राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से नवंबर की अवधि में पूंजीगत व्यय के लिए अपने वार्षिक आवंटन का महज 38.3 फीसदी रकम ही खर्च की। पूरे वित वर्ष के लिए राज्यों को 9.64 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा तैयार 21 राज्यों की मासिक खाता रिपोर्ट के विश्लेषण से हुआ है।
जिन 21 राज्यों के लिए आंकड़े उपलब्ध हैं उनमें से 16 राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 के पहले 8 महीनों के दौरान पूंजीगत व्यय मद में अपने बजट अनुमान का 50 फीसदी से भी कम खर्च किया। तेलंगाना अपने बजट अनुमान का सबसे अधिक 99.8 फीसदी खर्च करते हुए सूची में सबसे आगे है। उसके बाद 92.7 फीसदी उपयोग के साथ हरियाणा, 58.2 फीसदी खर्च के साथ केरल और 52.2 फीसदी उपयोग के साथ असम का स्थान रहा।
इसके विपरीत, छह राज्य इस सूची में काफी पीछे रहे। 28.2 फीसदी खर्च के साथ ओडिशा, 24.6 फीसदी उपयोग के साथ उत्तर प्रदेश, 20.6 फीसदी उपयोग के साथ छत्तीसगढ़, 20.1 फीसदी खर्च के साथ मेघालय, 20 फीसदी खर्च के साथ पश्चिम बंगाल और 18.5 फीसदी खर्च के साथ त्रिपुरा सूची में काफी पीछे रहे। इन राज्यों ने समान अवधि में अपने कुल पूंजीगत व्यय आवंटन का 30 फीसदी से भी कम खर्च किया।
लेखा महानियंत्रक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूंजीगत व्यय की यह रफ्तार वित्त वर्ष 2026 के पहले 7 महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) के दौरान केंद्र के कुल पूंजीगत व्यय के बिल्कुल विपरीत है। इस अवधि में केंद्र का पूंजीगत व्यय बजट अनुमान का 55.1 फीसदी रहा। पिछले वित्त वर्ष के लिए 25 राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों से पता चला है कि राज्यों ने अपने पूंजीगत व्यय बजट आवंटन का 80.2 फीसदी उपयोग किया था और आवंटित कुल 9.7 लाख करोड़ रुपये में से 7.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।
जहां तक राजस्व व्यय का सवाल है तो इन 21 राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 के पहले 8 महीनों (अप्रैल से नवंबर) के दौरान 47.4 लाख करोड़ रुपये के बजट आवंटन का करीब 53.8 फीसदी उपयोग किया है। राजस्व व्यय के मामले में 63.6 फीसदी उपयोग के साथ आंध्र प्रदेश सबसे आगे है। उसके बाद 62.9 फीसदी खर्च के साथ हिमाचल प्रदेश और 60.7 फीसदी उपयोग के साथ पंजाब सूची में अग्रणी राज्य हैं। मगर 49 फीसदी उपयोग के साथ झारखंड, 48 फीसदी के साथ मेघालय और 45.7 फीसदी उपयोग के साथ त्रिपुरा निचले पायदान पर रहे।
राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 के पहले 8 महीनों में 36 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का 59.2 फीसदी कर राजस्व एकत्रित किया। असम बजट अनुमान का 65.3 फीसदी राजस्व जुटाते हुए सूची में अग्रणी है। उसके बाद 64.1 फीसदी संग्रह के साथ हरियाणा और 62.5 फीसदी संग्रह के साथ गुजरात का स्थान है। उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान जैसे राज्य इस सूची में फिसड्डी हैं।
उधार एवं अन्य देनदारियों को देखें तो राज्यों ने अपनी बजट में तय उधारी का 40.85 फीसदी उपयोग किया और वित्त वर्ष 2026 के लिए 11.6 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट अनुमान के मुकाबले 4.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए।