facebookmetapixel
Q3 Results: DLF का मुनाफा 13.6% बढ़ा, जानें Zee और वारी एनर्जीज समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट कैंसर का इलाज अब होगा सस्ता! Zydus ने भारत में लॉन्च किया दुनिया का पहला निवोलुमैब बायोसिमिलरबालाजी वेफर्स में हिस्से के लिए जनरल अटलांटिक का करार, सौदा की रकम ₹2,050 करोड़ होने का अनुमानफ्लाइट्स कैंसिलेशन मामले में इंडिगो पर ₹22 करोड़ का जुर्माना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हटाए गएIndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये सिंडिकेटेड लोन से भारतीय कंपनियों ने 2025 में विदेश से जुटाए रिकॉर्ड 32.5 अरब डॉलरग्रीनलैंड, ट्रंप और वैश्विक व्यवस्था: क्या महा शक्तियों की महत्वाकांक्षाएं नियमों से ऊपर हो गई हैं?लंबी रिकवरी की राह: देरी घटाने के लिए NCLT को ज्यादा सदस्यों और पीठों की जरूरतनियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?अवधूत साठे को 100 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश 

भारत ने अमेरिका से मांगा ब्रिटेन जैसा करार, लाखों भारतीय श्रमिकों को बड़ी राहत संभव

अमेरिका के साथ टोटलाइजेशन समझौता किए जाने का प्रस्ताव भारत द्वारा पेश किया गया है जिससे भारतीय श्रमिकों पर सामाजिक सुरक्षा के दोहरे कराधान से राहत मिल सकती है

Last Updated- November 16, 2025 | 9:04 PM IST
India US Trade Deal
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत ने ब्रिटेन की तर्ज पर अमेरिका के साथ टोटलाइजेशन समझौता करने का प्रस्ताव पेश किया है। भारत ने इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन से ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी)’ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। टोटलाइजेशन समझौता होने पर अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय श्रमिकों को फायदा हो सकता है। इससे कुशल व अकुशल श्रमिकों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होने से लागत में सुधार आएगा। दरअसल, टोटलाइजेशन समझौता एक दूसरे के देश में जाकर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दोहरे कराधान को रोकता है।

यह प्रस्ताव अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के दौरान किया गया है। अभी इस प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। अधिकारी ने बताया, ‘भारत और ब्रिटेन ने इस साल की शुरुआत में टोटलाइजेशन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह  भारतीय श्रमिकों को तीन साल की अवधि के लिए पूरी तरह से अपने देश में सामाजिक सुरक्षा योगदान का भुगतान करने की अनुमति देता है। हमें अमेरिका के साथ भी इसी तरह के टोटलाइजेशन समझौते की उम्मीद है। हमने जारी बातचीत में प्रस्ताव पेश किया है। इस मामले पर भी चर्चा हुई है।’

टोटलाइजेशन समझौता दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के बीच समन्वय करता है। यह तय करता है कि यदि श्रमिक पहले से ही अपने ही देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान कर रहे हैं तो इन देशों के नागरिक किसी अन्य देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में भुगतान करने से बचें। इसका उद्देश्य दोहरे कराधान से बचना है ताकि श्रमिकों को एक ही काम के लिए दोनों देशों की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों में भुगतान न करना पड़े। भारत लंबे समय से अमेरिकी अधिकारियों को इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। इससे भले ही अमेरिका में काम करते समय भारतीयों को उस देश की सामाजिक सुरक्षआ के लाभ प्राप्त करने की अनुमति नहीं हो लेकिन अमेरिका की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में दिए गए योगदान को भारत में वापस लाने में मदद मिल सकती है।

अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रवक्ता जॉन एस ब्राउन ने बिजनेस स्टैंडर्ड के लिखित सवाल के जवाब में बताया, ‘हम व्यापार और निवेश मामलों पर भारत सरकार के साथ जारी बातचीत को महत्त्व देते हैं और अपने दोनों देशों के बीच उत्पादक व संतुलित व्यापारिक संबंध को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं। हम आपको व्यापार वार्ता पर विशिष्टताओं के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को संदर्भित करते हैं।’

हार्वर्ड जर्नल की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में अस्थायी भारतीय श्रमिकों ने संघीय बीमा योगदान अधिनियम के तहत अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में लगभग 3 अरब डॉलर का वार्षिक योगदान किया –  यह अमेरिकी का सामाजिक व मेडियर को धन मुहैया कराने के लिए अमेरिकी पेरोल कर है। इसका भुगतान कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों करते हैं। इसमें प्रत्येक के लिए 7.65 प्रतिशत  की कुल दर से योगदान देना होता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पिछले एक दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में काम करने वाले भारतीय नागरिकों ने अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में 27.6 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दिया है।’ अमेरिकी सामाजिक सुरक्षा लाभों का लाभ उठाने के लिए श्रमिक को कम से कम 40 तिमाहियों या 10 वर्षों तक योगदान करना चाहिए। हालांकि ज्यादातर एच -1 बी और एल -1 भारतीय श्रमिक दो से पांच वर्षों के भीतर भारत लौट आते हैं – जब तक कि उनके वीजा का विस्तार नहीं किया जाता है। इस प्रकार किसी भी लाभ का दावा करने के लिए अयोग्य हो जाते हैं। नतीजतन उनके सामाजिक सुरक्षा के लिए दिए गए योगदान अमेरिका में ‘जब्त’ हो जाते हैं, उन्हें वापस पाने के लिए कोई तंत्र नहीं है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने तर्क दिया है कि कर्मचारी भविष्य निधि योजना (ईपीएफ) भारत में मुख्य सामाजिक सुरक्षा योजना है। ईपीएफ के दायरे में भारत की आधी आबादी नहीं है। इसलिए द्विपक्षीय टोटलाइजेशन समझौते में प्रवेश करने के उद्देश्यों के लिए इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता है।

लिहाजा भारत सरकार ने इस साल की शुरुआत में भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज की ‘वास्तविकता’ का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा डेटा-पूलिंग की। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने जुलाई में अनुमान लगाया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गया है।

First Published - November 16, 2025 | 9:04 PM IST

संबंधित पोस्ट