facebookmetapixel
IT Stock: शानदार नतीजों के बाद बनेगा रॉकेट! ब्रोकरेज ने BUY रेटिंग के साथ दिया 53% अपसाइड का टारगेटGold and Silver Price Today: सोना नए ​शिखर पर, चांदी ₹3.56 लाख के पार नई ऊंचाई परदो दशक बाद भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मुहर, 136 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी रफ्तारBond Market: बजट से पहले बॉन्ड बाजार पर खतरे के बादल, ₹30 लाख करोड़ की सप्लाई का डरSwiggy के Q3 नतीजों से पहले बढ़ा सस्पेंस, कमाई उछलेगी या घाटा और गहराएगा? जानें ब्रोकरेज क्या बोलेDividend Stock: 10 साल में 1900% उछला शेयर, अब ₹22 का डिविडेंड भी देगी ये IT कंपनीStocks to Watch Today: एक्सिस बैंक से लेकर IndusInd Bank और BPCL तक, आज इन स्टॉक्स पर रखें फोकसStock Market Update: गिरावट के बाद बाजार की वापसी, सेंसेक्स 250 अंक चढ़ा; निफ्टी 25100 के पारडर की दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खरीदारी! 5,000 डॉलर के पार भाव, अब $6,000 की तैयारीBudget 2026 में रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री की सरकार से मांग: GST कम होगा तभी उद्योग में आएगी तेजी

Trump Tariff Impact: भारत पर टैरिफ, लेकिन झटका ट्रंप की जनता को – हर अमेरिकी परिवार को ₹2 लाख का नुकसान

SBI रिपोर्ट का दावा – अमेरिका में 20% औसत टैरिफ से खुदरा महंगाई 2.4% तक बढ़ेगी, भारतीय फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को बड़ा झटका लग सकता है।

Last Updated- August 01, 2025 | 11:21 AM IST
Trump tariffs impact on US inflation

अमेरिका में महंगाई फिर से तेज़ होने के संकेत मिले हैं और इसकी अहम वजह है हाल ही में लगाए गए भारी-भरकम आयात टैक्स यानी टैरिफ। SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने अपने ज्यादातर आयात पर औसतन 20% टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे न केवल अमेरिकी बाजार में चीजें महंगी होंगी, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों के व्यापार और निर्यात पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका में क्यों बढ़ रही है महंगाई?

SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका हर साल करीब 3.26 ट्रिलियन डॉलर (₹272 लाख करोड़) का माल दूसरे देशों से आयात करता है। जब इस पूरे आयात पर 20% टैक्स लगाया जाएगा, तो यह अपने-आप में एक बहुत बड़ा झटका होगा। यह टैक्स एक तरह का सप्लाई झटका है, यानी सामानों की लागत पहले ही स्तर पर बढ़ जाती है, जो धीरे-धीरे कंज़्यूमर तक पहुंचती है। रिपोर्ट का कहना है कि इस टैक्स की वजह से अमेरिका की खुदरा महंगाई (CPI) तुरंत 2.4% तक बढ़ सकती है, और लंबी अवधि में भी 1.2% की बढ़ोतरी बनी रह सकती है।

अमेरिकी परिवारों पर कैसा पड़ेगा असर?

SBI ने अनुमान लगाया है कि इस टैक्स की वजह से हर अमेरिकी परिवार को औसतन 2,400 डॉलर (करीब ₹2 लाख) का सालाना नुकसान होगा। गरीब परिवारों पर इसका बोझ सबसे ज्यादा होगा क्योंकि उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा महंगाई में चला जाएगा। वहीं, अमीर परिवारों को भले ही ज्यादा पैसे का नुकसान हो (करीब 5,000 डॉलर), लेकिन उनके जीवन स्तर पर इसका असर उतना गंभीर नहीं होगा।

भारत को क्यों हो सकती है चिंता?

देश का नाम FY24 में निर्यात (अरब डॉलर) FY25 में निर्यात (अरब डॉलर) कितनी बढ़ोतरी हुई (%) भारत के कुल निर्यात में हिस्सा (%) कृषि सामान पर औसतन टैक्स (%) बाकी सामान पर औसतन टैक्स (%)
अमेरिका (US) 77.5 86.5 11.6% 19.8% 35.1% 12.0%
यूएई (UAE) 35.6 36.6 2.8% 8.4%
नीदरलैंड 22.4 22.8 1.8% 5.2% 35.1% 12.0%
ब्रिटेन (UK) 12.9 14.5 12.6% 3.3% 35.1% 12.0%
चीन (China) 16.7 14.3 -14.5% (घटत) 3.3% 29.4% 11.2%
सिंगापुर 14.4 13.0 -10.0% (घटत) 3.0% 18.3% 3.1%
सऊदी अरब 11.6 11.8 1.7% 2.7% 35.1% 12.0%
बांग्लादेश 11.1 11.5 3.5% 2.6% 5.7% 1.8%
जर्मनी (Germany) 9.8 10.5 7.1% 2.4% 35.1% 12.0%
ऑस्ट्रेलिया 7.9 8.6 8.2% 2.0% 35.1% 12.0%
कुल 437.1 437.5 0.1% 100%

स्रोत: SBI Research

अमेरिका, भारत के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। FY25 में भारत के कुल निर्यात का 20% हिस्सा अमेरिका को गया, और FY26 के पहले कुछ महीनों में यह बढ़कर 22.4% हो गया है। भारत जिन 15 प्रमुख उत्पादों का निर्यात करता है, उनमें से 63% का निर्यात केवल अमेरिका को होता है। ऐसे में अगर अमेरिका में महंगाई बढ़ती है और टैक्स के चलते भारतीय सामान महंगे हो जाते हैं, तो भारत का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

यह भी पढ़ें: अमेरिका में महंगे हो जाएंगे भारत से एक्सपोर्ट होने वाले सामान, इन 6 सेक्टर्स को लगेगा झटका

किन सेक्टरों को सबसे ज़्यादा झटका?

रिपोर्ट में बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, जेम्स एंड ज्वेलरी और मशीनरी जैसे सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे। अभी तक इन सामानों पर अमेरिका कोई या बहुत कम टैक्स लगाता था – जैसे डायमंड, स्मार्टफोन और दवाओं पर टैक्स 0% था। लेकिन अब इन सभी पर सीधा 25% टैक्स लगेगा। इससे अमेरिका में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे और वहां के ग्राहक इन्हें खरीदने से बच सकते हैं।

फार्मा सेक्टर पर डबल मार

SBI की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका भारत की दवा ज़रूरतों का करीब 47% हिस्सा भारत से ही पूरा करता है। खासकर जेनेरिक दवाओं, कैंसर की दवाओं और एंटीबायोटिक्स में भारत की मजबूत पकड़ है। लेकिन अगर अमेरिका अब इन दवाओं को कहीं और से खरीदने या खुद बनाने की कोशिश करता है, तो इसमें कम से कम 3-5 साल का वक्त लगेगा। इस दौरान अमेरिकी बाजार में दवाओं की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों की 40-50% कमाई अमेरिका से होती है, इसलिए अगर 25% टैक्स लंबे समय तक जारी रहा, तो उनकी कमाई में 2 से 8% तक की गिरावट आ सकती है।

भारत से सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट पर असर

अमेरिका ने जब चीन से सोलर पैनल खरीदने पर रोक लगाई थी, तब भारत से सोलर मॉड्यूल का निर्यात तेज़ी से बढ़ा। साल 2024 में भारत ने अमेरिका को 8 गीगावाट से ज्यादा सोलर मॉड्यूल भेजे। लेकिन अब अगर इन पर 25% टैक्स लग गया, तो अमेरिका के लिए ये सामान महंगे हो जाएंगे और वह दूसरे, टैक्स-फ्री देशों से सामान लेना पसंद करेगा। यही बात स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए भी लागू होती है।

दूसरे देशों को क्या डील मिली?

SBI की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने कई देशों के साथ अलग-अलग टैरिफ डील की है। वियतनाम को 20% टैक्स पर समझौता मिला है, लेकिन अगर किसी तीसरे देश से सामान वियतनाम के रास्ते भेजा गया, तो उस पर 40% टैक्स लगेगा। ब्रिटेन ने 10% टैक्स मान लिया है और बदले में अमेरिका ने ब्रिटेन को यह सुविधा दी कि वह अपने एयरक्राफ्ट इंजन और बीफ (गाय का मांस) अमेरिका को आसानी से बेच सकेगा। जापान और EU ने भी 15% टैरिफ पर सहमति जताई है।

भारत को क्या करना चाहिए?

रिपोर्ट का सुझाव है कि भारत के कुछ सेक्टरों – जैसे ऑटोमोबाइल, FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल – पर अमेरिका से आने वाले सामानों पर 15-20% तक का टैक्स (MFN ड्यूटी) लग रहा है। भारत सरकार अगर चाहे, तो इन टैक्स को थोड़ा कम करके अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में लचीलापन दिखा सकती है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध बेहतर हो सकते हैं।

First Published - August 1, 2025 | 11:10 AM IST

संबंधित पोस्ट