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Manufacturing PMI: लगातार दूसरे महीने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई नरमी, जुलाई में पहुंचा 57.7 पर

S&P Global India Manufacturing PMI जुलाई में 57.7 पर पहुंच गया, जो मोटे तौर पर जून में 57.8 था

Last Updated- August 01, 2023 | 2:30 PM IST
manufacturing PMI

Manufacturing PMI: देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियां जुलाई में लगातार दूसरे महीने कम हुईं। ऐसा उत्पादन और नए ऑर्डर की दर में थोड़ी गिरावट के चलते हुआ। जुलाई में उत्पादन और नए ऑर्डरों में विस्तार की दर जून के मुकाबले कमजोर रही। लागत मुद्रास्फीति दबाव (Cost inflationary pressures) अपेक्षाकृत कम रहा।

सीजन के तौर पर, एडजस्टेड एसएंडपी ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जुलाई में 57.7 पर पहुंच गया, जो मोटे तौर पर जून में 57.8 था। इंडेक्स ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में और सुधार के भी संकेत दिए। Manufacturing PMI के आंकड़ों ने जुलाई में लगातार 25वें महीने समग्र परिचालन स्थितियों (overall operating conditions) में सुधार का संकेत दिया।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मांग में आई तेजी

हालिया सर्वेक्षण में मांग में सुधार की रिपोर्ट व्यापक थी, और इसके परिणामस्वरूप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए ऑर्डरों का एक और उल्लेखनीय विस्तार हुआ। मांग में तेजी मोटे तौर पर पिछले सर्वेक्षण अवधि में देखी गई वृद्धि के अनुरूप थी।

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इस बीच, नए निर्यात कारोबार में बढ़ोतरी की रफ्तार पिछले नवंबर के बाद से सबसे तेज हो गई है। सर्वे में शामिल लोगों अपने जवाब में कहा कि उन्होंने अमेरिका और बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में ग्राहकों से नए ऑर्डर में वृद्धि देखी।

बढ़ा प्रोडक्शन

नए ऑर्डरों में फिर से तेजी से बढ़ोतरी के साथ, मैन्युफैक्चरर्स ने उत्पादन भी उसी हिसाब से बढ़ाया। जुलाई 2021 से मासिक आधार पर उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। नवीनतम वृद्धि हालांकि तीन महीनों में सबसे कम थी लेकिन पर्याप्त थी।

कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों (extra staff) को लेकर अधिक वर्कलोड का जवाब दिया। रोजगार सृजन (job creation) की स्पीड मोटे तौर पर मई और जून में देखी गई गति के अनुरूप थी। हालांकि, नए ऑर्डरों में वृद्धि की ताकत को देखते हुए, क्षमता में यह विस्तार काम के बैकलॉग को और बढ़ने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था। बकाया कारोबार (Outstanding business ) में लगातार उन्नीसवें महीने वृद्धि हुई, भले ही थोड़ी सी।

नए ऑर्डरों को पूरा करने के प्रयासों के कारण कंपनियों को जुलाई में स्टॉक होल्डिंग्स में फिर से गिरावट आई। पिछले छह वर्षों में तैयार माल के स्टॉक में मासिक आधार पर कमी आई है, हालांकि नवीनतम गिरावट केवल मामूली थी।

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परचेजिंग एक्टिविटी में भी आई तेजी

तीसरी तिमाही की शुरुआत में क्रय गतिविधि (Purchasing activity) में तेजी जारी रही, मई में देखी गई 12-वर्षीय उच्चतम स्तर की तुलना में वृद्धि केवल थोड़ी नरम रही। खरीदारी के स्टॉक में भी तेजी से वृद्धि हुई क्योंकि कंपनियों ने मांग में उछाल के माहौल को देखते हुए इन्वेंट्री बनाने की इच्छा व्यक्त की।

सप्लायर्स से डिलीवरी में तेजी से मैन्युफैक्चरर्स को स्टॉक बनाने के उनके प्रयासों में मदद मिली। लगातार पांचवें महीने में लीड समय कम हो गया, भले ही मामूली रूप से।

कच्चे माल की ऊंची कीमतें

इनपुट लागत पर महंगाई की दर जुलाई में नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, लेकिन सिरीज एवरेज से नरम रही। इनपुट कीमतों में वृद्धि को लेकर पैनलिस्टों ने कच्चे माल, विशेष रूप से कपास की ऊंची लागत बताया।

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कच्चे माल की ऊंची कीमतों और बढ़ती श्रम लागत (labour costs) के कारण कंपनियों को अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाना पड़ा। महंगाई दर बरकरार रही लेकिन तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई।

कंपनियां आम तौर पर आने वाले वर्ष में मांग ऊंची रहने की उम्मीद करती हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि के अनुमानों को समर्थन मिलेगा।

First Published - August 1, 2023 | 12:37 PM IST

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