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भारतीय बैंकों को मजबूत बनाए रखने के लिए कारोबारी मॉडल पर RBI की नजर

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Last Updated- April 27, 2023 | 11:54 PM IST
RBI Governor

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्तीय सुदृढ़ता को प्रभावित करने वाली किसी तरह की संभावित कमियों का पता लगाने के लिए बैंकों के कारोबारी मॉडल पर करीब से नजर रख रहा है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक गंभीर दबाव की स्थिति में न्यूनतम पूंजी बनाए रख सकते हैं। दास ने कहा कि बैंकिंग नियामक उम्मीद करता है कि सतत विकास के लिए बैंक के बोर्ड समुचित पूंजी जुटाने तथा नियामक द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक तरलता का बफर तैयार करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का अनुपात (बैंक की वित्तीय सेहत का पैमाना) दिसंबर में और कम होकर 4.41 फीसदी पर आ गया जो मार्च, 2022 में 5.8 फीसदी पर और मार्च, 2021 में 7.3 फीसदी पर था।

सकल एनपीए मार्च 2014 के बाद सबसे कम स्तर पर है। उस दौरान यह 4.1 फीसदी था। पूंजी पर्याप्तता अनुपात दिसंबर 2022 में 16.1 फीसदी था, जो न्यूनतम नियामकीय आवश्यकता से अधिक है।

दास ने कॉलेज ऑफ सुपरपाइजर्स द्वारा आयोजित वित्तीय सुदृढ़ता पर वैश्विक सम्मेलन में कहा, ‘वित्तीय मजबूती बैंक के कारोबारी मॉडल और रणनीति से जुड़ा है। इसलिए आरबीआई बैंकों के कारोबारी मॉडल पर करीब से नजर रख रहा है। कारोबारी मॉडल में खामी से समय के साथ संकट पैदा हो सकता है।’

उन्होंने बैंकों की कमजोरियों की मूल वजह की पहचान कर, उसे दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा अक्सर अनुचित कारोबारी मॉडल की वजह से होता है। दास ने कहा कि वृद्धि को लेकर आक्रामक रणनीति या बिना सोचे-समझे मुनाफे को बढ़ाने पर ध्यान देने से भविष्य में समस्या होती है।

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दास ने कहा, ‘हम बैंकों के कारोबारी निर्णय लेने में हस्तक्षेप नहीं करते हैं, लेकिन विनियमित इकाइयों को समुचित आंतरिक नियंत्रण और उनके कारोबारी मॉडल की वजह से होने वाले जोखिम के आधार पर नुकसान वहन करने की क्षमता का प्रदर्शन करना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘हम बाहरी ऑडिटरों के साथ भी संवाद करते हैं और समस्या होने पर बैंकों को इसके बारे में आगाह करते हैं। हाल के समय में हम इस तरह की समस्या की मूल वजह पर ध्यान दे रहे हैं।’ गवर्नर ने कहा कि नियामक न केवल पूंजी पर्याप्तता और तरलता अनुपात पर नियामकीय नियम तय करता है बल्कि अच्छे समय में बैंकों को पूंजी बफर तैयार करने के लिए भी प्रेरित करता है। उन्होंने कहा, ‘हमने कोविड-19 महामारी के दौरान ऐसा किया है, जब प्रचुर मात्रा में तरलता थी और ब्याज दरें काफी कम थीं।’

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इन उपायों के परिणामस्वरूप भारतीय बैंक मजबूत बने रहे और विकसित देशों, खास तौर पर अमेरिका में वित्तीय अस्थिरता का उन पर कोई असर नहीं पड़ा।

दास ने कहा कि आरबीआई और बैंकों द्वारा खुद किए गए उपायों से भारतीय बैंकिंग तंत्र मजबूत बना हुआ है और हाल के समय में कुछ विकसित देशों में आई वित्तीय अस्थिरता का इन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।

उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक बैंक अत्यंत दबाव की स्थिति में भी न्यूनतम पूंजी जरूरत का अनुपालन करने में सक्षम होंगे। अमेरिका और यूरोप में हाल के समय में बैंक की विफलता का हवाला देते हुए दास ने कहा कि अलग-अलग बैंकों के लिए जोखिम उनकी बैलेंसशीट से जुड़ा होगा।

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First Published - April 27, 2023 | 8:42 PM IST

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