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भारत के पास ट्रंप टैरिफ से मौका: गुलाटी

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अशोक गुलाटी बोले— कृषि निर्यात नीति जिंस-दर-जिंस बने, चीन पर भारी शुल्क से भारत को मिल सकता है फायदा

Last Updated- April 09, 2025 | 10:55 PM IST
Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के निर्यात पर 26 प्रतिशत शुल्क प्रभावी होने के बाद अधिकतम फायदा उठाने के लिए भारत की कृषि व्यापार नीति को जिंस-दर-जिंस आगे बढ़ाना चाहिए। कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने हाल के नीति पत्र में यह सुझाव दिया है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस (इक्रियर) के लिए लिखे गए शोध पत्र के अनुसार भारत को कृषि उत्पादों पर 50फीसदी से अधिक के ‘अतिशय शुल्कों’ को तार्किक बनाना चाहिए। देश को व्यापक अधिशेष (गेहूं और डेरी) वाले संवेदनशील कृषि उत्पादों पर शुल्क कोटा लगाने पर विचार करना चाहिए ताकि देश के उद्योग को भी नुकसान नहीं हो और व्यापारिक संबंध भी प्रभावित न हो।

सुलक्षणा राव और तनय सुंतवाल द्वारा लिखित इस पेपर में कहा गया है, ‘भारत को अधिक मूल्य वाले कृषि निर्यातों जैसे आम, अंगूर, अनार, केला को अमेरिका के बाजारों में वरीयता के आधार पर पहुंच दिलवाने के लिए निरंतर दबाव बनाना चाहिए। इससे हमारी निर्यात श्रृंखला सुचारू होगी। इन उत्पादों को लंबे समय तक अमेरिका में नियामकीय अड़चनों का सामना करना पड़ा है।’

वैश्विक व्यापार के ऑर्डर में बदलाव शुरू होने की स्थिति में राजनय और आर्थिक रणनीति का सही ढंग से समायोजन कर भारत अमेरिका के बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है। इस पेपर में भारत के कृषि निर्यात बाजार का विविधीकरण कर अमेरिका की जगह अन्य क्षेत्रों जैसे यूरोपियन यूनियन (ईयू) में करने के लिए कहा गया है। पेपर के अनुसार, ‘वैश्विक आयात का करीब 28.42 फीसदी हिस्सा ईयू में जाता है।

लिहाजा यह व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।’इसके अनुसार, ‘हम इस बात पर जोर देना चाहते हैं कि भारत को 26 फीसदी शुल्क को एकांकी रूप से नहीं देखना चाहिए। इसका आकलन अनिवार्य रूप से इस आधार पर होना चाहिए कि भारत के प्रतिस्पर्धी कैसे प्रभावित हुए हैं। भारत पर औसतन 26 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया लेकिन चीन पर 54 फीसदी का भारी शुल्क लगाया गया।’

लिहाजा भारत के पास चीन के प्रमुख श्रम साध्य और निर्यात क्षेत्रों में आने वाली संभावित कमी की स्थिति में इस रणनीतिक अवसर का उपयोग करने का अवसर है। उदाहरण के तौर पर कपड़ा (एचएसएन कोड 57, 61, 62 और 63) में भारत का अमेरिका को निर्यात 9.5 अरब डॉलर (2023) था। इस क्षेत्र में चीन (अमेरिका का नया शुल्क 54 फीसदी), बांग्लादेश (37 फीसदी) व वियतनाम (46 फीसदी) का निर्यात गिरने से भारत के समक्ष संभावित अवसर पैदा हो सकता है।

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First Published - April 9, 2025 | 10:55 PM IST

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