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BFSI Summit : ‘नए दौर के जोखिमों’ से निपटने के लिए बीमा उद्योग ने ज्यादा सहयोग

बजाज जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ तपन सिंघल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन न केवल पर्यावरण संबंधी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक जोखिम भी पैदा करता है।

Last Updated- October 30, 2025 | 11:25 PM IST
BFSI Insight Summit

BFSI Summit 2025: जलवायु संबंधी आपदाओं, साइबर खतरों और उभरते कार्यस्थल मॉडलों में वृद्धि के बीच जनरल इंश्योरेंस उद्योग ने ‘नए दौर के जोखिमों’ को दूर करने के लिए बीमाकर्ताओं, सरकार और प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया है।

बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट 2025 में मनोजित साहा के साथ चर्चा के दौरान बीमा कंपनियों के प्रमुखों ने डिजिटल धोखाधड़ी, जलवायु आपदाओं, इलेक्ट्रिक वाहनों और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिमों से लोगों और व्यवसायों की सुरक्षा के लिए व्यापक ढांचा बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

बजाज जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ तपन सिंघल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन न केवल पर्यावरण संबंधी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक जोखिम भी पैदा करता है। उन्होंने कहा, ‘जब कोई जलवायु आपदा आती है, तो कुल आर्थिक नुकसान का 10 प्रतिशत से भी कम बीमित होता है। बाकी नुकसान बिना कवर के रहता है। इसका भारत के सकल घरेलू उत्पाद सीधे 2 प्रतिशत असर पड़ता है।’

उन्होंने भारत की आपदा प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए सरकार और बीमाकर्ताओं के बीच संयुक्त रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए पीबी फिनटेक के चेयरमैन और ग्रुप सीईओ, यशिश दहिया ने उल्लेख किया कि जलवायु जोखिम प्रबंधन को केवल बीमाकर्ताओं पर नहीं छोड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हमें सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच हितों का तालमेल बिठाने की जरूरत है। मोटर बीमा की तरह, गृहस्वामियों के लिए बुनियादी आपदा बीमा को अनिवार्य करना एक सरल लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है।’ उन्होंने इस तरह के बीमा को बिजली या गैस के कनेक्शन की तरह आवश्यक उपयोगिता की तरह किए जाने का सुझाव दिया, जिससे युनिवर्सल कवरेज सुनिश्चित हो सके।

जेनराली सेंट्रल इंश्योरेंस कंपनी के एमडी और सीईओ अनूप राउ ने कहा कि अंडरराइटिंग और क्लेम मैनेजमेंट को प्रतिक्रिया वाले से निवारक ढांचे में विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें उन ग्राहकों को प्रोत्साहित करना चाहिए जो अपनी संपत्ति को सुरक्षित करने या अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए कदम उठाते हैं। यह साझा जिम्मेदारी समय के साथ जोखिम लागत को कम करेगी।’ उन्होंने इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए यूएनडीपी की एक साझेदारी का हवाला दिया।

एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ नवीन चंद्र झा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं बल्कि वर्तमान संकट है। उन्होंने कहा, ‘जो चक्रवात 5 साल में एक बार आते थे, वे अब साल में 4 बार आ रहे हैं।’ उन्होंने सैटेलाइट इमेजिंग, एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके गतिशील अंडरराइटिंग प्रणाली बनाए जाने का पक्ष लिया। उन्होंने नगालैंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ प्रायोगिक तौर पर किए गए एक पैरामीट्रिक बीमा मॉडल की सफलता पर भी प्रकाश डाला, जहां तापमान या वर्षा जैसे जलवायु मापदंडों के आधार पर भुगतान स्वतः शुरू हो जाता है।

First Published - October 30, 2025 | 11:20 PM IST

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