facebookmetapixel
Advertisement
भारत-फ्रांस आर्थिक रिश्तों को नई गति देने 4 दिवसीय दौरे पर रवाना हुईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणशांति समझौते के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य नहीं हुई जहाजों की आवाजाही, पूरी बहाली में लग सकते हैं तीन महीनेखामेनेई की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए ईरान का कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण‘विजय’ मंत्र के साथ सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने संभाली कमान, कहा- भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयाररंगमंच के आकाश से टूटा सितारा: विजया मेहता नहीं रहीं, कला जगत में शोक की लहर Editorial: कच्चा तेल सस्ता, लेकिन वैश्विक वित्तीय जोखिम अब भी भारत के लिए चुनौतीम्युचुअल फंड बनाम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर बहस और जमीनी हकीकतश्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?सेबी का शिकंजा: पंप-एंड-डंप स्कीम में 222 इकाइयों पर प्रतिबंध, ₹47.7 करोड़ का जुर्मानामई के उच्चस्तर के बाद जून में घटा कैश मार्केट में टर्नओवर, F&O कारोबार में बढ़त बरकरार

अमेरिकी जवाबी शुल्क की आशंका, भारतीय निर्यात पर असर को लेकर सतर्कता बढ़ी

Advertisement

भारतीय निर्यात पर संभावित असर को लेकर चर्चा जारी, अमेरिका पर निर्भरता के बीच नए बाजारों की तलाश जरूरी

Last Updated- March 07, 2025 | 11:26 PM IST
India US

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल से भारत पर जवाबी शुल्क लगाने की चेतावनी के बीच एक्सपोर्ट ऐंड इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (एक्जिम बैंक) ने भारतीय निर्यात पर इसके संभावित असर पर चर्चा की है और सरकार को जानकारी दी है।

बैंक द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के इतर एक्जिम बैंक की उप प्रबंध निदेशक दीपाली अग्रवाल ने कहा, ‘काफी काम किया जा रहा है। हमारे तरफ से भी हमने मंत्रालय को उचित जानकारी दी है। इस पर विमर्श जारी है कि इसे और अधिक प्रासंगिक कैसे बनाया जा सकता है क्योंकि भारत का अधिकतर निर्यात अमेरिका को हाता है और इसका काफी असर पड़ेगा, जो इस पर निर्भर करेगा कि दूसरी तरफ से क्या मांग है।’ मगर उन्होंने साझा की गई जानकारी के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में राष्ट्रपति बनते ही डॉनल्ड ट्रंप ने भारत, ब्राजील, चीन जैसे देशों पर जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने मेक्सिको और कनाडा पर भी इसी तरह के शुल्क लगाने की धमकी दी थी। अग्रवाल ने कहा कि भारत का निर्यात अमेरिका में केंद्रित है और अब हमें लैटिन अमेरिका की ओर विविधता लाने की जरूरत है, जहां लगता है कि समय के साथ दिलचस्पी बढ़ रही है। मगर केवल अमेरिका के साथ मसले के कारण इसमें बदलाव नहीं आएगा।

Advertisement
First Published - March 7, 2025 | 11:26 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement