जनवरी में करीब 13.68 करोड़ ईवे बिल जारी किए गए जो अभी तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। इससे पहले दिसंबर में सर्वाधिक करीब 13.83 करोड़ ईवे बिल जारी किए गए थे। पिछले साल जनवरी में 9.59 करोड़ ईवे बिल जारी किए गए थे यानी इस साल जनवरी में करीब 43 फीसदी अधिक ईवे बिल जेनरेट किए गए।
ईवे बिल इलेक्ट्रॉनिक रूप से जेनरेट किया गया एक दस्तावेज है जो देश के भीतर 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान की आवाजाही के लिए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत अनिवार्य है। इसमें माल, माल भेजने वाला, माल प्राप्त करने वाला और ट्रांसपोर्टर सभी का विवरण होता है। इसका मकसद कर चोरी पर अंकुश लगाना और साथ ही राज्यों में माल की आवाजाही पर रीयल-टाइम नजर रखना है।
ईवे बिल में लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि जीएसटी दरों में कटौती और सरकार द्वारा किए गए अन्य नीतिगत उपायों से खपत आधारित मांग लगातार बनी हुई है।
केपीएमजी में पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, ‘वृद्धि का यह स्तर घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।’
डेलॉयट में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि जनवरी की वृद्धि विनिर्मित वस्तुओं की आपूर्ति, थोक व्यापार और अंतरराज्यीय लॉजिस्टिक में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाती है।
डेलॉयट में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा, ‘ईवे बिल में 42.6 फीसदी की वृद्धि न केवल गतिविधियों में तेजी का बल्कि बेहतर जीएसटी अनुपालन में सुधार का भी संकेत देती है जिससे अप्रत्यक्ष कर में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।’
पीडब्ल्यूसी में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि ईवे बिल जेनरेशन में मजबूत वृद्धि से माल की आवाजाही में व्यापक वृद्धि और आर्थिक गति का पता चलता है, खास तौर पर विनिर्माण और लॉजिस्टिक में। उन्होंने कहा, ‘इससे जीएसटी संग्रह में भी इजाफा होने की उम्मीद है।’
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज में पार्टनर विवेक जालान ने कहा कि ज्यादा ईवे बिल जेनरेशन देश में मजबूत आर्थिक गतिविधि और करदाताओं के बीच बेहतर अनुपालन का संकेत है। हालांकि यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि प्रति खेप 50,000 रुपये की सीमा अब बहुत कम है।
यह ध्यान देना जरूरी है कि 50,000 रुपये में जीएसटी भी शामिल है, इसलिए अगर जीएसटी 18 फीसदी है तो करयोग्य मूल्य केवल 43,000 रुपये होगा। ऐसे में संभव है कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में इस सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर दिया जाए। ईवे बिल में वृद्धि व्यापक घरेलू खपत रुझान के अनुरूप है।
निजी अंतिम खपत व्यय के 2025-26 में 7 फीसदी बढ़ने का अनुमान है जो 2024-25 में दर्ज 7.2 फीसदी से थोड़ा कम और सकल घरेलू उत्पाद का 61.5 फीसदी होगा।29 जनवरी को जारी की गई 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में ईवे बिल को केवल प्रवर्तन के उपाय के बजाय, बिना किसी रुकावट के लॉजिस्टिक को आसान बनाने वाले साधन के तौर पर सोचने की सलाह दी गई है।