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Year Ender: क्या 2026 में महंगाई की परिभाषा बदलेगी? नई CPI सीरीज, नए टारगेट व RBI की अगली रणनीति

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2025 में महंगाई की स्थिति काफी सुकून देने वाली रही। CPI पर आधारित रिटेल महंगाई RBI के 2 से 6 फीसदी के कम्फर्ट जोन में रही

Last Updated- December 30, 2025 | 4:19 PM IST
inflation
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में पिछले एक साल से महंगाई की रफ्तार काफी धीमी पड़ी है। खाने-पीने की चीजों के दाम कम होने और GST में कटौती की वजह से कीमतों पर अच्छा कंट्रोल रहा। अब सरकार 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI की गणना करने के तरीके को बदलने की सोच रही है। साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI को महंगाई कंट्रोल करने का जो टारगेट दिया गया है, उसे भी नए सिरे से तैयार किया जाएगा। ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब महंगाई RBI के तय दायरे में बनी हुई है।

2025 में महंगाई की स्थिति काफी सुकून देने वाली रही। CPI पर आधारित रिटेल महंगाई RBI के 2 से 6 फीसदी के कम्फर्ट जोन में रही। अगले साल भी ये इसी तरह रह सकती है, जिससे सेंट्रल बैंक को ब्याज दरों में और कटौती का मौका मिल सकता है। सितंबर में सरकार ने करीब 400 सामानों पर GST रेट घटाए, जिससे कीमतों पर और ज्यादा असर पड़ा। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI में भी महंगाई कम होने के संकेत साफ दिखे। साल की शुरुआत में WPI पॉजिटिव लेकिन घटती हुई थी, खासकर खाने और ईंधन की कैटेगरी में। जून तक ये डिफ्लेशन में चली गई, यानी कीमतें गिरने लगीं। जुलाई और अक्टूबर में भी नेगेटिव रीडिंग आईं।

CPI या हेडलाइन महंगाई नवंबर 2024 से कम होने लगी थी। जून 2025 तक ये RBI के 2 से 4 फीसदी के दायरे में रही, उसके बाद 2 फीसदी से भी नीचे चली गई। CPI में खाने की चीजों का वजन करीब 48 फीसदी है, और फूड महंगाई जनवरी में 6 फीसदी से शुरू होकर जून में नेगेटिव हो गई। नवंबर के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, ये -3.91 फीसदी पर थी। महंगाई के 2 फीसदी से नीचे जाने से सरकार और RBI के बीच टारगेट पर बहस छिड़ गई है, क्योंकि मौजूदा मैंडेट 2 से 4 फीसदी का है। RBI ने इंफ्लेशन टारगेटिंग पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। सरकार नया फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2025 से लागू करेगी, क्योंकि मौजूदा पांच साल का रेजीम मार्च में खत्म हो रहा है।

महंगाई के आंकड़ों में गिरावट का ट्रेंड

महंगाई कम होने की वजह से RBI ने फरवरी 2025 से अब तक शॉर्ट-टर्म बेंचमार्क लेंडिंग रेट यानी रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। ये कदम अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए उठाए गए, क्योंकि कीमतें काबू में हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि हेडलाइन महंगाई 2026-27 के पहले हाफ में 4 फीसदी के टारगेट के करीब रहेगी। अगर सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं को निकाल दें, तो ये और कम होगी, जैसा कि 2024 की शुरुआत से ट्रेंड रहा है। अच्छी फसल, कम खाने के दाम और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों का सुकून भरा आउटलुक बताता है कि 2025-26 के पूरे साल में CPI महंगाई करीब 2 फीसदी रह सकती है। ये शुरुआती अनुमान से आधी है।

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WPI और CPI में फर्क वेटिंग पैटर्न और कवरेज की वजह से है। फूड सेगमेंट दोनों में डिफ्लेशन में रहा, लेकिन सर्विसेज और नॉन-फूड गुड्स ने CPI को नेगेटिव होने से रोका। WPI में कच्चे तेल, ईंधन का ज्यादा वजन और मैन्युफैक्चर्ड सेगमेंट में कम महंगाई की वजह से फूड ने इसे डिफ्लेशन में धकेल दिया। नवंबर में WPI डिफ्लेशन में बनी रही, जबकि CPI महंगाई सिर्फ 0.7 फीसदी थी। सोने को निकालकर देखें तो CPI भी डिफ्लेशन में रजिस्टर हुई। पूरे साल दोनों इंडेक्स ने हर महीने उम्मीद से कम रीडिंग दीं, जो बड़ा सरप्राइज रहा।

नए CPI सीरीज और पॉलिसी रिव्यू की दिशा

सरकार एक नए CPI सीरीज पर काम कर रही है, जिसका बेस ईयर 2024=100 होगा। ये दशक से ज्यादा समय बाद हो रहा बड़ा बदलाव है। इसमें कवरेज, आइटम बास्केट, वेट्स और इंडेक्स बनाने की मेथडोलॉजी को पूरी तरह रिवाइज किया जाएगा। मकसद है कि महंगाई के डेटा को ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव, भरोसेमंद, एक्यूरेट और क्वालिटी वाला बनाना। नई सीरीज फरवरी में रिलीज होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि 2026 में महंगाई का सबसे अहम पहलू ये नया इंडेक्स और उसकी कंपोजिशन होगी। ये फरवरी 2026 में लागू हो जाएगी, जो किसी भी रीयलिस्टिक फोरकास्ट को ड्राइव करेगी।

अगर मानसून नॉर्मल रहा, तो 2026 में महंगाई अच्छे से कंट्रोल में रहेगी। 2025 की बेहद कम महंगाई के नंबर लो बेस की वजह से उलट सकते हैं, जिससे हाई नंबर आएंगे। लेकिन कुल मिलाकर ये 4 से 4.5 फीसदी के रेंज में रह सकती है। इससे रेट कट का ज्यादा स्कोप नहीं बचेगा, और फरवरी आखिरी महीना हो सकता है जब रेट पर फैसला लिया जाए। कोर महंगाई GST के असर से और कम होनी चाहिए। ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का मानना है कि WPI और CPI का अंतर उनके वेटिंग और कवरेज से आता है।

एक्सपर्ट्स की राय और आगे की उम्मीदें

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि कम महंगाई ने RBI को रेट कट का रूम दिया, भले ग्रोथ ट्रेंड से ऊपर रही। आगे देखें तो FY27 में कंज्यूमर महंगाई बेस इफेक्ट्स से 5 फीसदी तक जा सकती है, जबकि ब्याज दरें 5.25 फीसदी पर स्टेडी रहेंगी। पहले ऐलान किए रेट कट्स का ट्रांसमिशन जारी रहेगा। RBI की 2025-26 की आखिरी बाय-मंथली मॉनेटरी पॉलिसी 4 से 6 फरवरी 2026 को शेड्यूल है।

ये सारे बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब अर्थव्यवस्था में स्थिरता है, लेकिन महंगाई के नए पैमाने और टारगेट्स से आगे की दिशा तय होगी। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2025 का लो इंफ्लेशन ट्रेंड 2026 में कुछ उलट सकता है, लेकिन कुल मिलाकर कंट्रोल में रहेगा। सरकार और RBI मिलकर इसे और बेहतर बनाने पर फोकस कर रहे हैं।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - December 30, 2025 | 4:19 PM IST

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