता है। इसलिए भारत के संदर्भ में जलवायु जोखिम और स्थायी वित्त के क्षेत्र में नियामक पहल का नेतृत्व करने के उद्देश्य से मई 2021 में उसने अपने विनियमन विभाग के अंतर्गत स्थायी वित्त समूह की स्थापना की है। पिछले महीने सीतारमण ने भारत के सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड के खाके को मंजूरी दी थी। इससे पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर तय योगदान (एनडीसी) लक्ष्यों के प्रति भारत का संकल्प और मजबूत होगा। इसके साथ ही यह पात्र हरित परियोजनाओं में वैश्विक और घरेलू निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा।

यह भी पढ़ें: Blue Bond : क्या हैं और Marine biodiversity के लिए क्यों है जरूरी?

वाणिज्यिक बैंक और वित्तीय संस्थानों को भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ बताते हुए राव ने कहा कि यह ‘ध्यान देने योग्य’ है कि भारत के प्रमुख बैंकों ने भी हाल के वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘निवेश की इस रफ्तार को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत ऋण आवंटन के दृ​ष्टिकोण में कई संरचनात्मक बदलाव करने की जरूरत हो सकती है, जिनमें परियोजनाओं के हरित प्रत्यय पत्रों का मूल्यांकन और प्रमाणन शामिल है। ग्रीन फाइनैंस को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को मानव संसाधन तथा क्षमता निर्माण के प्रयासों में निवेश करना होगा और पर्यावरण व सामाजिक जोखिमों को अपने कॉरपोरेट क्रेडिट मूल्यांकन तंत्र में शामिल करना होगा।’

वित्तीय क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका

ग्रीन फाइनैंस को बढ़ावा देने की राह में आने वाली चुनौतियों में से एक है तीसरे पक्ष के सत्यापन/आश्वासन और प्रभाव मूल्यांकन तथा कारोबार एवं परियोजनाओं की हरित साख के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र की उपलब्धता। राव ने कहा, ‘यह संभावित ग्रीनवाशिंग की चिंता को भी दूर करेगा और इकाइयों के लिए पूंजी का निर्बाध प्रवाह एवं धन सुनिश्चित करेगा।’ उन्होंने कहा कि डेटा और खुलासे की उपलब्धता की चुनौती जल्द दूर करने की जरूरत है। राव ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा बाजार पूंजीकरण के लिहाज से शीर्ष 1000 सूचीबद्ध इकाइयों के लिए खुलासा मानदंड निर्धारित करना स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह क्षेत्र व्यवसाय को वित्त प्रदान करता है। डिप्टी गवर्नर ने कहा कि व्यावसायिक रणनीति और संचालन में जलवायु से संबंधित वित्तीय जोखिमों के संभावित प्रभाव को समझने और आकलन करने के लिए व्यापक ढांचा विकसित करने तथा उसे लागू करने के लिए नियामक संस्थाओं की आवश्यकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे चरण में है, जहां तेजी से बढ़ने की आवश्यकता है लेकिन जलवायु जोखिम और ईएसजी से संबंधित विचारों को वाणिज्यिक उधारी एवं निवेश निर्णयों में शामिल करने के तरीके विकसित करने और उधारी विस्तार, आ​र्थिक वृद्धि तथा सामाजिक विकास की जरूरतों को संतुलित करने की है। राव ने कहा, ‘सामूहिक जुड़ाव हमारी शुरुआती प्रगति में मदद करेगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में लंबा सफर तय करेगा।’

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First Published - December 22, 2022 | 9:00 PM IST

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