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RBI ने जोखिम आधारित जमा बीमा प्रीमियम लागू करने का रखा प्रस्ताव, मजबूत बैंकों को मिलेगा लाभ

इससे बैंकों द्वारा जोखिम प्रबंधन में सुधार और बेहतर बैंकों के लिए प्रीमियम में कमी आने की उम्मीद है

Last Updated- October 01, 2025 | 11:06 PM IST
RBI repo rate cut

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को जोखिम आधारित जमा बीमा प्रीमियम लागू करने का प्रस्ताव रखा जबकि अभी अभी एकसमान दर लागू है। इससे बैंकों द्वारा जोखिम प्रबंधन में सुधार और बेहतर बैंकों के लिए प्रीमियम में कमी आने की उम्मीद है।

मौद्रिक नीति वक्तव्य के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा, जोखिम-आधारित जमा बीमा प्रीमियम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा वर्तमान में लागू एकसमान प्रीमियम दर होगी। इससे बैंकों द्वारा बेहतर जोखिम प्रबंधन को प्रोत्साहन मिलेगा और बेहतर रेटिंग वाले बैंकों द्वारा चुकाए जाने वाले प्रीमियम में कमी आएगी।

डीआईसीजीसी अधिनियम 1961 के तहत जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) 1962 से एक समान दर प्रीमियम के आधार पर जमा बीमा योजना संचालित कर रहा है। वर्तमान में ऋणदाताओं से करयोग्य जमा राशि के हर 100 रुपये पर 12 पैसे का प्रीमियम लिया जाता है।

हालांकि मौजूदा प्रणाली समझने और लागू करने में आसान है, लेकिन यह बैंकों के बीच उनकी मजबूती के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती। इसलिए एक जोखिम-आधारित प्रीमियम मॉडल लागू करने का प्रस्ताव है, जिससे ज्यादा मजबूत बैंकों को भुगतान किए गए प्रीमियम पर काफी बचत करने में मदद मिलेगी।

जमा बीमा योजना आरबीआई द्वारा लाइसेंस प्राप्त सभी बैंकों (वाणिज्यिक और सहकारी) के लिए अनिवार्य है। 31 मार्च, 2025 तक पंजीकृत बीमित बैंकों की संख्या 1,982 थी। जमा बीमा की वर्तमान कवरेज सीमा बैंक के हर जमाकर्ता के जमा खातों के लिए 5 लाख रुपये है।

डीआईसीजीसी जमा बीमा प्रदान करने के लिए बैंकों से कुल मूल्यांकन योग्य जमा पर 0.12 फीसदी सालाना की एकसमान दर से प्रीमियम लेता है। आरबीआई की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान प्राप्त जमा बीमा प्रीमियम 26,764 करोड़ रुपये था।

आरबीआई ने यह भी कहा कि विस्तृत अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी, जो अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 27) से प्रभावी होगी।

आईसीआरए लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख, अनिल गुप्ता के अनुसार, अगर बड़े, अच्छी रेटिंग वाले बैंक कम जमा बीमा लागत का लाभ ऊंची जमा दरों के माध्यम से आगे बढ़ाते हैं तो इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है। इससे छोटे और कमज़ोर बैंकों पर दबाव पड़ सकता है, जिसका उनके बाजार हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

First Published - October 1, 2025 | 11:02 PM IST

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