facebookmetapixel
Q3 रिजल्ट के बाद PNB का शेयर 52-वीक हाई से 5.37% नीचे लुढ़का; जानें क्या है कारणPNB Q3FY26 Results: मुनाफा 11.6% बढ़कर ₹5,189 करोड़ के पार, ब्याज से होने वाली आय भी 3% बढ़ाराहत अब काफी नहीं! एक्सपर्ट की मांग: बजट में प्री-फंडेड क्लाइमेट इंश्योरेंस पॉलिसी पर सोचे सरकार₹3 लाख के पार चांदी, क्या अभी भी कमाई का मौका बचा है, जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्टNFO: Parag Parikh MF ने उतारा नया लॉर्ज कैप फंड, ₹1,000 से निवेश शुरू; क्या है इसमें खास?Trump ने नोबेल पुरस्कार न मिलने का ठीकरा फोड़ा, ग्रीनलैंड को बनाया सुरक्षा मुद्दाSteel Stocks: दुनिया की सुस्ती के बीच भारत का स्टील सेक्टर मजबूत, मोतीलाल ओसवाल ने इन 3 शेयरों में दी BUY की सलाहBudget 2026: सरकार की तिजोरी में पैसा आता है कहां से?FY26 में 7.3% GDP ग्रोथ से बढ़ेगी इनकम, इंश्योरेंस डिमांड को मिलेगा सहारा: मूडीजOffice market: वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी ऑफिस मार्केट ने बनाया रिकॉर्ड, इस साल जीसीसी हिस्सेदारी 50 फीसदी पार होने की उम्मीद

कंपनियों के रिस्क प्रोफाइल की समीक्षा कर रहे हैं बैंक

Last Updated- December 07, 2022 | 9:05 AM IST

आर्थिक संभावनाओं के परिदृश्य में हो रहे बदलाव को देखते हुए भारतीय बैंकों ने कंपनियों और सेक्टरों के रिस्क प्रोफाइल की समीक्षा करनी शुरू कर दी है।


बैंकों ने पिछले महीने ही यह काम शुरू कर दिया था लेकिन उनका कहना है कि रिस्क प्रोफाइल की समीक्षा करना एक सामान्य प्रक्रिया है। बैंकों अब भी यही कह रहे हैं कि उनके लोन 20 फीसदी से ज्यादा की दर से बढ़ रहे हैं हालांकि यह बात वो खुद भी इससे पूरी तरह से सहमत नहीं दिख रहे हैं।

स्टेट बैंक की एक एसोसिएट बैंक के एमडी के मुताबिक मांग में कमी आने के चलते कारोबारी प्रोजेक्शंस हो सकता है पूरे न हों, और नतीजतन उस कर्जे से जुड़ा जोखिम भी बढ़ सकता है।  इस वजह से हमे एहतियाती कदम उठाने ही होंगे। लेकिन बैंकों के लिए परेशानी का सबब महज इतना ही नही है बल्कि उन्हें उद्योगों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से भी कर्ज के भुगतान संबंधी मामलों के निपटारे में खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

बैंकों की असल परीक्षा की घड़ी तो अब आने वाली है कि 71,000 करोड़ रुपये के कर्ज माफी के बाद ग्रामीण इलाकों में कर्ज के भुगतान को लेकर क्या मानसिकता बनती है। उधर प्राइवेट बैंकों ने डेलीक्वेंसी दरों में बढ़ोत्तरी के कारण रिटेल लेंडिंग में कमी करने का फैसला किया है। बढ़ती ब्याज दरों और गिरते मांग के चलते नए प्रोजेक्टों का आना दूभर लग रहा है तब एसबीआई के एक वरिष्ठ एक्जीक्यूटिव का कहना है कि बैंक इस वक्त 300 बड़ी कंपनियों और अन्य मझौले आकार के औद्योगिक प्रतिष्ठानों की समीक्षा कर रहा है।

हालांकि बैंक इस मसले को लेकर देर से ज्यादा सतर्क हुआ है। लेकिन इस साल ज्यादा सतर्क होने के पीछे दो वजहें हैं , रिजर्व बैंक का विवेकपूर्ण यानि प्रूडेंशियल मानदंड और कैपिटल एडीक्वेसी की समीक्षा। इसके अलावा बढ़ती लागत कीमत और मंदी का डर वजह रहे हैं जिनके चलते बैंकों को इस कदम की ओर रूख करना पड़ा है।

First Published - July 4, 2008 | 9:39 PM IST

संबंधित पोस्ट