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Loan Defaults: जून तिमाही में बैंकों के डिफॉल्ट बढ़कर ₹63,000 करोड़, प्राइवेट बैंकों पर ज्यादा असर

केयर एज रेटिंग के अनुसार, जून 2025 तिमाही में बैंकों की चूक सालाना आधार पर 26% बढ़ी। इसमें सूक्ष्म वित्त और असुरक्षित खुदरा ऋण की भूमिका ज्यादा रही।

Last Updated- August 21, 2025 | 9:18 AM IST
RBI Share and IPO Loan

भारत के वाणिज्यिक बैंकों की जून 2025 की समाप्त तिमाही (वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही) में चूक सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 63,000 करोड़ दर्ज हुई। इसमें मुख्य तौर पर चुनिंदा ऋणदाताओं का सूक्ष्म वित्त और असुरक्षित खुदरा ऋण का पोर्टफोलियो था। केयर एज रेटिंग के आंकड़ों के अनुसार निजी ऋणदाताओं के लिए चूक की घटनाएं अधिक थीं जबकि यह उनके समकक्ष सरकारी बैंकों में कम थीं।

एक बड़े निजी बैंक में तकनीकी प्रभाव और कृषि के फंसे हुए मौसमी ऋण ने चूकों को बढ़ाया। बीती तिमाही मार्च, 2024 (वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही) की समाप्ति पर चूक 57,000 करोड़ रुपये थी और इसमें अगली तिमाही में वृद्धि हुई। निजी बैंकों की चूक वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सालाना आधार (36,000 करोड़ रुपये) पर 41 प्रतिशत अधिक थी जबकि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सालाना आधार (27,000 करोड़ रुपये) पर 14.4 प्रतिशत अधिक थी।

रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 30 ऋणदाताओं का विश्लेषण करने के बाद बताया कि चूक की दर कम थी। चूक की दर को ढांचागत और क्रमिक कारकों से मदद मिली थी। ऋण देने की वृद्धि का झुकाव कुछ कम जोखिम वाले रिटेल खंड की तरफ रहा है और यह खासतौर पर मॉर्गेज की ओर है। हालांकि असुरक्षित खुदरा ऋण में विस्तार दर्ज हुआ है और बड़े कॉरपोरेट की चूक कम हुई है।

उसने बताया कि पहले से जारी फंसे हुए कर्ज में कमी आई है। बीते दो या तीन वर्षों से कहीं अधिक फंसा हुए खातों के मुद्दे हल हुए या उनके प्रावधानों से उच्च जोखिम की आशंका कम हुई। केयर एज के अपग्रेड व वसूली करने के आंकड़ों से पता चलता है कि पहली तिमाही में मात्र 3.57 प्रतिशत सालाना वृद्धि के साथ सुस्त प्रदर्शन था। वास्तविकता में अप्रैल – जून, 2025 में अपग्रेड और वसूलियां 29,000 करोड़ रुपये थीं और यह बीते साल के 28,000 करोड़ रुपये से अधिक थीं। सरकारी बैंकों की वसूली और अपग्रेड वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में छह प्रतिशत कम हो गए।

यह वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 16,000 करोड़ रुपये थीं जबकि बीते साल की अवधि में 17,000 करोड़ रुपये थीं। इसके विपरीत वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में निजी बैंकों की वसूली व अपग्रेड बेहतर होकर 13,000 करोड़ रुपये हो गईं जबकि यह यह एक साल पहले की अवधि में 11,000 करोड़ रुपये थीं।

First Published - August 21, 2025 | 9:18 AM IST

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